फिल्म फेस्टिवल कितने फायदेमंद?

 शनिवार, 24 नवंबर, 2012 को 19:08 IST तक के समाचार
भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह

गोवा में आजकल 43वां भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह चल रहा है जहां भारतीय और विदेशी फिल्में दिखाई जा रही हैं.

दावा किया जा रहा है कि कई छोटे और स्वतंत्र फिल्मकारों को यहां अपनी फिल्में दिखाने का मौका मिलता है.

ऐसी फिल्में भी दिखाई जा रही हैं जो आमतौर पर दर्शकों के पास नहीं पहुंच पातीं. लेकिन क्या वाकई इस तरह के महोत्सवों से सिनेमा को कोई फायदा पहुंचता है?

फिल्म समीक्षक नम्रता जोशी के मुताबिक ऐसे समारोह अलग किस्म की फिल्मों के लिए काफी उपयोगी साबित होते हैं.

"ऐसे समारोहों में ना सिर्फ भारत की बल्कि वर्ल्ड सिनेमा की बेहतरीन फिल्में दिखाई जाती हैं. शानदार तुर्की और कोरियाई फिल्में देखने को मिलती हैं. भला ऐसी फिल्में आपको और कहां देखने को मिलेंगी."

नम्रता जोशी, फिल्म समीक्षक

वो कहती हैं, "ऐसे समारोहों में ना सिर्फ भारत की बल्कि वर्ल्ड सिनेमा की बेहतरीन फिल्में दिखाई जाती हैं. शानदार तुर्की और कोरियाई फिल्में देखने को मिलती हैं. भला ऐसी फिल्में आपको और कहां देखने को मिलेंगी. सिनेमा हॉल में ऐसी फिल्में देखना कहां नसीब होता है."

आमिर खान प्रोडक्शंस की पीपली लाइव जैसी चर्चित फिल्म का निर्देशन करने वाली अनुषा रिज़वी मानती हैं कि ऐसे महोत्वों में आकर फिल्म बिरादरी के कई लोगों से मिलना जुलना होता है, वो आपकी फिल्मों पर जो फीडबैक देते हैं वो वाकई फायदेमंद होता है.

साथ ही अनुषा कहती हैं, "कई विदेशी फिल्मकारों से मुलाकात होती है. आपकी फिल्मों को विदेशी खरीददार मिलते हैं. लोग आपके प्रोजेक्ट में पैसा लगाने को तैयार होते हैं. तो मेरे हिसाब से ऐसे महोत्सव खासे फायदेमंद होते हैं."

मेनस्ट्रीम के सितारे नदारद

समारोह की शुरुआत मशहूर निर्देशक एंग ली की फिल्म 'लाइफ ऑफ पाई' से की गई.

शाहरुख खान प्रोडक्शंस की चर्चित फिल्म रा.वन का निर्देशन करने वाले अनुभव सिन्हा का भी यही मानना है.

हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि ऐसे समारोह मेनस्ट्रीम सिनेमा के लिए नहीं है. बल्कि जिन फिल्मों को पहचान की ज़रूरत होती है उनके लिए ज़रूर फायदेमंद साबित होते हैं.

यही वजह है कि बड़े सितारे इस तरह के महोत्सवों से नदारद रहते हैं. क्योंकि उन्हें नहीं लगता कि उनके सिनेमा को इन समारोहों में सेलिब्रेट किया जाता है.

अक्षय कुमार से उद्घाटन कराने की वजह

"ऐसे समारोह मेनस्ट्रीम सिनेमा के लिए नहीं होते. ये उन फिल्मकारों की फिल्मों के लिए होते हैं जो अच्छा काम तो कर रहे हैं लेकिन जिन्हें पहचान बनाने की ज़रूरत है."

अनुभव सिन्हा, निर्देशक

फिर गोवा में शुरु हुए इस 43वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह के उद्घाटन के लिए अक्षय कुमार जैसे बड़े स्टार की ज़रूरत क्यों महसूस हुई.

इसके जवाब में नम्रता जोशी कहती हैं, "देखिए इसके लिए काफी हद तक मीडिया ज़िम्मेदार है. 50 फीसदी मीडिया तो सिर्फ अक्षय कुमार की वजह से वहां पहुंच गया. तो आयोजकों को भी लगता है कि महोत्सव को लाइमलाइट में लाने के लिए बड़े स्टार की ज़रूरत पड़ जाती है. भले ही वो मौजूदगी क्षणिक ही क्यों ना हो."

वैसे ज़्यादातर फिल्मकार और समीक्षक मानते हैं कि काफी हद तक ऐसे महोत्सव अपने उद्देश्य की पूर्ति में कामयाब रहते हैं और इनसे कहीं ना कहीं सिनेमा की बेहतरी होती है.

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