क्या कुर्सी से चिपकाए रख पाएगी टेबल नं 21?

टेबल नं 21,हिंदी फिल्म

टेबल नंबर 21 एक थ्रिलर है. विवान (राजीव खंडेलवाल) और सिया (टीना देसाई) के कॉलेज की दोस्ती शादी में बदल जाती है.

अपनी शादी की पांचवी सालगिरह पर वो एक शानदार द्वीप पर जाते हैं जहां उनकी मुलाकात खान (परेश रावल) से होती है.

बातों-बातों में खान उन्हें एक खेल का लालच देता है जिसका ईनाम 21 करोड़ रुपए है. अब चूँकि विवान बेरोज़गार है इसलिए उसे ये खेल काफी काम का लगता है.

खेल का बस एक ही रूल है 'अगर झूठ बोला तो मारे जाओगे'. इस खेल को इंटरनेट पर पूरी दुनिया भर में लोग देखते हैं. जैसे-जैसे विवान राउंड जीतता है उसके अकाउंट में पैसे ट्रांसफर होते जाते हैं.

लेकिन खेल का लेवल कठिन होने के साथ ही विवान और सिया समझ जाते हैं कि बिना किसी बड़े नुकसान के वो ये खेल नहीं छोड़ पाएंगे. उन्हें ये भी समझ आता है कि खान उनके अतीत के बारे में काफी कुछ जानता है.

तो क्या विवान और सिया ये खेल जीत पाते हैं? कौन है खान और वो इन दोनों के बारे में इतना कुछ कैसे जानता है?

ड्रामा और सस्पेंस

Image caption टेबल नं 21 में कलाकारों का अभिनय अच्छा है

शांतनु रे और शीर्षक आनंद की कहानी 'टेबल नंबर 21' संजय दत्त की फिल्म 'ज़िंदा' की याद दिलाती है. फिल्म दर्शकों को अपनी सीट पकड़ कर बैठने के लिए मजबूर करेगी क्योंकि आप सोच ही नहीं सकते कि आगे क्या होगा.

हालांकि एक बार जब खेल खतरनाक हो जाता है उसके बाद दर्शकों को आने वाले ड्रामे का अंदाज़ा लग सकता है और तभी फिल्म थोड़ी बोरिंग और थकाऊ लगने लगती है.

फिल्म वर्तमान और फ्लैश बैक में झूलती है और जब आखिरी फ्लैश बैक शुरु होने वाला होता है तब तक दर्शकों को सस्पेंस का लगभग अंदाज़ा लग जाता है. शांतनु,शीर्षक और अभिजीत देशपांडे की पटकथा काफी रोचक है लेकिन एक प्वाइंट पर आकर उबाऊ भी लगने लगती है.

गैर मसाला फिल्म

सबसे ज़रुरी बात ये है कि क्योंकि फिल्म थोड़ी अलग है इसलिए मसाला फिल्म देखने वाले दर्शकों को शायद पसंद ना आए.

अपनी शैली के कारण फिल्म एक सीमित वर्ग को ही शायद अपील करेगी. फिल्म की सबसे बड़ी खामी ये है कि दर्शक विवान और सिया के लिए ज़रा भी हमदर्दी नहीं दिखा पाते क्योंकि लेखकों ने दोनों किरदारों के बारे में ज़्यादा कुछ बताया ही नहीं.

अभिजीत द्वारा लिखे डायलॉग्स में दम है और आपके चेहरे पर हंसी भी लाते हैं.

अभिनय

खान की भूमिका में परेश रावल ने शानदार काम किया है.खान के रोल में पूरी तरह डूबे हुए दिखे हैं. राजीव खंडेलवाल भी विवान के रोल में जमे हैं. उन्होंने किरदार की परेशानी और ईमानदारी को बखूबी दिखाया है.टीना देसाई ने भी सिया का रोल प्रभावशाली तरीके से निभाया.

आदित्य दत्त का निर्देशन बढ़िया है.कहानी में थोड़ी स्पीड और होती तो अच्छा होता.हालांकि फिल्म में गानों के लिए जगह नहीं है फिर भी गीत डाले गए हैं.सचिन गुप्ता और गजेंद्र वर्मा द्वारा रचे गीत अच्छे बन पड़े हैं.अमर मोहिले का बैकग्राउंड स्कोर बेहतर हो सकता था.फिजी की लोकेशन बेहद मनमोहक है.

कुल मिलाकार टेबल नं 21 एक बांध के रखने वाली रोमांचक फिल्म है पर अधिक टेकर्स ना होने के कारण ये सिनेमा में कितने दिन टिकेगी ये देखना होगा.

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