जब बुखार में भी गुनगुनाए थे मेहदी हसन: दिलीप कुमार

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Image caption दिलीप कुमार का कहना है कि मेहदी हसन की आवाज़ उनके मन में हमेशा मौजूद रहेगी.

हिंदी फिल्मों के अभिनेता दिलीप कुमार ने पाकिस्तानी गायक मेहदी हसन के निधन पर उनकी याद में लिखे ब्लॉग में कहा है कि मेहदी हसन की आवाज़ के जादू को शब्दों में बयान करना संभव नहीं.

रविवार को अपने निजी ब्लॉग में शहंशाह ए ग़ज़ल कहे जाने वाले मेहदी हसन के निधन का उल्लेख करते हुए दिलीप कुमार ने लिखा कि उन्हें और उनकी पत्नी सायरा बानो को खबर पर विश्वास करने में खासा समय लगा कि वह आवाज जो उन्हें पसंद थी और उनका जिससे जुड़ाव था वह खामोश हो गई है.

दिलीप कुमार का कहना है कि मेहदी हसन की आवाज़ उनके मन में हमेशा मौजूद रहेगी.

उन्होंने कहा कि मेहदी हसन को भगवान ने विशेष तौर पर बनाया था इसीलिए उनकी आवाज़ में वह ताकत थी कि वो उन दिलों को भी छू जाती थी जिन्हें गजल की समझ नहीं थी.

ब्लॉग में दिलीप कुमार ने मेहदी हसन की मुंबई में उनके घर आने की यादें भी संजोई हैं. वह लिखते हैं कि जब भी कभी वह मुंबई आते तो हमारे घर आते थे और परिवार के लिए ये एक विशेष अवसर होता. सायरा की दादी शमशाद बेगम भी मेहदी हसन से मिलकर बहुत खुश होती.

दिलीप कुमार के अनुसार उनकी पत्नी की दादी जो खुद भी एक जानी मानी गायिका थीं, मेहदी हसन की फनकारी की वजह से उन्हें हमेशा सर्वोत्तम गायकों की सूची में शुमार करती थीं. शमशाद बेगम को मेहदी हसन के भेंट किए हुए सीडी कैसेट्स बहुत पसंद थे.

वह ब्लॉग में लिखते हैं, "मेहदी हसन जब अंतिम बार हमारे घर आए तो उन्हें तेज बुखार था लेकिन इसके बावजूद उन्होंने मेरा हाथ थामा और हम दोनों ने उनके और मेरे पसंदीदा गीतों गुनगुनाया था."

दिलीप का कहना है कि वो आज भी उनकी मीठी और कोमल आवाज याद कर सकते हैं जैसे कि कल की बात हो.

दिलीप कुमार ने अपने ब्लॉग के अंत में मेहदी हसन की पाकिस्तान और दुनिया भर में लोकप्रियता का ज़िक्र किया है. कुमार ने कहा है कि लोकप्रियता के बावजूद मेहदी हसन के उपर इसका कोई नकारात्मक असर न हुआ.