'अंकुर' ना करने का अफसोस : वहीदा रहमान

वहीदा रहमान

प्यासा, गाइड, तीसरी कसम जैसी फिल्मों में अहम भूमिका निभाने के बावजूद कुछ रोल ऐसे हैं जिन्हें ना करने का अफसोस अभिनेत्री वहीदा रहमान को आज भी है.

बीबीसी से एक खास बातचीत में 76 वर्षीय अभिनेत्री वहीदा रहमान ने बताया कि उन्हें 1974 में बनी श्याम बेनेगल की फिल्म अंकुर में काम ना करने का आज तक पछतावा है.

वहीदा बताती हैं "श्याम बेनेगल बहुत चाहते थे कि मैं अंकुर करूं पर शायद शबाना जैसी अदाकारा को अंकुर के जरिए ही आना था".

इसके अलावा हेमा मालिनी और राजकुमार अभिनीत फिल्म लाल पत्थर और रमेश सिप्पी की अंदाज़ भी वहीदा के अफसोस की लिस्ट में शामिल है.

1975 में बनी गाइड को अपनी सबसे पसंदीदा फिल्म बताते हुए वहीदा ने अपने पहले अवार्ड के बारे में भी बताया.

वहीदा कहती हैं "मेरा पहला अवार्ड गाइड फिल्म के लिए था.मुझे उम्मीद नहीं थी कि मुझे ये अवार्ड मिलेगा क्योंकि लोगों का ये ख्याल था कि इस फिल्म में मेरे रोल से किसी को सहानुभूति नहीं थी और उस वक्त ऐसे ही रोल पसंद किए जाते थे जिन्हें देखकर दया आ जाए इसलिए जब मुझे ये अवार्ड मिला तो मुझे ताज्जुब हुआ था".

गाइड के रिमेक के बारे में बात करते हुए वहीदा कहती हैं "मुझे लगता है कि अगर इस फिल्म का रिमेक बनता है तो मैं रोज़ी के रोल में विद्या बालन को देखना चाहूंगी, वो एक अच्छी अदाकारा के साथ साथ अच्छी डांसर भी हैं".

वहीदा रहमान की मानें तो आज का दौर उनके समय से ज्यादा बेहतर है.

वहीदा का कहना है "सिनेमा के लिए आज का समय बहुत अच्छा है. आज का दर्शक मैच्योर है, कलाकार भी और फिल्मकार भी और इसलिए आज हर तरह की फिल्में बन रही हैं".

पिछले सौ सालों में हिंदी सिनेमा में औरतों की बदलती भूमिका पर वहीदा कहती हैं "पहले दादा साहेब फालके की फिल्मों में औरतों की भूमिका भी मर्द निभाते थे. पर आज, हर लड़की ,हर लड़का, यहां तक की मां बाप भी चाहते हैं कि उनके बच्चे फिल्मों में काम करें".

गुरुदत्त की फिल्म सीआईडी से हिंदी फिल्मों में शुरुआत करने वाली वहीदा रहमान कहती हैं, "गुरुदत्त की फिल्मों का तो कोई जवाब नहीं लेकिन मेरे हिसाब से सत्यजीत रे एक सच्चे जीनियस थे, उसके बाद मैं गुरुदत्त साहब का नाम लूंगी जिनका काम मुझे आश्चर्यचकित करता है".

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