ऐसे की अमिताभ ने शादी की घोषणा

मेरी अमिताभ बच्चन से पहली मुलाकात उस वक्त हुई थी जब वो फिल्मों में नहीं आए थे.

दिल्ली में एक समारोह के दौरान मैं उनकी मां तेजी बच्चन से मिला. उन दिनों में मैं मनोज कुमार का असिस्टेंट हुआ करता था. मुझे याद है कि मेरे साथ गायक महेंद्र कपूर भी थे.

तब तेजी जी ने एक लंबे, दुबले पतले शख्स की तरफ इशारा करते हुए कहा, "ये मुन्ना है. अब ये भी आपकी बिरादरी में आ रहा है. थोड़ा ध्यान रखिएगा इसका.' वो अमिताभ को मुन्ना कहती थीं.

ये मेरी अमित यानि अमिताभ बच्चन से पहली मुलाकात थी. फिर मुंबई में हम सब मनोज कुमार की फिल्म 'यादगार' की शूटिंग में व्यस्त हो गए.

अमिताभ बच्चन रोजाना फिल्मिस्तान स्टूडियो आते. दिन भर चुपचाप बैठकर शूटिंग देखते और वापस चले जाते.

तब मैंने मनोज कुमार से कहा,"इसकी मां से हमने कहा है कि फिल्म देंगे. अगर आपको इन्हें फिल्म ऑफर करनी है तो कर दीजिए वर्ना अच्छा नहीं लगता बेचारा रोज आता है, और शाम को वापस चला जाता है."

गरिमामयी व्यक्तित्व

सोचिए, संघर्ष के दिनों में भी अमित का व्यक्तित्व बड़ा गरिमामयी था और वो किसी से काम मांगते नहीं थे.

तब मनोज कुमार ने उन्हें 'रोटी, कपड़ा और मकान' फिल्म ऑफर की और मेरी और अमित की दोस्ती वहीं से शुरू हो गई. मैं उसे टाइगर बुलाता हूं.

मुझे याद है ज़ंजीर का प्रीमियर कोलकाता में होना था. उस वक्त कोलकाता में किसी फिल्म के प्रीमियर पर लाठीचार्ज हो जाए तो उसे हिट समझा जाता था.

तब अमित ने फैसला किया कि अगर फिल्म हिट हो गई तो वो जया के साथ लंदन घूमने जाएगा. प्रीमियर के दौरान लोगों की सचमुच भयानक भीड़ हो गई और पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा.

तब मैंने टाइगर से कहा कि प्यारे, तेरी लंदन ट्रिप तो पक्की हो गई. फिल्म सुपरहिट हो गई.

अमित ने अपने पिताजी से कहा कि मैं, चंद्रा बारोट और जया लंदन जा रहे हैं. तब उनके पिता ने कहा जया से शादी किए बगैर मैं तुम दोनों को लंदन जाने की इजाज़त नहीं दे सकता.

तब एक दिन अमित ने मेरे घर का दरवाजा खटखटाया और कहा, "चंद्रा, मैं शादी कर रहा हूं."

'डॉन' बनने की कहानी बड़ी दिलचस्प है. फिल्म के निर्माता नरीमन ईरानी उन दिनों बड़े आर्थिक संकट से जूझ रहे थे.

उन पर 12 लाख रुपए का कर्ज था जो उन दिनों बड़ी रकम हुआ करती थी. तब मैंने, अमित ने और सलीम-जावेद ने मिलकर तय किया कि इन्हें इस संकट से उबारना चाहिए.

'डॉन' बनने में तीन साल लगे. फिल्म जबरदस्त हिट साबित हुई. लेकिन, हम में से किसी को उस वक्त नहीं लगा था कि ये फिल्म इतनी चलेगी.

फिल्म का सुपरहिट गाना 'खई के पान बनारस वाला' पहले इसका हिस्सा नहीं था. लेकिन बाद में हमने मनोज कुमार की सलाह पर ये गाना फिल्म में डाला.

रिश्तों की अहमियत

टाइगर (अमिताभ बच्चन) रिश्तों को निभाना बखूबी जानता है. 40 सालों से उसका मेक-अप मैन वही है. अपने निजी ड्राइवर की मौत के बाद उसके बेटे को ड्राइवर रखा. उसके घर में जो फंक्शन होता है उसमें मुझे 40 सालों से कम से कम 10-12 चेहरे नियमित तौर पर नजर आते ही हैं.

वो बहुत बड़ा हनुमान भक्त भी है.

जब अमित की बेटी श्वेता का जन्म हुआ था, तो मैंने उसकी तस्वीर ली. फिर जब श्वेता की बच्ची हुई तो उसने मुझे फोन करके कहा, चंद्रा अंकल. आपने मेरी तस्वीर ली थी. अब मेरी बेटी की तस्वीर नहीं लोगे ! मैं भागता हुआ अस्पताल गया और उसकी बेटी की तस्वीर खींची.

न्यूयॉर्क में एक बार बड़ा दिलचस्प वाकया हुआ. अमित का एक कॉन्सर्ट था. तब वहां की सुरक्षा में तैनात एक अमरीकी पुलिस वाले ने मुझसे पूछा कि ये शख्स है कौन. तो मैंने पूछा, क्यों, क्या हुआ. तब उस पुलिस वाले ने जवाब दिया कि मुझे इस कॉन्सर्ट से पहले पता ही नहीं था कि अमरीका में इतने भारतीय और एशियाई लोग रहते हैं.

मैं प्रार्थना करता हूं, कि मेरा टाइगर इसी तरह से प्रगति के पथ पर बढ़ता चला जाए. और जैसा कि मैं हमेशा कहता हूं, फिर कहूंगा, "अभी उसका सर्वश्रेष्ठ आना बाकी है."

(रेखा खान से बातचीत पर आधारित)

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