'बर्फ़ी' चली ऑस्कर की राह

 रविवार, 23 सितंबर, 2012 को 00:33 IST तक के समाचार
बर्फी

क्लिक करें रणबीर कपूर के मूक-बधिर अभिनय से सजी अनुराग बासु की हालिया फिल्म क्लिक करें 'बर्फ़ी' 19 अन्य फिल्मों को पछाड़कर ऑस्कर के लिए दावेदारी पेश करने में कामयाब हो गई है.

इसे ऑस्कर के लिए भारत की आधिकारिक नामांकित फिल्म के रूप में भेजा जा रहा है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया के महासचिव सुप्रान सेन ने बताया कि क्लिक करें 'बर्फ़ी' को भारत की ओर से अगले ऑस्कर समारोह में भेजा जाएगा.

उन्होंने बताया कि ऑस्कर में भारत के प्रतिनिधित्व के लिए कुल 20 फिल्मों में प्रतिस्पर्धा थी.

इस साल 14 सितम्बर को रिलीज हुई 'बर्फ़ी' में संवाद बहुत कम हैं और दर्शकों के साथ-साथ आलोचकों ने भी इसको सराहा है.

फिल्म में क्लिक करें प्रियंका चोपड़ा भी हैं जिन्होंने 'ऑटिस्टिक-गर्ल' का किरदार निभाया है.

"मुझे बहुत अच्छा लग रहा है कि दर्शकों और समीक्षकों दोनों को ये फ़िल्म पसंद आई है. इससे बड़ी बात और कुछ नहीं हो सकती"

रणबीर कपूर, अभिनेता

बर्फ़ी को ऑस्कर के लिए भारत की आधिकारिक फिल्म घोषित किए जाने पर फ़िल्म के मुख्य कलाकार रणबीर कपूर ने मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा, "मुझे बहुत अच्छा लग रहा है कि दर्शकों और समीक्षकों दोनों को ये फ़िल्म पसंद आई है. इससे बड़ी बात और कुछ नहीं हो सकती. "

रणबीर कपूर ने फिल्म की कमाई के बारे में कहा कि वो चाहते हैं कि फिल्म 500 करोड़ कमाए, 100 करोड़ के आंकड़े तक तो सभी पहुंच जाते हैं.

क्या है 'बर्फ़ी' की कहानी

कहानी दार्जीलिंग की खूबसूरत वादियों से शुरु होती है और थोड़ा बहुत कोलकाता शहर को भी कहानी में जगह दी गई है.

कहानी के मुख्य पात्र हैं मर्फी उर्फ बर्फ़ी (रणबीर कपूर), जो सुन और बोल नहीं सकते. लेकिन वो अपनी इस अक्षमता से बिलकुल दुखी नहीं हैं. वो बेहद खुश और जिंदादिल इंसान हैं.

उनकी प्यारी हरकतें लोगों को लुभाती हैं. उनकी मुलाकात श्रुति (इलियाना डी क्रूज) नाम की लड़की से होती है जिससे बर्फ़ी की जिंदगी और ज्यादा ऊर्जावान और खुशहाल हो जाती है.

दोनों में प्यार हो जाता है. लेकिन श्रुति के मां-बाप उसकी शादी, उसकी मर्जी के खिलाफ कहीं और कर देते हैं और श्रुति अपने पति के साथ कोलकाता रवाना हो जाती है.

इस बीच बर्फ़ी की जिंदगी में आती है झिलमिल चटर्जी (प्रियंका चोपड़ा). झिलमिल ऑटिस्टिक है इसलिए उसके मां-बाप ने उसे एक बालआश्रम में छोड़ दिया था.

झिलमिल और बर्फ़ी एक दूसरे से बहुत जल्दी हिल मिल जाते हैं. एक दूसरे के साथ हंसते खेलते दोनों के बीच की रिलेशनशिप बहुत मजबूत हो जाती है.

बर्फी

क्लिक करें झिलमिल को अपने मां-बाप से जो प्यार नहीं मिलता वो प्यार और दुलार उसे बर्फ़ी से मिलता है. लेकिन परिस्थितियां बर्फ़ी की जिंदगी में फिर से नया मोड़ लाती हैं और श्रुति फिर से उसके जीवन में आती है.

अब बर्फ़ी को झिलमिल और श्रुति में से किसी एक को चुनना है.

फिल्म के तीनों किरदारों के बीच प्रेम के विभिन्न पहलुओं को पेश किया गया है. श्रुति का बर्फ़ी के प्रति प्रेम और बर्फ़ी का झिलमिल के प्रति प्रेम, ये प्लॉट फिल्म की कहानी में एक अलग तरीके का प्रेम त्रिकोण दिखाता है.

फिल्म में सौरभ शुक्ला की भी अहम भूमिका है जिन्होंने एक पुलिस वाले की भूमिका अदा की है, उनके और बर्फ़ी के बीच फिल्म में एक चूहा बिल्ली का खेल सा चलता रहता है.

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