कैसे हुए थे अमिताभ बच्चन ज़ख्मी?

  • 8 अक्तूबर 2012
फिल्म कूली का पोस्टर
Image caption फिल्म कुली के सेट पर चोट लगने से अमिताभ बच्चन की हालत गंभीर हो गई थी

पहला दिन,पहला शॉट. 1983 में बनी 'कुली' मेरी पहली फिल्म थी और वो पहले दिन का पहला शॉट. बैंगलोर से 16 किमी दूर मैसूर रोड पर यूनिवर्सिटी में हम शूटिंग कर रहे थे.

एक एक्शन सीन था जिसमें मुझे और अमिताभ बच्चन को एक दूसरे को घूंसे लगाने थे. वो मुझे मारते हैं, मैं उनको मारता हूं.

एक पॉइंट पर आकर मैं उनका सिर एक बोर्ड पर पटकता हूं और उनके पेट में पंच मारता हूं.

कैमरा एक ऐसे एंगल पर था कि अमित जी ने मुझसे कहा कि पुनीत तुम्हें मेरे पेट को छूना होगा, नहीं तो सीन नकली लगेगा. हमने सीन से पहले रिहर्सल भी की पर टेक में कुछ ऐसा हुआ कि बोर्ड पर पटकनी खाकर अमितजी उछल कर मेरी तरफ आ गए और मेरा पंच उनको छूने के बजाय ज़ोर से लग गया.

उस वक्त बात इतनी सीरियस नहीं लग रही थी. अमितजी ने निर्देशक मनमोहन देसाई से कहा कि मुझे पेट में दर्द हो रहा है. मैं घर जाकर आराम करता हूं.

रात को पता चला कि अमित जी की हालत ज्यादा खराब है. दूसरे दिन तो उन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़ गया.

दसअसल मेरी अंगुलियों के ज़ोर से उनकी अंतड़ियां फट गईं थी और डाक्टर्स को ये बात काफी बाद में समझ आई जिसके कारण अमित जी की हालत ज्यादा खराब हो गई और फिर उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में शिफ्ट किया गया.

मुश्किल दौर

मेरे लिए वो वक्त काफी मुश्किल था क्योंकि प्रेस में तरह तरह की बातें की जा रही थी.

उन दिनों में शत्रुघ्न सिन्हा के साथ भी एक फिल्म कर रहा था. शत्रु जी ब्रीच कैंडी जा रहे थे और मैं भी उनके साथ अमित जी को देखने पहुंचा.

अगले दिन अखबार में खबर थी कि मैं शुत्रघ्न सिन्हा के कैंप का हूं और मैंने शायद जान बूझकर अमितजी को चोट पहुंचाई. किसी ने छापा कि राजेश खन्ना ने मुझे ऐसा करने के पैसे दिए थे.

हालांकि अमितजी को जब खून की जरुरत पड़ी थी तो मेरी पत्नी ने उन्हें खून दिया था.

जब अमितजी को पता चला कि मेरे ऊपर इस तरह के आरोप लग रहे हैं तो उन्होंने मुझसे मिलने की इच्छा जा़हिर की.

मैं ब्रीच कैंडी अस्पताल पहुंचा. उनका वजन करीब 40 किलो कम हो चुका था. पाइप लग हुए थे, वो कुछ बोल पाने की हालत में नहीं थे लेकिन उस हालत में भी उन्होंने मुझसे कहा कि पुनीत तुम्हारा कसूर नहीं है.

अमितजी चलने की हालत में नहीं थे पर फिर भी वो मुझे अस्पताल के बाहर तक छोड़ने आए जहां सारी प्रेस खड़ी थी. लोगों को ये दिखाने के लिए कि पुनीत का इसमें कोई कसूर नहीं है और वो मुझसे नाराज़ नहीं है.

हालांकि इंडस्ट्री का रवैया मेरे लिए नरम नहीं हुआ. मुझे मर्द फिल्म से निकाल दिया गया.

लोग मेरे साथ काम करने से डरते थे . पुनीत इस्सर एक राष्ट्रीय नहीं, अंतरराष्ट्रीय विलेन बन गया था. मैं कुख्यात हो गया था. हीरो भी मेरे साथ काम करने से मना कर देते थे.

हेट लेटर्स

मेरे पास हेट लेटर्स आया करते थे कि हम आपको जान से मार देंगे, आपने हमारे चहेते कलाकार को क्यों मारा ?

मुझे एक वाकया याद है. मैं अमितजी से मिलकर आईसीयू से बाहर निकला तो कुछ औरतों ने मुझे देख लिया. उन्होंने मुझे पहचाना नहीं पर चूंकि मैं अमितजी के कमरे से बाहर निकला तो उन्हें लगा कि कोई परिवार वाला ही है.

वो महिलाएं मेरे पास आईं और मुझसे अमितजी का हाल पूछा. उनमें से एक महिला ने काफी भावुक होकर कहा कि कोई कैसे अमितजी को मारने की कोशिश कर सकता है ?

काश वो हमारे सामने आ जाए तो मैं उसको जान से मार दूं. मेरे पास बोलने के लिए कुछ नहीं था. मैं एक्सक्यूज़ मी कह कर वहां से भागा. (रेखा खान से बातचीत पर आधारित.)

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