पंचम दा, वापस आओ !

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विधु विनोद चोपड़ा की फिल्म 1942 अ लव स्टोरी मिलने से पहले आर डी बर्मन उर्फ पंचम दा के पास कोई काम नहीं था. उससे पहले कुछ सालों में उनके पास इक्का दुक्का फिल्में ही आईं थीं. तीन दशकों तक अपने संगीत का जादू चलाने वाले पंचम दा को फिल्म इंडस्ट्री ने लगभग भुला दिया था. 1942 अ लव स्टोरी का संगीत बेहद कामयाब साबित हुआ. लेकिन अपनी आखिरी कामयाबी देखने के लिए पंचम दा इस दुनिया में नहीं थे.

उनकी 73वीं जयंती पर फिल्म संगीत से जुड़ी हस्तियों ने आरडी के विविधतापूर्ण संगीत को याद किया और साथ ही इस बात पर गहरा अफसोस भी जताया कि पंचम को उनके आखिरी दिनों में भारतीय फिल्म बिरादरी ने लगभग 'उपेक्षित' कर दिया था.

संगीतकार ललित पंडित ने बीबीसी से बात करते हुए कहा, "पंचम दा का संगीत लाजवाब होता था. वो बहुत मॉडर्न संगीतकार थे. बड़े दुख की बात है कि उनके जैसे कद के संगीतकार को आखिरी दिनों में जो सम्मान मिलना था वो नहीं मिला. काश पंचम दा के साथ ऐसा ना हुआ होता. उनके गुज़रने के बाद लोग उन्हें इतना याद करते हैं."

आरडी बर्मन की समकालीन संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के प्यारेलाल उन्हें याद करते हुए बताते हैं कि आरडीबर्मन उनके बहुत अच्छे दोस्त थे. लक्ष्मीकांत, प्यारेलाल और आरडीबर्मन, महान संगीतकार एसडी बर्मन के सहायक के तौर पर काम किया करते थे और वहीं पर तीनों के बीच गहरी दोस्ती हो गई.

प्यारेलाल ने बताया, "मैंने और लक्ष्मी जी की जोड़ी ने मिलकर फिल्म दोस्ती का संगीत दिया था. उसका संगीत बहुत हिट हुआ. लेकिन बहुत कम लोगों को मालूम है कि फिल्म के सभी गानों में पंचम ने माउथ ऑर्गन बजाया है. वो खुद संगीतकार थे लेकिन उन्होंने हमें कभी ये नहीं कहा कि ऐसे संगीत बनाओ. बस वो आते और कहते कि हां भाई, बताओ कैसे बजाना है."

गायक शान उन्हें याद करते हुए कहते हैं, "पंचम दा के गानों में जो विविधता होती थी, उसका मुकाबला ही क्या. रैना बीती जाए रे, मेरा कुछ सामान तुम्हारे पास पड़ा है जैसे धीर गंभीर मेलोडियस गाने हों या फिर गोलमाल या पड़ोसन का गाना एक चतुर नार करके श्रृंगार जैसा हास्य गीत. पंचम दा अनोखे थे. आजकल के तथाकथित कॉमेडी गानों में जो फूहड़ता होती है वो उनके संगीत में नहीं होती थी. एक स्वस्थ सेंस ऑफ ह्मूयर होता था पंचम दा के संगीत में."

शान के पसंदीदा आरडी बर्मन गानों में सत्ते पे सत्ता का प्यार हमें किस मोड़ पे ले आया और मासूम का हुज़ूर इस कदर भी ना इतरा के चलिए है.

देव डी और इशकज़ादे जैसी सुपरहिट फिल्मों का संगीत देने वाले अमित त्रिवेदी कहते हैं कि पंचम दा अपने वक़्त से आगे के संगीतकार थे. मैं उनके संगीत पर पला बढ़ा हूं.

1942 अ लव स्टोरी में आरडी बर्मन के संगीत निर्देशन में एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा, रिमझिम-रिमझिम और कुछ ना कहो जैसे सुपरहिट गीतों को आवाज़ देने वाले गायक कुमार शानू कहते हैं, "वो इतने बड़े संगीतकार थे, लेकिम हम गायकों को कभी भी ऐसा महसूस नहीं होने देते थे. आज के दौर में जैसा संगीत चल रहा है उसे देखते हुए उनकी बहुत ज़रूरत महसूस हो रही है. पंचम दा, आप वापस आ जाओ."

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