100 करोड़ के ज़माने में बाल फिल्मों की सुध किसे!

 बुधवार, 14 नवंबर, 2012 को 09:05 IST तक के समाचार
स्टैनले का डब्बा

भारतीय सिनेमा को 100 साल पूरे होने जा रहे हैं. इन 100 सालों में सिनेमा ने कई रंग बदले हैं. लेकिन एक चीज़ बिलकुल नहीं बदली. बच्चों के लिए पहले भी कम फिल्में बनती थी और आज भी कम ही फिल्में बनती हैं.

शायद बाल फिल्मों में निर्माता पैसा इसलिए नहीं लगाना चाहते क्योंकि ये फिल्में बॉक्स ऑफिस पर अच्छे बिज़नेस की गारंटी नहीं देती.

'तारे ज़मीन पर' के लेखक और 'स्टैनली का डब्बा' के निर्देशक अमोल गुप्ते बीबीसी से बात करते हुए कहते हैं, ''हमारे यहां बच्चों के लिए बहुत ही कम फिल्में बनती हैं. इसी बात से पता चल जाता है कि हम बच्चों की कितनी इज्ज़त करते हैं. हमारे यहां बच्चों को बच्चा समझ कर काट दिया जाता है. हमें लगता है बच्चे तो बस चाकलेट और टॉफ़ी में ही खुश हैं. जिस दिन हम बच्चों से गाढ़ी दोस्ती कर लेंगे, उस दिन एक नया सूर्योदय होगा.''

अपनी बात को आगे रखते हुए अमोल कहते हैं, ''आज की तारीख़ में आप अगर बच्चों के लिए कोई फिल्म बनाना चाहते हैं तो आप से सीधे पूछा जाता है कि इस फिल्म का 'रेवेन्यू मॉडल' क्या है. निर्माता सीधे कहते हैं कि हम इस फिल्म में जो पैसा लगाएंगे वो तो हमें वापस मिलेगा ही नहीं.''

बाल दिवस के मौके पर अमोल तो ये सवाल भी करते हैं कि क्या हम सिर्फ पैसों के लिए बच्चों के ज्ञान को बढ़ाना चाहते हैं या फिर हम सच में चाहते हैं कि हमारे बच्चे नई चीज़ें सीखें.

काम नहीं मस्ती

"आज की तारीख में आप अगर बच्चों के लिए कोई फिल्म बनाना चाहते हैं तो आप से सीधे पूछा जाता है कि इस फिल्म का 'रेवेन्यू मॉडल' क्या है. निर्माता सीधे कहते हैं हम इस फिल्म में जो पैसा लगाएंगे वो तो हमें वापस मिलेगा ही नहीं."

अमोल गुप्ते

अमोल फिल्में लिखते भी हैं, अभिनय भी करते हैं और फिल्मों का निर्देशन भी करते हैं। बीबीसी ने अमोल से पूछा कि जब वो अपनी फिल्म में बच्चों के साथ काम करते हैं तो माहौल कैसा होता है?

इस सवाल के जवाब में अमोल कहते हैं, ''सबसे पहले तो मैं आपसे ये कहना चाहता हूं कि मैं बच्चों के साथ काम नहीं करता और न ही बच्चे मेरे साथ काम करते हैं. हम तो बस मस्ती करते हैं. सिनेमा 21वीं सदी की नई कला है. सिनेमा सारी कलाओं का मिश्रण है और ये उभर रहा है. बच्चे अगर इस कला में रूचि ले रहे हैं तो उनकी रूचि को बढ़ाने के लिए हमें उन्हें अच्छा सिनेमा दिखाना ज़रूरी है.''

पसंदीदा बाल फिल्म

अगर अच्छे सिनेमा की बात चल ही रही है तो इस बाल दिवस बच्चों को कौन सी फिल्म देखने की सलाह देते हैं अमोल?

इस सवाल के जवाब में अमोल कहते हैं कि वो बच्चों को चार्ली चैपलिन की 'द किड' देखने की सलाह देते हैं. अमोल के मुताबिक ये एक बेहद खूबसूरत फिल्म है.

अमोल माजिद मजीदी की फिल्म 'चिल्ड्रेन ऑफ़ हेवेन' देखने की सलाह देते हुए कहते हैं कि ये फिल्म हृदय-स्पर्शी होने के साथ साथ सच्चाई के बहुत करीब भी है.

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