मैं 'स्टार सन' नहीं हूं: अर्जुन कपूर

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Image caption 'इशकज़ादे' का निर्देशन राष्ट्रिय पुरस्कार विजेता हबीब फैसल ने किया है.

निर्माता बोनी कपूर के बेटे अर्जुन कपूर मानते हैं कि वो 'स्टार सन' नहीं हैं. अर्जुन 'इशकज़ादे' से बॉलीवुड में कदम रख रहे हैं.

अर्जुन कहते हैं, ''स्टारडम की परिभाषा तो बहुत अलग होती है. मेरे पापा तो निर्माता हैं तो मैं 'स्टार सन' कैसे हुआ भला. हां ये ज़रूर है कि मुझे अपने पिता की वजह से इंडस्ट्री में खूब मान मिलता है. मैं जिससे भी मिलने जाता हूं वो मेरे साथ बहुत तमीज़ से पेश आता है. मेरे परिवार के बाकी सदस्य भी फिल्मों से जुड़े हैं तो मान तो मिलता है.''

साथ ही अर्जुन ये भी कहते हैं, ''पापा की वजह से शायद कोई दरवाज़ा खुल भी जाए लेकिन अन्दर जाकर काम तो मुझे खुद ही करना होगा. परिवार का नाम आपकी किसी जाने-माने निर्देशक के साथ मुलाक़ात करवा सकता है, लेकिन कैमरा के सामने कोई नाम काम नहीं आता, कैमरा के सामने आप जो काम करेंगे वो ही आपका भविष्य तय करेगा इसलिए मेहनत करना ज़रूरी है.''

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में एक नहीं ऐसे कई वाकये आपको मिल जाएगे जहां एक निर्माता पिता ने अपने पुत्र को अपनी ही एक बड़ी बजट फिल्म के साथ सबके सामने पेश किया हो. अर्जुन कपूर के साथ ऐसा नहीं हुआ. तो क्यूं अर्जुन के पिता बोनी कपूर ने उन्हें लॉन्च नहीं किया?

इस सवाल का जवाब देते हुए अर्जुन कहते हैं, ''फिल्में बनाना एक बिज़नेस है. पापा मेरे साथ फिल्म तभी बनाते न जब मैं किसी फिल्म की कहानी में सही बैठता. अगर पापा बस ये सोच कर फिल्म बना डालते कि उन्हें मुझे इंडस्ट्री में लॉन्च करना है तब तो ये बात सही नहीं होती न.''

इसी बात को आगे बढ़ाते हुए अर्जुन कहते हैं, ''पापा और मैं सही विषय खोज ही रहे थे कि मैंने यशराज बैनर के तले बनने वाली फिल्म 'इशकज़ादे' के लिए ऑडिशन दे दिया. वैसे भी आज के ज़माने में पहली या दूसरी फिल्म मायने नहीं रखती. आगे चल कर तो मुझे अपने पापा के बैनर को ही आगे बढ़ाना है, जो मेरा खुद का भी बैनर है.''

पहली पसंद !

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Image caption सलमान खान के कहने पर अर्जुन ने अपना वज़न कम किया. अर्जुन का वज़न 140 किलो था.

अर्जुन कपूर बॉलीवुड में अपनी शुरुआत भले ही निर्देशक हबीब फैसल की फिल्म 'इशकज़ादे' के साथ कर रहे हैं, लेकिन मज़े की बात तो ये कि अर्जुन तो कभी अभिनेता बनना ही नहीं चाहते थे. तो क्या थी अर्जुन की पहली पसंद?

इस सवाल का जवाब बीबीसी को देते हुए अर्जुन कहते हैं, ''मैं तो निर्देशक बनने चला था लेकिन मेरी मुलाक़ात सलमान खान से हो गई और उन्होंने मुझे कहा कि एक्टिंग करो वरना पछताओगे.''

बॉलीवुड में एक अभिनेता के लिए सबसे पहला मापदंड क्या होता? शायद ये कि वो कैसा दिखता है. तो हम आपको बता दें कि एक वक़्त था जब अर्जुन कपूर 140 किलो के हुआ करते थे. तो कैसे बदला अर्जुन ने खुद को?

इस सवाल का जवाब अर्जुन कुछ इस अंदाज़ में देते हैं, ''सांस लेना छोड़ दिया मैंने तो मेरे शारीर में जितनी भी हवा भरी थी वो सब निकल गई. अगर सच कहूं तो सलमान खान ने मुझे प्रेरित किया कि मैं अपना वज़न कम करूं. सलमान भाई ने मुझ पर भरोसा जताया कि मैं कर सकता हूं. सलमान भाई की एक खासियत है कि वो एक बार किसी के साथ कोई नाता जोड़ लेते है तो फिर उसे बरकरार रखते हैं. उन्होंने मुझे अपने अंडर लिया तो फिर मुझे पतला कर के ही छोड़ा.''

अर्जुन ये भी कहते हैं, ''मुझे अपना वज़न कम करने में चार साल लगे. इसी दौरान मैंने एक्टिंग क्लास भी की. धीरे-धीरे मुझे भी खुद पर भरोसा हो गया कि मैं भी एक्टिंग कर सकता हूं.''

कैसे मिली 'इशकज़ादे'?

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Image caption जहां परिणीती चोपड़ा की 'यशराज' के साथ ये दूसरी फिल्म है वहीं अर्जुन कपूर की ये पहली फिल्म है.

तो कैसे मिला अर्जुन को मौका 'इशकज़ादे' में काम करने का?

सवाल का जवाब देते हुए अर्जुन कहते हैं, ''जब मैं पतला हो गया तो मैंने अपना एक फोटोशूट करवाया. और अपनी दो तीन तसवीरें मैंने 'फेसबुक' पर डाल दी. 'यशराज फिल्म्स' की कास्टिंग डायरेक्टर शानू शर्मा ने वो तसवीरें देखी और वो मुझसे मिली. तब शानू को पता चला कि मैं बोनी कपूर का बेटा हूं. फिर भी उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या मैं ऑडिशन देना चाहूंगा. मैंने कहा हां क्यों नहीं. अब किस्मत कहूं या फिर कुछ और मेरा पहला ऑडिशन ही सबसे अच्छा था और मुझे 'इशकज़ादे' में मुख्य भूमिका मिल गई.

'इशकज़ादे' में अपनी भूमिका पर रौशनी डालते हुए अर्जुन कहते हैं, ''फिल्म में मैं परमा का किरदार निभा रहा हूं, जो एक बेहद ही अतरंगी किरदार है. परमा एक जानवर है, वो खुद नहीं जानता कि वो आगे क्या करेगा. जो उसके मन में आता है वो बिना सोचे कर डालता है. परमा को ये बिलकुल नहीं लगता कि वो भी कभी गलत हो सकता है.''

साथ ही वो कहते हैं, ''वैसे भी हबीब सर को पता था कि उन्हें हमसे क्या चाहिए. तो बस मैं हबीब सर की बात सुनते गया और मेहनत करता चला गया.''

हबीब फैसल वो ही हैं जिन्हें अपनी फिल्म 'दो दुनी चार' के लिए राष्ट्रिय पुरस्कार से नवाज़ा गया था. फिल्म में अर्जुन के साथ हैं परिणीती चोपड़ा. परिणीती की पहली फिल्म थी 'लेडीज़ वर्सिस रिक्की बहल'.

परिणीती के बारे में बात करते हुए अर्जुन कहते हैं, ''मुझे परिणीती की और परिणीती को मेरी सभी खूबियाँ और सभी खामियां पता हैं. फिल्म की शूटिंग के दौरान हम दोनों ने एक-दूसरे के साथ इतना समय बिताया कि हम दोनों एक दूसरे की नस-नस से वाकिफ हो गए. और शायद इसी वजह से फिल्म में हमारी कैमिस्ट्री की सभी तारीफ कर रहे हैं.''

अर्जुन, बोनी कपूर और उनकी पहली पत्नी मोना कपूर के बेटे हैं. मोना कपूर का हाल ही में स्वर्गवास हुआ था.

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