'पता नहीं था कि ये लंबू सुपरस्टार बनेगा'

सात हिंदुस्तानी

शहनाज आनंद अमिताभ बच्चन की पहली फिल्म सात हिंदुस्तानी में उनकी सह नायिका थीं. वो याद कर रही हैं अमिताभ से जुड़े अपने अनुभव.

मेरा नाता फिल्मों से पुराना था क्योंकि मेरे पिता आगा और मेरे भाई जलाल आगा फिल्मों में पहले से सक्रिय थे.

मुझे याद है अमिताभ से मेरी पहली मुलाकात ट्रेन में हुई थी. फिल्म सात हिंदुस्तानी में काम कर रहे हम सभी सह कलाकार साथ थे.

Image caption शहनाज आनंद अपने पति टीनू आनंद के साथ.

मैं, मेरे भाई जलाल आगा, उत्पल दत्त, अनवर अली हम साथ में सफर कर रहे थे. जलाल आगा, बार-बार अमिताभ का मजाक उड़ा रहे थे और अमित, सिर्फ मंद-मंद मुस्कुरा रहे थे. वो काफी शर्मीले थे.

उनकी आवाज जरूर शानदार थी लेकिन उन्हें देखकर मुझे उस वक्त तो कम से कम कतई नहीं लगा कि ये दुबला पतला, लंबा इंसान कभी सुपरस्टार बन पाएगा. सेट पर वो बिलकुल खामोश रहते थे.

फिर फिल्म के एक सीन में उन्हें पुर्तगाली टॉर्चर कर रहे हैं उनका पांव काट दिया गया है और वो रेंग रहे हैं. ये सीन उन्होंने जब किया तो सेट पर मौजूद सारे लोग तालियां बजाने लगे और तब मुझे अहसास हुआ कि ये बंदा काफी दूर तक जाएगा.

रमेश सिप्पी (शोले और शक्ति के निर्देशक)

मैं उन चंद भाग्यशाली लोगों में से एक हूं जिन्हें उनके साथ काम करने का मौका मिला. मैंने उन्हें आनंद और बॉम्बे टू गोवा में देखा था और उनके काम से बहुत प्रभावित हुआ था. तभी मैंने सोच लिया था कि इस शख्स के साथ मुझे काम करना है.

Image caption निर्देशक रमेश सिप्पी के साथ शोले के सेट पर अमिताभ बच्चन.

फिर जब मैं शोले बना रहा था तो संजीव कुमार, धर्मेंद्र और हेमा मालिनी को तो हम लेने का मन बना चुके थे. एक और हीरो की जगह बाकी थी. हम सोच रहे थे कि किसी लें.

तब सलीम-जावेद ने कहा कि एक लड़का है, इलाहाबाद से आया है. हमारी लिखी फिल्म जंजीर में काम कर रहा है. जानते हो उसे. मैंने कहा- ओह हां. अमिताभ नाम है ना उन महाशय का.

फिर मेरी फिल्म सीता और गीता की सक्सेस पार्टी में हमने उन्हें बुलाया और फिर जैसे-जैसे शोले की स्क्रिप्ट पर काम होता गया हमें लगता चला गया कि ये ही जय के रोल के लिए फिट बैठेंगे.

वो हर शॉट से पहले पूरी तरह से तैयार होकर आते थे. कैमरे के एंगल के हिसाब से कैसा शॉट देना है, लाइटिंग के हिसाब से कैसे भाव लाने हैं. उन्हें हर छोटे बड़े तकनीक पहलू की जानकारी होती थी. इससे हमारा काम बहुत आसान हो जाता था.

मुझे याद है शोले का जो गाना है ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे, उसकी शूटिंग के दौरान एक सीन में मोटरसाइकिल और ट्रॉली को जोड़ना था. वो काफी कठिन सीन था. लेकिन अमिताभ ने एक टेक में वो सीन इतनी आसानी से कर दिया कि हम सब दंग रह गए.

अमिताभ हर काम को परफेक्ट तरीके से करते हैं.

फिल्म शक्ति का वो सीन जिनमें राखी की मृत्यु हो जाती है और ये आकर दिलीप कुमार के बगल में बैठ जाते हैं. उस सीन में एक भी संवाद नहीं था. साइलेंट सीन है. लेकिन इन दोनों महान कलाकारों ने जैसा अभिनय उस सीन में किया उसकी वजह से वो यादगार बनकर रह गया.

आनंद जी (संगीतकार)

अमिताभ बच्चन जैसा मेहनती, वक्त का पाबंद इंसान मैंने नहीं देखा. कल्याण जी भाई, मैंने और अमिताभ ने ही बॉलीवुड कलाकारों के विदेश में कॉन्सर्ट्स करने का सिलसिला शुरू किया.

अमिताभ के कॉन्सर्ट्स के बाद से हमारा हिंदी सिनेमा विदेशों में इतना मशहूर हुआ कि लोग कहने लगे कि अमरीका में हॉलीवुड है तो हिंदुस्तान में बॉलीवुड है.

वो हर कॉन्सर्टस से पहले रिहर्सल करते थे और स्टेज पर आते थे तो धूम मच जाती. ऐसे बेहतरीन तरीके से गाते थे कि समां बांध देते थे.

एक दिलचस्प वाकया मैं सबको बताना चाहता हूं. हम सब कनाडा के वैंक्यूवर में एक कॉन्सर्ट्स कर रहे थे. वहां बहुत सारे पंजाबी मूल के लोग रहते हैं.

दुर्भाग्यवश ढेर सारे दर्शक कॉन्सर्ट में नशा करके आ गए और हुड़दंग मचाकर पंजाबी गानों की डिमांड करने लगे.

वो अमिताभ पर टमाटर और अंडे फेंकने लगे. तब अमिताभ ने बहुत ही सहजता से माइक पर कहा, "आप लोगों ने जिस तरीके से हमारा सत्कार किया उससे हम गदगद हैं. अपने अंडे और टमाटर संभाल कर रखिएगा. हम आपकी सेवा में बार-बार आएंगे."

Image caption अमिताभ का मेक-अप करते दीपक सावंत.

ऐसा सुनते ही लोग रुक गए और फिर तालियों की जो गड़गड़ाहट हुई उसे मैं आज तक नहीं भूला. आज उनमें 70 साल वाली परिपक्विता और 20 साल के युवा जैसी ऊर्जा है.

दीपक सावंत (40 सालों से अमिताभ के मेकअप मैन)

मैं इतने लंबे समय से उनसे जुड़ा हूं. आज तक उन्होंने मुझसे या किसी से भी ऊंची आवाज में बात नहीं की.

वो मेरी फिल्मों में फ्री में काम कर देते हैं.

मुझे याद है कि मेरी फिल्म गंगादेवी की शूटिंग चल रही थी. उन्हें हार्निया की समस्या थी, लेकिन वो सेट पर आए. शूटिंग के दौरान उनके पेट में जबरदस्त दर्द हुआ. मैंने कहा भी कि शूटिंग बंद करते हैं, तो उन्होंने कहा, "नहीं. बिलकुल नहीं. तुम्हारा नुकसान होगा." उन्होंने दिन भर शूटिंग पूरी की. फिर वहीं से अस्पताल चले गए. और फिर उनका ऑपरेशन हुआ.

वो शराब, सिगरेट, चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक और नॉनवेजज खाने से बिलकुल दूर रहते हैं. कड़ी लगन और अनुशासन से वो आज भी वैसे ही चलते चले जा रहे हैं जैसे युवावस्था में काम करते थे.

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