क्या दम है 'शंघाई' के संगीत में ?

स्कारलेट मेलिश विल्सन

दिबाकर बैनर्जी नये दौर के फ़िल्मकारों में सबसे बड़ी संभावनाओं में एक हैं.

अपने यथार्थवादी और अनूठे ट्रीटमेंट की वजह से मुख्यधारा से अलग खड़े हो कर भी अपनी जगह बनाने में अब तक कामयाब रहे हैं और एक खास दर्शक वर्ग को उनकी फिल्मों का हमेशा इंतजार रहता है.

संगीत, उनकी फ़िल्मों में एक एक खास निभाता है और अनूठे कथानक के साथ संगीत के स्वर भी अनूठे मिलते हैं.

दिबाकर की नई फ़िल्म ’शंघाई’ एक राजनैतिक क्राइम-थ्रिलर है. अब तक की फ़िल्मों में संगीत का जिम्मा अक्सर नए और उभरते हुए हस्ताक्षरों के जिम्मे रहा है, जैसे बापी-तुतुल, ध्रुव (खोसला का घोसला), स्नेहा खानविल्कर (ओए लकी, लकी ओए). लेकिन इस बार दिबाकर ने संगीत का जिम्मा सौंपा है विशाल-शेखर की स्थापित जोड़ी को.

’शंघाई’ में विशाल शेखर के संगीत के तेवर कथानक के मुताबिक हैं. एलबम में अलग-२ रंगों के पाँच ट्रैक्स हैं, जिन्हें पाँच अलग गीतकारों ने शब्द दिये है.

’भारत माता की जय’ एलबम को एक जोशीली शुरुआत देता है. एक सड़क का धुंआधार जुलूस गीत है जिसमें देश की विसंगतियों पर कटाक्ष है.

कीर्ति संगठिया, विशाल ददलानी, अरुण इंगले, मंदार आप्टे के स्वर विशाल-शेखर की धुन को ऊर्जा प्रदान करते हैं.

विशाल-शेखर का संयोजन भी सड़क पर टोली का माहौल बनाने में सहयोग देते हैं. गीत के बोल स्वयं दिबाकर के हैं लेकिन गीतकार दिबाकर पर निर्देशक दिबाकर हावी हैं और शब्दों में कवि का नजरिया गायब है.

गीत के तेवर व्यंगात्मक और आक्रामक हैं लेकिन गीत में टोली की मस्ती भी है जिसके चलते ’भारत माता’ फिल्म का सबसे लोकप्रिय गीत रहेगा इसमें कोई दो राय नहीं.

’इम्पोर्टेड कमरिया’ रिचा शर्मा के स्वरों में देसी आईटम गीत है सहयोगी स्वर विशाल-शेखर के हैं.

गीत की संरचना और संयोजन पर गुलाल के राणा जी और बीड़ो का असर साफ नज़र आता है. अन्विता दत्त गुप्तन के बोल भी गुलाल के राजनीतिक मुज़रों की तरह व्यंगबाण से भरे हैं फिर भी गुलाल की मस्ती और जादू को दोहराने में नाकाम रहे हैं. रिचा शर्मा हमेशा की तरह अपनी गायकी से प्रभावित करती हैं.

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’दुआ’ एलबम की एक अच्छी पेशकश है, नन्दिनी श्रीकर और अरिजीत सिंह के स्वरों में. पिछले कुछ एल्बम्स में ये दोनो गायक अपनी विशिष्ट शैली के चलते अपना एक खास स्थान बनाने में सफल रहे हैं.

विशाल-शेखर ने अपनी धुन और संयोजन के साथ नन्दिनी की मंझी हुई आवाज़ का बखूबी उपयोग किया है. कुमार के बोल भी गीत को उचित माहौल प्रदान करते हैं.

शेखर और राजा हसन की आवाजों में ’खुदाया’ एलबम की अगली प्रस्तुति है. विशाल-शेखर के संयोजन में कोरस के स्वर गीत को एक अलग रंग देते हैं.

नीलेश मिश्रा के बोल अच्छे बन पड़े हैं और शेखर भी गायकी में अपनी सीमित रेंज के बावजूद प्रभावित करते हैं.

’मोर्चा’ एक और जुलूसी गीत है. फ़िल्म की राजनीतिक पृष्ठभूमि को देखते हुए कथानक में किसी महत्वपूर्ण पल का साक्षी हो सकता है.

राजा हसन और विशाल के स्वरों में जोश तो हैं लेकिन बहुत असर नह्यीं है. एलबम में श्रीवत्स कृष्णा के स्वरों मे ’विष्णु सहस्त्रनाम’ भी शामिल है.

कुल मिला कर ’शंघाई’ में विशाल-शेखर फिर से अपने ’कंफर्ट ज़ोन’ के बाहर निकले हैं और कथानक के अनुरूप विविध रंगों का संगीत देने में कामयाब हुए हैं.

भारत-माता की, दुआ और खुदाया के लिए एलबम सुना जा सकता है.

रेटिंग के लिहाज़ से ’शंघाई’ के संगीत को 3/5 (पाँच मे से तीन)

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