मनोज का 'चरित्रहीन' किरदार

 गुरुवार, 21 जून, 2012 को 08:58 IST तक के समाचार
गैंग्स ऑफ वासेपुर

अभिनेता मनोज बाजपेई नहीं चाहते कि उनकी आने वाली फिल्म 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' उनका पूरा परिवार एक साथ देखे.

बीबीसी से खास बातचीत करते हुए मनोज ने बताया कि उन्होंने अपने पिता को कह दिया कि ये फिल्म परिवार के सदस्य साथ में ना देखकर एक-एक करके देखें.

उसकी वजह मनोज ने बताई, "दरअसल इस फिल्म में मैं एक चरित्रहीन किरदार निभा रहा हूं. उसे औरतें बहुत पसंद हैं. वो वासना का भूखा है."

मनोज ने बताया कि उनकी पत्नी नेहा, जो खुद अभिनेत्री रह चुकी हैं, उन्हें तो शायद 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' में उन्हें देखकर झटका ना लगे, लेकिन परिवार के बाक़ी सदस्यों के बारे में वो उतने निश्चिंत नहीं हैं.

तो क्या ये 'वासना के भूखे' किरदार को निभाने में उन्हें कोई दिक्कत पेश आई?

मनोज ने जवाब दिया, "मुझे सिर्फ एक ही चिंता थी. फिल्म में मुझे काफी बोल्ड दृश्य करने थे. तो मैं सोच रहा था कि अगर मेरी हीरोइन भी शर्मीली या रिजर्व किस्म की हुई तो ये सीन फिल्माने में काफी परेशानी होगी. लेकिन मेरी खुशकिस्मती थी कि फिल्म में मेरी दोनों हीरोइन, ऋचा चड्ढा और रीमा सेन इतनी सहज रहीं कि ये सारे बोल्ड सीन चुटकियों में हो गए. कोई परेशानी नहीं हुई."

"मेरी खुशकिस्मती थी कि फिल्म में मेरी दोनों हीरोइन, ऋचा चड्ढा और रीमा सेन इतनी सहज रहीं कि ये सारे बोल्ड सीन चुटकियों में हो गए."

मनोज बाजपेई, अभिनेता

'गैंग्स ऑफ वासेपुर' 22 जून को रिलीज हो रही है, और मनोज इसकी कामयाबी को लेकर आशान्वित है.

वो कहते हैं, "मुझे पूरी उम्मीद है कि जो लोग इस फिल्म को देखेंगे, वो सिर्फ एक बार देखकर संतुष्ट नहीं होंगे. लोग इसे दो-तीन बार जरूर देखेंगे."

मनोज ने कहा कि कान फिल्म समारोह में दिखाए जाने के बाद से फिल्म को और अच्छा प्रमोशन मिला जो फायदेमंद साबित होगा.

अपने किरदार के बारे में मनोज ने बताया, "मेरे किरदार का सफर एक 27-28 साल के शख्स से लेकर 60 साल तक का है. उसकी दो पत्नियां हैं. ढेर सारे बच्चे हैं. फिर भी वो हर औरत का दीवाना है. हिंदी सिनेमा के इस इतिहास में शायद ही ऐसा कोई नायक हुआ होगा. ये बड़ा अनोखा और अतरंगी किस्म का किरदार है."

मनोज के मुताबिक़ ये हिंदी सिनेमा के लिए काफी अच्छा दौर है क्योंकि जहां एक तरफ अनुराग कश्यप और दिबाकर बनर्जी सरीखे निर्देशकों का रियल लाइफ सिनेमा जैसे शंघाई और गैंग्स ऑफ वासेपुर चर्चित भी हो रहा है और कामयाब भी वहीं दूसरी तरफ विशुद्ध मसाला फिल्में जैसे राऊडी राठौर भी हिट साबित हो रही हैं.

तो ऐसा संगम निश्चय ही सिनेमा के लिए अच्छा है कि लोग वास्तविक सिनेमा भी पसंद कर रहे हैं और मसाला, कमर्शियल फिल्मों को भी सराह रहे हैं.

इससे जुड़ी और सामग्रियाँ

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.