सलमान की शादी की चिंता नहीं: सलीम खान

सलीम ख़ान
Image caption सलीम ख़ान कहते हैं कि सलमान ख़ान की बढ़ती उम्र के बावजूद उन्हें उनकी शादी की चिंता नहीं है.

अभिनेता सलमान खान के चाहने वालों को भले ही उनकी शादी की चिंता सताती हो लेकिन खुद सलमान के पिता और मशहूर फिल्म कहानीकार सलीम खान के अनुसार वे इससे चिंतित नहीं है.

सलीम खान हिंदी सिनेमा के उन पटकथा लेखकों में गिने जाते हैं जिन्हें भारतीय फिल्मों के नायक को नया रूप देने के लिए जाना जाता है. सलीम ने ‘शोले’, ‘दीवार’, ‘ज़ंजीर’ और ‘हाथी मेरे साथी’ जैसी ढेरों सुपरहिट फिल्में लिखीं. सलीम ख़ान ने बीबीसी से एक विशेष बातचीत में कहा कि ''मैं भाग्य पर बहुत भरोसा करता हूँ और सलमान की शादी की चिंता मुझे इसीलिए नहीं होती क्योंकि मुझे पता है कि भाग्य में जब-जब जो-जो लिखा है वह हो कर रहेगा.'' खुद अपने जीवन का उदाहरण देते हुए सलीम ने कहा कि वह एक पायलट थे और उनके पास हवाई जहाज़ उड़ाने का लाइसेंस भी है. लेकिन भाग्य ने उन्हें लेखक बना दिया और उनकी झोली में इतनी कामयाबी और शोहरत आई. सलीम खान ने भारतीय सिने जगत में एक अभिनेता के रूप में फिल्म तीसरी मंज़िल के साथ कदम रखा था.

शुरूआती सालों में ‘सरहदी लुटेरा’ और ‘दीवाना’ जैसी कुछ फिल्में करने के बाद भी वह एक अभिनेता के रूप में कोई ख़ास जगह नहीं बना पाए.

सलीम ने बीबीसी से कहा ''मुझे खुद की खूबियां और कमज़ोरियां दोनों परखने का गुण ऊपर वाले ने दिया है. सात सालों में मुझे समझ आ गया था कि मैं एक्टिंग के लिए नहीं बना हूँ. न तो मैं कभी दिलीप कुमार जैसा बन पाऊंगा और न ही राज कपूर जैसा. और यह बात समझ आते ही मैंने अभिनय छोड़ दिया.''

कैसे शुरू किया लिखना

सलीम खान ने बताया कि उन्हें हमेशा से किताबें पढना बहुत अच्छा लगता था. और उन्हें भारतीय फिल्मों में हीरो की बनी बनायीं साधारण आदमी की छवि नहीं भाती थी.

उन्होंने कहा ''मैं हमेशा सोचता था कि भारतीय फिल्मों में अंत में ही सब कुछ ठीक क्यों होता है? हीरो हमेशा हाथ जोड़ कर खड़ा होने वाला सीधा सच्चा आदमी ही क्यों होता है ? तभी मैंने लिखने की ठानी और सोच लिया था कि मेरा हीरो अपने हक़ के लिए लड़ेगा और उसमें बग़ावत भी होगी. और तब मैंने ऐसे हीरो के इर्द गिर्द कहानियां लिखनी शुरू कीं. यह भी भाग्य की ही बात है कि मेरी 10 फिल्में लगातार हिट हुईं.’’

एक्टिंग छोड़ने की सलाह सलीम खान कहते हैं कि अपने मंझले बेटे अरबाज़ खान को निर्देशन और निर्माण का सुझाव भी उन्होंने ही दिया.

उन्होंने बताया जब 15 साल फिल्मों में अभिनय क्षेत्र में पैर न जमा पाने के बाद अरबाज़ के पास काम आना बंद हो गया तो मैंने उससे कहा ''फिल्मों में क्या सिर्फ अभिनय ही होता है ? कोई और काम करने कि कोशिश क्यों नहीं करते, शायद निर्देशन या निर्माण के द्वारा तुम्हारे भाग्य में कामयाबी लिखी हो. आज देखिये अरबाज़ की फिल्म दबंग ने मेरी बात को सच साबित कर दिया.''

Image caption सलीम खान ने अपने मंझले बेटे अरबाज़ खान को एक्टिंग छोड़ने की सलाह दी थी.

सलीम खान के परिवार का फिल्मों में योगदान सालों से रहा है. उनकी पत्नी हेलेन, बेटे सलमान, अरबाज़ और सुहैल खान भी फिल्मों से जुड़े हुए हैं. सलीम मानते हैं कि हेलेन का तकरीबन 750 फिल्मों से जुड़ा होना खुद अपने आप में बड़ी बात है.

सलीम खान की बेमिसाल पटकथा लेखन शैली का प्रमाण उनकी बेहद कामयाब फिल्में 'ज़ंजीर', 'शोले', 'दीवार', 'सीता और गीता' और 'अंदाज़' इत्यादि रही हैं.

सलीम ने बताया कि, वह हमेशा सोचते थे कि जीवन में एक दिन ऐसा आए जब वह पैसों की चिंता किए बग़ैर अपनी शर्तों पर जीवन गुज़ार सकें. और ऐसा हुआ भी जब उनकी फिल्में हिट होने लगीं तो उनके पास समय की तंगी भी रहने लगी. और जैसे ही वह किसी फिल्म के लिए इनकार करते थे उनके सामने अधिक धनराशि का प्रस्ताव रख दिया जाता था.

उन्होंने कहा ''आज मैं उस समय उठता हूँ जब दिल करता है. जहाँ जाना चाहता हूँ जाता हूँ, जो दिल में आता है करता हूँ, लिखता पढ़ता हूँ और ऊपर वाले का शुक्र अदा करता हूँ कि उसने मेरे भाग्य में इतने सारे खट्टे मीठे अनुभव लिखे.''

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