महंगी न पड़ जाए 'बर्फ़ी' की मिठास

 सोमवार, 3 सितंबर, 2012 को 11:56 IST तक के समाचार
मोहित चौहान

रणबीर कपूर की 'बर्फी' में मिठास डालने वाले गायक मोहित चौहान को इस बात का डर है कि कहीं ये मिठास उन्हें नुकसान न पहुंचाए.

निर्माता-निर्देशक अनुराग बसु की जल्द ही आने वाली फिल्म 'बर्फी' में मोहित चौहान ने एक बार फिर अभिनेता रणबीर कपूर के लिए गाना गाया है. प्रशंसकों और संगीत समीक्षकों के मुताबिक रणबीर के लिए इतने सारे कामयाब गाने देने के बाद मोहित लगभग उनकी ही आवाज बनते जा रहे हैं. लेकिन मोहित खुद इस बात से चिंतित हैं.

"ये मेरे लिए खुशी कि बात है कि रणबीर कपूर जैसे कलाकार के लिए मेरी आवाज को पसंद किया जा रहा है. लेकिन मैं नहीं चाहता हूं कि मेरी आवाज किसी एक अभिनेता की ही आवाज बन कर रह जाए"

मोहित ने बीबीसी से कहा, "ये मेरे लिए खुशी कि बात है कि रणबीर कपूर जैसे कलाकार के लिए मेरी आवाज को पसंद किया जा रहा है. लेकिन मैं नहीं चाहता हूं कि मेरी आवाज किसी एक अभिनेता की ही आवाज बन कर रह जाए" इससे पहले मोहित ने रणबीर के लिए फिल्म 'राजनीति', 'अनजाना-अनजानी' के अलावा 'रॉकस्टार' के सभी गाने गाए थे.

मोहित ने किशोर कुमार और राजेश खन्ना का उदाहरण देते हुए कहा, "ये कोई नई बात नहीं है कि किसी गायक की आवाज को किसी अभिनेता के साथ जोड़ा गया हो. ऐसा हमेशा से होता आया है. लोग किसी एक आवाज को एक खास अभिनेता की आवाज के तौर पर पहचानना चाहते हैं. लेकिन एक गायक के अपने हित के लिए ज़रूरी है कि वो एक नहीं बल्कि जितने ज्यादा हो सके कलाकारों के लिए गाने उतनी ही सहजता से गा सके और उन सब पर फब सके. इसके लिए कई बार खुद अपनी गायकी में नए-नए अंदाज खोजने पड़ते हैं."

मोहित ने हाल ही में सुपरस्टार सलमान खान के लिए फिल्म 'एक था टाइगर' में एक गाना गाया है. मोहित इस बात से बेहद खुश हैं. ये पहली दफा है जब मोहित ने सलमान के लिए कोई गीत गाया हो.

मोहित इससे पहले शाहिद कपूर, इमरान हाशमी, सैफ अली खान और अभिषेक बच्चन के लिए भी गाने गा चुके हैं. लेकिन रणबीर के लिए उन्होंने सबसे ज्यादा गाने गाए हैं.

कितने काम के रिएल्टी शो

मोहित चौहान जो खुद कई बार टीवी पर रिएल्टी ‏शो में गायकों को परख चुके हैं, मानते हैं कि मात्र इन कार्यक्रमों में तारीफ बटोर लेना किसी प्रतिभागी की कामयाबी नहीं तय कर देता. कई बार कई बड़े कलाकारों से यह सुनने में आया है कि इन कार्यक्रमों में शरीक होने वाले प्रतियोगियों के लिए हिंदी सिनेमा में गाने के मौके खुल जाते हैं. लेकिन मोहित इस बात से इत्तेफाक नहीं रखते.

मोहित ने कहा, "ये कार्यक्रम आपको अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका तो देते हैं लेकिन अक्सर प्रतिभागी किशोर, रफी या लता मंगेशकर का गाना गाकर अपनी तारीफ सुन कर ही भाव विभोर हो जाते हैं. जबकि हिंदी फिल्मों में गाने का मौका आपको तब मिलता है जब आप में कुछ अलग गाने कि प्रतिभा, जिसे 'एलिमेंट ऑफ एक्स्ट्रा' भी कहते हैं, वो हो. अगर युवा गायक इस पर काम करें तो हिंदी फिल्मों में गाने के बड़े सारे मौके हैं."

डर कैसा, काम बहुत है

मोहित चौहान

इस समय हिंदी फिल्मों में कई अप्रशिक्षित लोग भी गाने गा रहे हैं और पसंद किए जा रहे हैं जैसे फिल्म 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' के गाने. इस फिल्म के एक गीत, "छीछालेदर" को एक ऐसी बच्ची ने गाया है जो ट्रेन में लोकगीत गाया करती थी. ऐसे में क्या पहले से पैर जमाए प्रख्यात गायकों को डरने कि जरूरत है? ये पूछे जाने पर मोहित चौहान ने कहा, "खुशकिस्मती से भारतीय फिल्म जगत में काम की कोई कमी नहीं है. और फिल्में भी हर तरह कि बनती हैं. ऐसे में डरने की क्या बात है."

मोहित मानते हैं कि कितना भी नए तरह का प्रायोगिक संगीत हिंदी फिल्मों में क्यूँ न आ जाए, पारंपरिक फिल्मी गानों कि मांग हमेशा रहेगी. ऐसे में किसी को भी असुरक्षा कि भावना से ग्रसित नहीं होना चाहिए. और फिर जो जिसकी रोजी है उसी को मिलेगी....ऐसा कहते हुए मोहित के चेहरे पर वही चिर परिचित तसल्ली भरी मुस्कान थी.

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