यूके से आया 'सन ऑफ़ सरदार' का नाम

 शुक्रवार, 9 नवंबर, 2012 को 16:02 IST तक के समाचार

'सन ऑफ़ सरदार' के निर्देशक अश्विनी धीर ने बचपन का काफ़ी समय पंजाब में बिताया है.

आम तौर पर सिख समुदाय से प्रेरित हिंदी फ़िल्में इस समुदाय को भावनात्मक धक्का पहुँचाने के नाम पर विवादों की चपेट में आ जाती हैं. लेकिन इस बार विवाद की जड़ नाम नहीं कुछ और ही मामला रहा.

दिवाली पर एक साथ रिलीज़ हो रही फ़िल्मों ‘जब तक है जान‘ और ‘सन ऑफ़ सरदार’ को मिल रहे थियेटरों की संख्या को लेकर पिछले काफ़ी दिनों लम्बी खींच तान चली.

"'सन ऑफ़ सरदार' का प्रस्ताव लेकर सबसे पहले अजय मेरे पास आए थे. अजय ने मुझे तेलुगु फ़िल्म 'मर्यादा रमन्ना' के बारे में बताया था जिसका प्लॉट मुझे बहुत अच्छा लगा और मैने उसे ध्यान में रखते हुए यह फ़िल्म लिख डाली."

अश्विनी धीर

फ़िल्म 'सन ऑफ़ सरदार' के निर्देशक अश्विनी धीर ने बताया कि उनकी फ़िल्म का नाम रखते समय उन्होंने इस बात का विशेष ध्यान रखा कि इससे किसी की भावनाओं को धक्का न लगे. उन्होने बताया इसी बीच उन्होंने ब्रिटेन के एक कलाकार के गाने 'सन ऑफ़ सरदार' को सुना और वह उन्हें इतना पसंद आया कि उन्होंने फ़िल्म का नाम ही 'सन ऑफ़ सरदार' रख लिया.

अश्विनी इससे पहले ‘वन टू एंड थ्री’ और ‘अतिथि तुम कब जाओगे' नामक फिल्मों का निर्देशन कर चुके हैं. इसके अलावा उन्होंने कई फिल्मों की कहानी और उनके संवाद लिखने का काम भी बखूबी अंजाम दिया है. जिसमें अजय देवगन के ही निर्माण में बनी फ़िल्म 'यूं मी और हम' भी शामिल है.

अश्विनी ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि फ़िल्म 'सन ऑफ़ सरदार' का प्रस्ताव लेकर सबसे पहले अजय उनके पास आए थे. अजय ने उन्हें तेलुगु फ़िल्म 'मर्यादा रमन्ना' के बारे में बताया था जिसका प्लाट अश्विनी को बहुत अच्छा लगा और उन्होंने उसे ध्यान में रखते हुए एक नयी फ़िल्म लिख डाली.

अब दिखेगा असल पंजाब

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अश्विनी ने बताया कि उनके माता पिता पंजाब से हैं जिसकी वजह से उन पर भी पंजाबी संस्कृति का काफी प्रभाव है. उन्हें बचपन में ख़ूब पंजाब देखने का मौक़ा मिला और इससे उन्हें फ़िल्म में असली पंजाब दिखाने में काफी मदद मिली.

असल पंजाब सिर्फ लस्सी के गिलास पर ही नहीं ख़त्म होता, बल्कि एक घर से जुड़ी दूसरे घर की छत, पंजाबियों की खुशमिज़ाजी, लड़कियों के मुंह से गलियों का भी फूल जैसा झड़ना और असल में सरदार यानि गुट का मुखिया होना असल पंजाब दिखाता है, ऐसा मनना है अश्विनी धीर का. अश्विनी की मानें तो उनकी यह फ़िल्म पंजाब की असली तस्वीर दिखाती है और हर किसी के दिल को छुएगी.

कोई मुकाबला नहीं

"यश जी के सामने तो मेरी एक असिस्टेंट डायरेक्टर की भी हैसियत नहीं है लेकिन हमारी फ़िल्म ज़रूर ‘जब तक है जाँ’ को टक्कर देगी. हमें कम थिएटर मिले तो कोई ग़म नहीं हमें अपनी फ़िल्म पर पूरा भरोसा है"

अश्विनी धीर

यशराज बैनर की फ़िल्म 'जब तक है जान' और अजय देवगन के सह निर्माण में बनी फ़िल्म 'सन ऑफ़ सरदार' के बीच इस बात को लेकर पिछले कुछ दिनों से खींच तान चल रही थी कि यशराज ने ज़्यादातर सिंगल स्क्रीन थिएटर अपनी फ़िल्म के लिए आरक्षित कर लिए हैं. और भारतीय प्रतिस्पर्धा योग ने भी इस सिलसिले में यशराज बैनर के ख़िलाफ़ अजय देवगन की यह शिकायत खारिज कर दी है.

अश्विनी ने कहा ''यश जी के सामने तो मेरी एक असिस्टेंट डायरेक्टर की भी हैसियत नहीं है लेकिन हमारी फ़िल्म ज़रूर ‘जब तक है जाँ’ को टक्कर देगी. हमें कम थिएटर मिले तो कोई ग़म नहीं हमें अपनी फ़िल्म पर पूरा भरोसा है.''

यह दोनों ही फ़िल्में दिवाली वाले दिन यानि 13 नवम्बर को रिलीज़ होने को तैयार हैं.

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