फ़िल्मी कहानियों के पीछे क्या कहानी है?

मामी
Image caption श्याम बेनेगल मामी के चेयरमैन हैं.

अगर किसी शाम आपको पता चल जाए कि कोई फ़िल्म कैसे बन कर तैयार हुई, कहाँ से आई उसकी कहानी और फ़िल्म से जुड़ी बाक़ी दिलचस्प बातें भी तो कैसी होगी वो शाम ज़रा कल्पना कीजिए.

बल्कि सिर्फ कल्पना ही नहीं निर्माता-निर्देशक श्याम बेनेगल तो कहते हैं उस शाम का लुत्फ़ उठाइए मुंबई में 18 से 25 अक्टूबर के बीच आयोजित होने वाले 14वें ‘मामी’ फ़िल्म फेस्टिवल में.

मुंबई एकैडेमी ऑफ़ मूविंग इमेजेस यानि 'मामी' में लगातार आठ दिनों तक देश-विदेश क़ी बेहतरीन फिल्मों का मेला लगेगा. साथ ही इस बार इस महोत्सव में बीते ज़माने की मशहूर अभिनेत्री वहीदा रहमान को लाइफ टाइम अचीवमेंट एवार्ड से भी नवाज़ा जाएगा.

कल मुंबई के एन सी पी ए (नेशनल सेंटर फॉर परफोर्मिंग आर्ट्स ) में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में मामी के आयोजकों, ट्रस्टीज और फिल्मकारों में उत्साह का माहौल नज़र आया. इस अवसर पर श्याम बेनेगल, रमेश सिप्पी, सुधीर मिश्रा, रिलायंस एंटरटेनमेंट के चेयरमैन और ट्रस्टी अमित खन्ना जैसे कई प्रबुद्ध फिल्मकार और जाने-माने लोग मौजूद थे .

मामी के चेयर पर्सन और फिल्मकार श्याम बेनेगल ने कहा, ''इस बार मामी में बहुत कुछ नया देखने को मिलेगा जैसे हमारे भारतीय सिनेमा के मूक फिल्मों के दौर क़ी फ़िल्में जिनके बारे में लोगों ने बस सुना ही है, फिल्मों के बनने के पीछे की कई अनसुनी कहानियाँ होती हैं, फिल्मों के इतिहास के साथ साथ वो कहानियाँ भी जानने को मिलेंगी. अफगान सिनेमा नया आकर्षण होगा, फिल्मों पर परिचर्चाएं और ग्रुप डिस्कशन का अपना दौर चलेगा. इस महोत्सव को आकर देखने वालों को अंतर्राष्ट्रीय सिनेमा का अनुभव भी मिलेगा.''

इस फिल्मोत्सव में कुलमिलाकर 65 देशों क़ी 200 फिल्मों क़ी बहार देखने को मिलेगी. मामी के साथ बतौर ट्रस्टी जुड़े फ़िल्म निर्माता रमेश सिप्पी भी इस मैके पर खासे उत्साहित लगे. उन्हेंने कहा, ''हमें लगता है कि इस साल बेहद बढ़िया फेस्टिवल होनेवाला है. मामी में ऐसा माहौल पहली बार देखने को मिलेगा. हम इसे बेहतरीन बनाने क़ी पूरी कोशिशों में लगे हुए हैं. जितने ज्यादा लोग इस फेस्टिवल को देखेंगे. हमें उतनी ज्यादा तसल्ली होगी.''

इस बार मामी में कुल मिलाकर सम्पूर्ण प्राईज मनी 220,000 यूएस डॉलर रखी गई है. इतना ही नहीं भारतीय फिल्मों के लिए एक नए विभाग का श्रीगणेश किया जा रहा है. जिसके तहत 13 भाषाओँ क़ी फिल्मों के निर्देशक अपनी पहली-पहली फिल्मों के साथ इस प्रतिस्पर्धा में भाग लेंगे. और इसकी पुरूस्कार राशि होगी 31,000 यूएस डॉलर.

एक अलग तरह के सिनेमा के परिचायक और मामी के ट्रस्टी सुधीर मिश्रा ने इस मौके पर कहा, ''इस बार सही मायनों में विश्व सिनेमा का बुफ़े देखने को मिलेगा. आज जबकि ग्लोबल विलेज और मास मीडिया का ज़माना है, ऐसे में सिनेमा क़ी कहानी बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है. मुझे पूरा यकीन है कि इस फिल्मोत्सव में भाग लेने वालों को मज़ा तो आएगा ही साथ ही उनमें कुछ न कुछ बदलाव भी आएगा. ''

विश्व भर में विभिन्न फ़िल्म महोत्सवों में इस साल शामिल हुईं भारतीय और विदेशी फिल्में भी मामी फ़िल्म महोत्सव में दिखाई जाएँगी.

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