और अब संगीतमय जंग..

संगीत की महफिल जेल में सजे, और गीत हों इंसाफ की गुहार लगाते हुए, तो जहन में कोई सार्वजनिक हित में सरकार की ओर से आयोजित कार्यक्रम की छवि बनती है.

लेकिन जब मैं भारत की सबसे बड़ी जेल, तिहाड़ जेल पहुंची, तो नजारा एकदम अलग था.

आधुनिक गिटार और ड्रम्स पर जमाइका का संगीत बजाता बैंड और उसकी पाश्चात्य सी लगने वाली धुनों पर थिरकते कैदी.

संगीत की ये महफिल वाकई अलग थी. क्लब और डिस्को की जगह जेल के कैदियों के बीच ‘द स्कावेन्जर्स’ नाम का ये भारतीय बैन्ड, प्यार मोहब्बत की नहीं बल्कि अत्याचार और इंसाफ की बात कर रहा था.

अपने जैसा ये बैंड अनोखा जरूर है पर इकलौता नहीं. भारत और पाकिस्तान में एक बार फिर दमन के विरोध के लिए कला को माध्यम बनाने की कोशिश की जा रही है.

इन दोनों देशों के कुछ म्यूजिक बैन्ड्स अब सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को अपने गीतों में ढालने लगे हैं.

बॉलिवुड और पॉप संगीत सुनने की आदि जनता को अब अपने ही बैन्ड्स के रॉक संगीत के जरिए कुछ अलग सुनने को मिल रहा है.

‘छिपी सच्चाई’

‘द स्कावेन्जर्स’, भारत में अफ्रीकी देश जमाइका का संगीत अपनाने वाला पहला बैंड है. इनके गीतों में भ्रष्टाचार, दंगों और पुलिस एन्काउंटर जैसे मुद्दों की चर्चा है.

बैंड के लीड गायक तरू डाल्मिया कहते हैं, “अंग्रेजों ने जमाइका में भी वैसे ही हुकूमत की जैसे भारत में, ये आम लोगों की आवाज है, जो अब मीडिया में कहीं खो जाती है, सच्चाई सामने नहीं आ पाती, इसीलिए हमने इसे संगीत के माध्यम से लोकप्रिय करने की ठानी.”

सफेद शर्ट, काली पैंट और काले रंग की चुस्त जैकेटों में ये बैंड, आम रॉक बैंडस से काफी हटकर दिखता है.

अपने गीतों के जरिए दमन के खिलाफ आवाज उठाने को इस बैंड ने ‘संगीतमय जंग’ की संज्ञा दी है.

पाकिस्तान में भी बुलंद

और ऐसे संगीत की सुगबुगाहट भारत में ही नहीं पाकिस्तान में है. पाकिस्तानी बैंड्स अपने देश में ही नहीं बल्कि सरहद पार भी अपने विरोधी संगीत को ले जा रहे हैं.

भारत की राजधानी दिल्ली के पास बसे गुड़गांव के एक क्लब की रात को पाकिस्तान से आए - लाल बैंड - ने मानो लाल रंग से रंग दिया है.

इन्होंने रॉक संगीत में फैज अहमद फैज जैसे शायरों के बोल ढालकर उसे सूफी कलाम के नज़दीक पहुंचाया है.

Image caption 'लाल बैंड' के तैमूर रहमान को उनके गानों के विरोध में नाराजगी भरे ईमेल आए हैं.

क्लब ऐसा संगीत सुनने के अनुभव पर वहां आईं नुपुर कोहली कहती हैं, “मुझे रॉक संगीत बहुत पसंद है और इन्होंने उसमें जो बोल डाले हैं, जैसे दहशतगर्दी मुर्दाबाद, वो इतने मायने रखते हैं कि सुनने का मजा दोगुना हो जाता है.”

आसान नहीं विरोध

लाल बैंड के गीतों का ही नहीं, पितृसत्ता और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर बने उनके म्यूज़िक वीडियो्स का भी विरोध हुआ है.

उन्हें गुस्से से भरे ईमेल भी आए हैं और कई बार उनके देश के म्यूजिक चैनलों ने खुद ही उनके गानों को बैन भी किया है.

बैंड शुरू करने वाले राजनीति शास्त्र के अध्यापक हैदर रहमान बताते हैं कि उन्हें इस सबसे डर नहीं लगता.

हैदर कहते हैं, “हमारा मकसद है आवाज उठाना, तो अगर हमारी आवाज से कुछ चर्चा और प्रतिक्रियाएं आती हैं, तो ये अच्छा ही है, बुरा होता अगर कोई हमारे संगीत पर ध्यान ही नहीं देता.”

इंटरनेट और सोशल नेटवर्किंग की बदौलत इन बैन्ड्स को अपने देश में और सरहद पार एक पहचान बनाने का मौका मिला है.

इनकी तादाद अभी कम है लेकिन संगीत के एक नए दौर को लोकप्रिय बनाने की इनकी कोशिश जारी है.

संबंधित समाचार