हॉलीवुड बेहाल, बॉलीवुड मालामाल!

  • 26 सितंबर 2012
ब्रैड पिट और एंजोलिना जॉली

हॉलीवुड के मशहूर अभिनेता ब्रैड पिट ने हाल ही में कहा है कि हॉलीवुड स्टार्स पर मंदी का असर पड़ा है और अब उन्हें उतना पैसा नहीं मिलता, जितना कभी मिला करता था.

ये सुनने में अजीब सा लग सकता है क्योंकि भारत में स्थिति दूसरी है और हम जानते हैं कि आमिर, शाहरुख और सलमान जैसे बड़े बॉलीवुड सितारे करोड़ों में अपनी फीस लेते हैं.

इसके अलावा वो अपनी निश्चित फीस के अलावा मुनाफे में हिस्सेदारी भी मांगते हैं. और हर फिल्म के बाद अपनी फीस बढ़ा देते हैं.

इन तीनों बड़े सितारों के अलावा भी आमतौर पर बॉलीवुड के सितारे अच्छी खासी फीस निर्माताओं से वसूल करते हैं.

दुनिया की सबसे बड़ी फिल्म इंडस्ट्री तक पर जब मंदी का असर पड़ा तो भला बॉलीवुड के सितारे इससे कैसे अछूते रह गए?

बॉलीवुड स्टार्स इतनी भारी भरकम फीस भला कैसे लेते हैं और निर्माता भला उन्हें करोड़ों-करोड़ रुपए देने के लिए तैयार भी क्यों हो रहे हैं. क्या बॉलीवुड मुनाफे के लिहाज से हॉलीवुड से बेहतर स्थिति में है.

मांग-आपूर्ति का अंतर

फिल्म व्यापार पर करीब से निगाह रखने वाले ट्रेड एनलिस्ट कोमल नाहटा के मुताबिक दरअसल बॉलीवुड में सेलेबल ऐक्टर यानी बिकाऊ सितारे बहुत कम हैं और फिल्म बनाने वाले ढेर सारे लोग हैं. इसलिए बॉलीवुड सितारों पर मंदी का उतना असर नहीं हुआ है.

कोमल कहते हैं, "बॉलीवुड में बड़ा जबरदस्त स्टार सिस्टम है. यहां सितारे फ्लॉप फिल्म के बाद भी अपनी फीस कम नहीं करते, क्योंकि उन्हें मालूम है कि निर्माता फिर से उनके पास दौड़े चले आएंगे. हां, हिट फिल्म के बाद वो अपनी फीस जरूर बढ़ा देते हैं. सीधा-सीधा डिमांड-सप्लाई का खेल हैं. जब सितारे कम और निर्माता ज्यादा हैं तो स्टार्स अपनी मुंहमांगी फीस वसूलेंगे ही."

कोमल कहते हैं कि शाहिद कपूर जैसे सितारे जिनकी पिछली दो फिल्में मौसम और तेरी मेरी कहानी फ्लॉप हो गईं, वो भी अपनी फीस कम नहीं कर रहे हैं, क्योंकि अब भी उनके पास निर्माताओं की लाइन लगी है.

फिल्म समीक्षक नम्रता जोशी की भी ऐसी ही कुछ राय है. वो कहती हैं, "बॉलीवुड में सब कुछ स्टार्स से चलता है. यहां निर्देशकों और कहानीकारों को वो दर्जा नहीं प्राप्त है जैसा हॉलीवुड में होता है. इसलिए सितारों के भाव हमेशा बढ़े रहते हैं."

कोमल नाहटा ये भी कहते हैं कि पहले सिर्फ अमिताभ बच्चन ही एकमात्र ऐसे अभिनेता थे जिनकी फीस करोड़ में थी. बाकी सितारे लाखों में पैसे लेते थे. लेकिन अब इमरान खान जैसे स्टार तक 10-12 करोड़ रुपए ले लेते हैं, जबकि इमरान ने एक भी सुपरहिट फिल्म अपने दम पर नहीं दी है.

स्टार पावर

कोमल के मुताबिक, "आमिर, शाहरुख और सलमान जैसे स्टार 30-35 करोड़ रुपए भी मांग सकते हैं. क्योंकि इनकी फिल्में मुनाफा कमा ही लेती हैं. अगर सलमान खान के बलबूते यश चोपड़ा और आदित्य चोपड़ा एक था टाइगर के जरिए 90-100 करोड़ रुपए कमा रहे हैं तो सलमान 25-30 करोड़ रुपए मांगे भी तो उसमें क्या गलत है."

कोमल कहते हैं कि फिल्म फ्लॉप होने का दोष कोई भी कलाकार अपने सर नहीं लेता. हां फिल्में हिट हो जाती हैं तो स्टार्स बढ़ चढ़कर कहने लगते हैं कि हमारी वजह से फिल्म चली.

नम्रता जोशी ये भी कहती हैं कि आज जो भी बॉलीवुड के बड़े सितारे हैं वो सिर्फ फिल्मों के जरिए कमाई नहीं कर रहे हैं. वो विज्ञापनों के जरिए भी बहुत कमाई कर रहे हैं, इसलिए वो ढेर सारी फिल्में नहीं करते. जब तक उनके मन का प्रोजेक्ट नहीं मिलता वो फिल्में नहीं करते.

इसलिए वो मनचाही कीमतें वसूल कर सकते हैं. जबकि हॉलीवुड के सितारों के साथ ऐसा नहीं है. उनकी कमाई का मेन जरिया फिल्में ही हैं.

मनमानी फीस

फिल्में स्टार्स के नाम पर ही बेची जाती हैं

हालांकि नम्रता ये भी कहती हैं कि सभी बॉलीवुड स्टार्स मनमाफिक फीस वसूल कर पाते हों ऐसा भी नहीं है.

नम्रता के मुताबिक, "आमिर, शाहरुख, सलमान, अक्षय कुमार, अजय देवगन और ऋतिक रोशन. ये ही ऐसे कलाकार हैं जो अपनी शर्तों पर काम करते हैं. बाकी सितारे ये लक्जरी हासिल नहीं कर सकते. अगर दूसरा कोई सितारा एक फिल्म हिट होते ही अपनी फीस बढ़ा दे तो ये बेतुका फैसला होगा. क्योंकि फिर उसकी फिल्मों के फ्लॉप होने के बाद उसका पतन भी उतनी ही तेजी से होगा."

फिलहाल तो बॉक्स ऑफिस पर अपनी मजबूत पकड़ और फिल्मों के मुनाफा कमाने की गारंटी की वजह से बॉलीवुड के टॉप एक्टर्स का सितारा बुलंदी पर है.

आने वाले समय में आमिर खान की तलाश, शाहरुख खान की जब तक है जान और सलमान खान की दंबग 2 रिलीज होंगी. और बॉलीवुड के तमाम एक्सपर्ट्स को उम्मीद है कि इन तीनों खान के स्टार पावर की बदौलत ये फिल्में बेहतरीन व्यवसाय कर पाएंगी.

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