'पतंग' में उड़ान भरती जिंदगी

पतंग फिल्म
Image caption कई अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में इस फिल्म को दिखाया और सराहा जा चुका है.

अमरीका में जन्मे भारतीय मूल के फिल्मकार प्रशांत भार्गव की पहली फीचर फिल्म ‘पतंग’ का शुक्रवार को अमरीका और कनाडा में प्रीमियर हुआ.

इस फिल्म को भारत के गुजरात राज्य के अहमदाबाद शहर में फिल्माया गया है और इस फिल्म की काफी चर्चा हो रही है.

भारत में तो अभी इस फिल्म को नहीं रिलीज किया गया है लेकिन विश्व भर में एक दर्जन से अधिक फिल्म महोत्सवों में इसे दिखाया और पुरस्कृत किया जा चुका है.

शिकागो में जन्मे प्रशांत भार्गव ने इस फिल्म का निर्देशन किया, पटकथा लिखी और खुद ही संपादक भी किया.

पतंगों के जरिए जिंदगी

प्रशांत भार्गव कहते हैं, “कई साल पहले मैंने जब पहली बार अहमदबाद में उत्तरायन पतंग महोत्सव के दौरान पूरे शहर को आसमान में उड़ने वाली लाखों पतंगो को घूरते देखा, उन्हे पतंगबाजी में डूबे देखा तो मैंने सोच लिया था कि मुझे इस पर एक फिल्म बनानी ही है.”

वर्ष 2005 में इस फिल्म की शूटिंग पहली बार शुरू हुई लेकिन इसे बनाने में 7 साल लग गए. फिल्म के निर्देशक कहते हैं कि उन्होंने कई सौ घंटों के फुटेज को फिल्म की कहानी में पिरोने के लिए जल्दबाजी करना ठीक नहीं समझा.

फिल्म की कहानी एक व्यापारी के इर्द गिर्द घूमती है जो कई साल बाद मकर संक्रांति के पतंग पर्व उत्तरायन के दौरान अपने बचपन के शहर अहमदाबाद लौटता है. और फिल्म में पतंगों के इस मौसम में कई परिवारों की कहानी के जरिए जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाया गया है.

इस फिल्म में मुख्य भूमिका तो नवाजुद्दीन सिद्दीकी और सीमा बिस्वास ने निभाई है लेकिन इस फिल्म से कई अभिनेता पहली बार पर्दे पर दिख रहे हैं, जिनमें शहर के ही झुग्गी झोपड़ी के इलाकों में रहने वाले कई ऐसे बच्चे हैं जिनको इससे पहले अभिनय का कोई अनुभव नहीं था.

'बैंडिट क्वीन' और 'वॉटर' जैसी कई मशहूर हिंदी फिल्मों में काम कर चुकीं अभिनेत्री सीमा बिस्वास को इस फिल्म में कई नए अनुभव हुए.

वो कहती हैं, “इस फिल्म में नब्बे प्रतिशत कलाकार गैर-पेशेवर कलाकार हैं, लेकिन निर्देशन का कमाल ये है कि सबका काम बहुत स्वाभाविक लगता है. और इसके दौरान कई लंबे लंबे टेक्स देना, और नई किस्म की शूटिंग भी अनोखे अनुभव थे. शूटिंग के दौरान हम सब परिवार की तरह काम कर रहे थे.”

अनोखा अंदाज और अनोखा अनुभव

पतंग फिल्म को 15 जून से अमरीका और कनाडा के कई शहरो में रिलीज कर दिया गया.

90 मिनट की इस फिल्म को बर्लिन, हवाई, एमस्टरडैम, वैन्कूवर और हांग कॉंग जैसे कई फिल्म महोत्सवों में दिखाया और सराहा जा चुका है.

Image caption सीमा बिस्वास को इस फिल्म में कई अनूठे अनुभव हुए.

निर्देशक प्रशांत भार्गव ने इस फिल्म में अपना अनोखा अंदाज दिखाया है और कई जगह पर ऐसी शूटिंग की गई है जिसमें कैमरे को छुपा दिया गया था.

और कुछ सीन शूट करने के लिए तो कई घंटों तक कैमरे यूं ही चलते रहते थे. प्रशांत कहते हैं कि वो चाहते थे कि जो गैर-पेशेवर बच्चे कलाकार इसमें अभिनय कर रहे हैं उनके स्वाभाविक भाव को कैमरे में कैद किया जा सके.

प्रशांत भार्गव के निर्देशन के इस अनोखे अनुभव के बारे में फिल्म में मुख्य भूमिका निभाने वाले नवाजुद्दीन सिद्दीकी कहते हैं, “प्रशांत ने इस फिल्म का बहुत अलग ढंग से निर्देशन किया है. वो तो बिल्कुल घुले मिले थे शहर के आम लोगों के साथ और हम लोगों को भी आम लोगों के साथ कई दिनों तक सिर्फ घुलना मिलना था. और उनका जोर इस बात पर था कि शॉट्स और कलाकार सभी स्क्रीन पर बिल्कुल वैसे दिखें जैसे असल जीवन में होते हैं. और हमें हर सीन को स्वाभाविक ढंग से निभाने को कहा. और कैमरे भी बहुत स्वाभाविक तरीके से प्रयोग किए गए हैं. तो मुझे तो लग ही नही रहा था कि मैं एक्टिंग कर रहा हूं.”

अगली फिल्म होली पर

नवाज कहते हैं कि उनको गैर-पेशेवर कलाकार बच्चों के साथ अभिनय करने में भी अनोखे अनुभव का एहसास हुआ.

वो बताते हैं, “हम तो अपने अभिनय को कई सालों से तराश रहे हैं, लेकिन इस फिल्म में गैर-पेशेवर बच्चों के साथ काम करना भी अपने आप में चुनौती थी. इन बच्चों के साथ मिलकर अभिनय करना चुनौती था, जिसमें पर्दे पर मेरे अभिनय और इन बच्चों के अभिनय में कोई अंतर न दिखे, जिसमें हम सब बिल्कुल असल लोग लगें. इन बच्चों के साथ मुझे काफी समय तक घुलना मिलना पड़ा, और उनको मेरा नाम भी फील्म वाला ही बताया गया था, तो बच्चे मुझे शूटिंग के अलावा भी स्क्रीन वाला नाम चक्कू ही बुलाते थे.”

अब विदेशों में रहने वाले या बाहर ही जन्मे भारतीय मूल के कई फिल्मकार नए ढंग की फिल्में बना रहे हैं, और प्रशांत की यह पहली फीचर फिल्म भी इस की एक कड़ी है.

अब वो उत्तर प्रदेश के मथुरा शहर में होली के पर्व पर आधारित एक फिल्म बना रहे हैं, जिसमें भारतीय मूल के एक और अमरीकी और ग्रैमी अवॉर्ड के लिए नामांकित जैज संगीतकार विजय अय्यर भी उनके साथ फिल्म के लिए संगीत पर काम कर रहे हैं.

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