'हर दिन होता है लड़कियों का यौन उत्पीड़न'

  • 1 जनवरी 2013
चित्रांगदा सिंह,अभिनेत्री
Image caption ऩई फिल्म 'इंकार' में चित्रांगदा बोल्ड अवतार में नज़र आएंगी.

'हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी' से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत करने वाली अभिनेत्री चित्रांगदा सिंह की नई फिल्म 'इंकार' कार्यस्थल पर होने वाले यौन उत्पीड़न पर आधारित है.

चित्रांगदा के मुताबिक हर दिन लड़कियां किसी ना किसी छोटे या बड़े यौन उत्पीड़न का शिकार होती हैं और ये सिर्फ दफ्तरों तक सीमित नहीं है.

ऐसी ही एक घटना का ज़िक्र करते हुए चित्रांगदा ने बताया कि किस तरह मुंबई की सड़क पर एक लड़की रिक्शा में जा रही थी और रिक्शा पलट गया.

चित्रांगदा ने आगे कहा "रिक्शा पलटते ही दो लड़के उस लड़की की मदद करने के बहाने उसे गलत जगह छूने लगे और वो लड़की घबरा गई. मैं अपनी कार में थी और मैंने जब ये देखा तो बाहर निकल कर सबसे पहले रिक्शा वाले को दो थप्पड़ जड़े जिसे देखकर वो दोनों लड़के भी घबरा गए."

अपने स्कूल और कॉलेज के दिन याद करते हुए चित्रांगदा बताती है "ऐसी घटनाएं मेरे साथ भी हुई हैं. जब आप 12-13 साल के होते हैं तो आपको पता नहीं होता कि आप बड़े हो रहे हैं. लोग आपकी तरफ किसी ओर ही नज़र से देख रहे होते हैं. कॉलेज में पढ़ाई के दौरान मैं दिल्ली में बस से चलती थी वहां भी छेड़खानी हुई है."

कास्टिंग काउच

ऐसी अटकलें लगाई जा रही थीं कि फिल्म इंकार में चित्रांगदा का किरदार अभिनेत्री सुष्मिता सेन के जीवन की एक असल घटना पर आधारित है जब सुष्मिता ने एक कोला कपंनी के अधिकारी पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था.

लेकिन चित्रांगदा का कहना है "जब मैं अपने रोल के लिए यौन उत्पीड़न के मामलों पर रिसर्च कर रही थी तब मुझे किसी ने सुष्मिता सेन के केस के बारे में बताया. ये मेरे सिर्फ रिसर्च का हिस्सा था, इससे ज़्यादा कुछ नहीं था."

फिल्म इंडस्ट्री में कास्टिंग काउट के बारे में बात करते हुए चित्रांगदा कहती हैं "कास्टिंग काउच इस इंडस्ट्री में होता है लेकिन दूसरी जगहों से कम. यहां आपके पास ऑप्शन होता है कि समझौता नहीं करना तो काम छोड़ो. लेकिन किसी सरकारी दफ्तर में ऐसा होता है तो नौकरी छोड़ना आसान नहीं है. यहां कम से कम किसी के भी साथ काम करने की आज़ादी तो है."

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