शाहिद से रिश्तों पर क्या बोले पंकज

Image caption शाहिद कपूर और सोनम कपूर के साथ पंकज कपूर.

वरिष्ठ अभिनेता और निर्देशक पंकज कपूर अपने अभिनेता पुत्र शाहिद को दोस्त का दर्जा देते हैं.

मुंबई में मीडिया से मुखातिब पंकज कपूर कहते हैं, "हम दोनों के बीच दोस्ताना रिश्ते हैं. कम से कम मैं तो उसे दोस्त मानता हूं." शाहिद की तारीफ करते हुए पंकज कहते हैं, "वो नए ज़माने का युवा लड़का है. लेकिन साथ ही काफी संतुलित लड़का है. मैं उससे कई मामलों में सलाह लेता हूं. वो भी कई दफा मुझसे सुझाव मांगता है और साथ ही मेरा मार्गदर्शन भी करता है."

शाहिद कपूर को लेकर पिछले साल पंकज कपूर ने फिल्म 'मौसम' बनाई थी. लेकिन उसे दर्शकों की ठंडी प्रतिक्रिया मिली थी.

पंकज कपूर मानते हैं कि शायद फिल्म थोड़ी लंबी बन गई थी. लेकिन साथ ही वो कहते हैं, "हमने अपनी समझ के हिसाब से फिल्म को बनाया था. लेकिन हर बार आपका काम सफल हो ज़रूरी तो नहीं. हां, अगली बार हम जो फिल्म बनाएंगे इसमें इन कमियों का ध्यान रखेंगे."

मटरू की बिजली का मंडोला

पंकज कपूर विशाल भारद्वाज की आने वाली फिल्म 'मटरु की बिजली का मंडोला' में एक अहम किरदार निभा रहे हैं.

वो एक बेहद अमीर और रसिक किस्म के शख़्स के रंगीले किरदार में हैं. फिल्म में उनके साथ उनकी पुरानी सह अभिनेत्री शबाना आज़मी भी अहम भूमिका में हैं.

साथ ही इसमें इमरान ख़ान और अनुष्का शर्मा भी मुख्य किरदार निभा रहे हैं.

Image caption विशाल भारद्वाज की आने वाली फिल्म 'मटरु की बिजली का मंडोला' में पंकज अहम किरदार निभा रहे हैं.

फिल्म अगले साल 14 जनवरी को रिलीज़ होगी.

निर्देशक विशाल भारद्वाज के साथ पंकज ने इससे पहले 'मक़बूल' और 'ब्लू अंब्रेला' जैसी फिल्मों में काम किया है.

वो विशाल की तारीफ करते हुए कहते हैं, "विशाल अपने विषय पर बहुत अच्छी रिसर्च करते हैं. उनकी फिल्मों में हिंदुस्तान के विविध रंग होते हैं. उनकी समझ की मैं कद्र करता हूं."

फिलहाल टीवी नहीं

करमचंद, नीम का पेड़ और ऑफिस-ऑफिस जैसे यादगार टीवी कार्यक्रम देने वाले पंकज कपूर लंबे समय से भला टीवी से क्यों दूर हैं?

इसके जवाब में वो कहते हैं, "पिछले 8-9 साल से हिंदुस्तानी टीवी की रंगत ही बदल गई है. मैं इस नए माहौल में अपने आपको फिट नहीं पाता. अब लंबे लंबे घंटों तक शूटिंग करनी पड़ती है और रचनात्मकता की गुंजाइश बेहद कम हो गई है. साथ ही जो लोग आज का टीवी संचालित कर रहे हैं वो मेरे हिसाब के लोग नहीं."

लेकिन साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि भविष्य में टीवी की सूरत बदलती है. लोगों के काम करने का ढंग बदलता है और उन्हें क्रिएटिविटी की आज़ादी मिलती है तो टीवी पर काम करने से उन्हें कोई गुरेज ना होगा.

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