मैंने 'मुन्ना भाई' और 'थ्री इडियट्स' को ना कहा था: बमन ईरानी

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Image caption बमन ने एकलव्य, मैं हूं न, डॉन और लक्ष्य जैसी फिल्में भी की हैं.

चवालिस साल की उम्र में अपनी पहली हिंदी कमर्शियल फिल्म 'मुन्ना भाई एमबीबीएस' करने वाले अभिनेता बमन ईरानी कहते हैं कि जब फिल्म के निर्देशक राजू हिरानी उनके पास इस फिल्म का प्रस्ताव लेकर आए तो उन्होंने ये फिल्म करने से ही मना कर दिया.

बीबीसी से एक खास बातचीत में बमन ने कहा, ''मुन्ना भाई से पहले मैंने एक अंग्रेजी एक्सपेरिमेंटल फिल्म 'लेट्स टॉक' की थी, इसी फिल्म को देख कर मुन्ना भाई के निर्माता विधु विनोद चोपड़ा और निर्देशक राजू हिरानी मेरे पास आए थे. लेकिन मैंने मुन्ना भाई का प्रस्ताव ठुकरा दिया था.''

क्यों मना कर दिया था बमन ने मुन्ना भाई में डॉक्टर अस्थाना जैसे किरदार को?

बमन कहते हैं, ''उस वक़्त मुझे खुद पर यकीन नहीं था. मुझे नहीं लगता था कि मैं डॉक्टर अस्थाना का किरदार निभा सकता हूं. मेरी हिंदी भी कमज़ोर थी. मुझे लगा कि अगर कोई भी सीन करते वक़्त उसमें कोई सुधार लाने की ज़रुरत हुई और कमज़ोर हिंदी की वजह से वो नहीं कर पाया तो मैं अपना शतप्रतिशत कैसे दूंगा. इसीलिए मैंने पहले हिंदी सीखी.''

वैसे फिल्मों को ना कहना बमन की पुरानी आदत है. उन्होंने तो अपने फ़िल्मी करियर की पहली फिल्म 'लेट्स टॉक' को भी मना कर दिया था. लेकिन 'लेट्स टॉक' तो एक अंग्रेजी फिल्म थी. तो इस फिल्म को मना करने की क्या वजह रही?

इस सवाल का जवाब देते हुए बमन कहते हैं, ''लेट्स टॉक की शूटिंग से पहले हमें छह महीने की वर्कशॉप करनी थी, हालांकि फिल्म की शूटिंग में केवल 15 दिन लगे. मेरे पास फिल्म को देने के लिए वो छह महीने का वक़्त नहीं था. फिल्मों में आने से पहले मैं फोटोग्राफर था. और छह महीने के लिए अगर मैं काम नहीं करता तो मेरा घर कैसे चलता. बहुत सोचने के बाद मैंने 'लेट्स टॉक' के लिए हां कर दी. आज मुझे लगता है की मैंने हां करके ठीक ही किया.''

कभी हिंदी न आने के डर के कारण तो कभी घर कैसे चलेगा उस डर के कारण बमन ने फिल्मों की ओर जाने के बारे में दो नहीं कई बार सोचा, तो बमन को उनके इस डर पर जीत किसने दिलाई?

बमन कहते हैं, ''मेरे अंदर बैठे इंसान से ही मुझे हिम्मत मिली. मुझे लगता है कि आपका सबसे बड़ा दोस्त और सबसे बड़ा दुश्मन आपका खुद का डर ही होता है. अगर आपको किसी भी चीज़ से डर नहीं लगता है तो इसका मतलब है कि आपको खुद पर ज़रुरत से ज़्यादा यकीन है और अगर आप बिलकुल ही डर जाएंगे तो इसका मतलब है कि आपको खुद पर यकीन ही नहीं है.''

बमन ये भी कहते हैं कि पहले तो हर इंसान को डरना ही चाहिए क्योंकि उस डर पर जीत पाने के लिए आप कड़ी मेहनत करते हैं, जो रंग लाती है.

बमन कहते हैं, ''मेरा तो मानना है कि आप मुझसे जो भी रोल करवा रहे हैं उसे करवाने से पहले आप मुझे खूब डरा दीजिए. कोई भी रोल मुझे देने से पहले आप मुझसे कहिए कि अरे आप ये किरदार नहीं निभा पाएंगे. जब ऐसा मेरे साथ होता है तो मेरे अंदर जो इंसान बैठा है वो मुझसे कहता है कि नहीं नहीं मैं ये रोल कर सकता हूं. और फिर उस रोल को निभाने के लिए मैं मेहनत करता हूं.''

बमन ने बीबीसी से की इस खास बातचीत में ये भी बताया कि उनके द्वारा निभाए गए जिस भी किरदार ने दर्शकों के दिलों को छुआ है उन सभी किरदारों के लिए पहले उन्होंने मना ही किया था.

बमन कहते हैं, ''मेरे जिस भी किरदार ने लोगों के दिलों पर छाप छोड़ी मैं उसे करने से पहले बेहद ही डरा हुआ था और मैंने हर उस रोल को मना भी किया था. मैंने खोसला का घोसला को मना किया, जैसा की मैंने पहले भी बताया मुन्ना भाई को मना किया यहां तक की मैंने 'थ्री इडियट्स' को भी मना किया था. मेरी जो आनेवाली फिल्म है 'फरारी की सवारी' मैंने तो उसे भी मना कर दिया था.''

बमन कहते हैं कि किसी भी फिल्म को मना करने से उनमें एक तरह का विश्वास जागृत होता है. वो कहते हैं, ''मेरा मानना है कि पहले किसी भी फिल्म को मना कर लो, अगर भगवान की मर्ज़ी हुई तो वो रोल मेरे पास वापस आएगा. पहले से ही मुझे ये नहीं सोचना चाहिए कि ये तो मेरे बाएं हाथ का खेल है क्योंकि अगर वो मेरे बाएं हाथ का खेल है तो उस रोल में कोई दम ही नहीं है.''

वैसे 'फरारी की सवारी' इस हफ्ते रिलीज़ हो रही है. फिल्म में बमन ईरानी के साथ हैं शर्मन जोशी.

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