जौहर-चोपड़ा की फिल्में नहीं भातीं:तिग्मांशु धूलिया

'हासिल' से मुझे बहुत हासिल हुआ. इसकी वजह से लोग मुझे याद रखते हैं. मैं सात सालों तक खाली बैठा था, लेकिन हासिल की वजह से लोगों ने मुझे याद रखा. ये कहना है निर्देशक तिग्मांशु धूलिया का.

बीबीसी से खास बातचीत में तिग्मांशु ने कहा, "अगर मैंने गोलमाल सीरीज या हाऊसफुल जैसी कमर्शियल सुपरहिट फिल्मों से अपने करियर की शुरुआत की होती और फिर सात साल चुप बैठा रहता तो लोग मुझे भुला चुके होते. हासिल की वजह से मुझे गंभीरता से लिया जाता रहा."

हासिल 2003 में रिलीज हुई थी. उसके बाद तिग्मांशु की अगली फिल्म चरस 2004 में रिलीज हुई. इसके सात साल बाद बतौर निर्देशक उनकी अगली फिल्म शागिर्द रिलीज हुई.

अब तिग्मांशु अपनी अगली फिल्म मिलन टॉकीज में व्यस्त हैं. इसमें इमरान खान और सोनाक्षी सिन्हा की मुख्य भूमिका है.

तिग्मांशु धूलिया मानते हैं कि जिस तरह का सिनेमा वो बनाते हैं उन्हें हमेशा दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा.

"मैंने जब फिल्में बनाने शुरू कीं, तो उस वक्त हिंदुस्तानी, जमीन से जुड़ी फिल्में बन ही नहीं रही थीं. करण जौहर और यश चोपड़ा सरीखे फिल्मकार सिर्फ शहरी और एनआरआई लोगों को ध्यान में रख कर फिल्में बना रहे थे. क्योंकि उन फिल्मों से उन्हें अच्छा पैसा मिल रहा था. मुझे वो सिनेमा समझ ही नहीं आता."

तिग्मांशु मानते हैं कि उस तरह का सिनेमा अब भी कामयाब हो रहा है लेकिन जो चीज बदली है वो ये कि अब पान सिंह तोमर और गैंग्स ऑफ वासेपुर जैसी ज़मीन से जुड़ी, असल कहानियों को भी लोग पसंद कर रहे हैं.

संबंधित समाचार