खत्म होगा ज़मींदाराना माहौल: जावेद अख्तर

जावेद अख्तर इमेज कॉपीरइट PR

गीतकार जावेद अख्तर कॉपीराइट संशोधन बिल के लोकसभा में पास होने को संगीत बिरादरी के लिए उठाया गया एक बहुत बड़ा कदम बताते हैं.

बीबीसी से खास बात करते हुए जावेद अख्तर कहते हैं, "ये एक बेहद स्वागत योग्य कदम है. इससे गीतकारों और संगीतकारों को उनका वाजिब हक मिलेगा और निर्माताओं और म्यूजिक कंपनियों का जमींदाराना रवैया खत्म होगा."

गौरतलब है कि ये बिल मंगलवार 22 मई को लोकसभा में भी पास हो गया. इसके साथ ही ये विधेयक कानून बन गया. इससे पहले 17 मई को ये बिल राज्यसभा में भी पास हो चुका है. जावेद अख्तर राज्यसभा सांसद भी हैं और वो लंबे समय से इस बिल को पास कराने के प्रयासों की अगुआई कर रहे थे.

इस बिल के मुताबिक अब कोई भी गाना फिल्म के अलावा जहा-जहां बजेगा. जैसे रेडियो पर या टेलीविजन पर या फिर किसी स्टेज शो में परफॉर्म किया जाएगा या मोबाइल रिंग टोन के रूप में इस्तेमाल होगा, उसकी रॉयल्टी का हिस्सा गीतकार और संगीतकार को भी मिलेगा.

सुनिए जावेद अख्तर को

यानी अब किसी भी गाने की रॉयल्टी में फिल्म के निर्माता और म्यूजिक कंपनी के अलावा गीतकारों और संगीतकारों का भी हिस्सा होगा. जावेद अख्तर ने ये भी बताया कि ये हिस्सा कितना होगा ये कॉपीराइट बोर्ड तय करेगा.

जावेद के मुताबिक भारत में गीतकारों और संगीतकारों को पहले भी ये अधिकार प्राप्त था, लेकिन फिल्म के निर्माता और म्यूजिक कंपनियों गाने की रिकॉर्डिंग के वक्त उनसे लिखवा लेते थे कि वो एक निश्चित पारिश्रमिक के बदले अपना ये अधिकार छोड़ रहे हैं. यानी फिल्म के अलावा और कहीं भी उस गीत का इस्तेमाल होता था तो रॉयल्टी गीतकार और संगीतकार के नाम पर आती जरूर थी लेकिन उसे फिल्म निर्माता और संगीत कंपनियां रख लेती थीं. जावेद के मुताबिक अब इस कॉपीराइट विधेयक के पास हो जाने के बाद ऐसा नहीं हो पाएगा.

संगीतकार विशाल ने भी इस विधेयक के पास हो जाने पर खुशी जताई.

हालांकि इरोस फिल्म्स और म्यूजिक से जुड़ी कृषिका लुल्ला ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि इस विधेयक के पास हो जाने से संगीत कंपनियों को झटका लगा है क्योंकि वो पहले से ही काफी ऊंची कीमत देकर फिल्म निर्माताओं से संगीत अधिकार खरीदती हैं और अब उन्हें रॉयल्टी भी गीतकारों और संगीतकारों से शेयर करनी पड़ेगी.

संबंधित समाचार