जब रहमान लगाते हैं की-बोर्ड को हाथ

 रविवार, 6 जनवरी, 2013 को 17:46 IST तक के समाचार
एआर रहमान

रविवार को एआर रहमान 46 साल के हो गए

पहले भारत और बाद में पूरी दुनिया में अपने हुनर का डंका बजाने वाले संगीतकार एआर रहमान रविवार को 46 साल के हो गए हैं.

दो ऑस्कर, एक बाफ्टा और एक गोल्डन ग्लोब अवॉर्ड पाने वाले वो इकलौते भारतीय हैं. इसके अलावा वह चार राष्ट्रीय पुरस्कार भी हासिल कर चुके हैं.

प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय पत्रिका टाइम ने उन्हें 'मोज़ार्ट ऑफ मद्रास' भी कहा. रहमान के करीबी दोस्त मानते हैं कि वह संगीत के अलावा कुछ नहीं सोचते हैं.

एआर रहमान के साथी और मशहूर ड्रमर आनंद शिवमनी कहते हैं, "जब रहमान स्टूडियो आते हैं और की-बोर्ड को हाथ लगाते हैं तो जैसे हवा में जादू सा छा जाता है. वहां मौजूद साजिंदों पर भी उस जादू का ऐसा नशा होता है कि जल्द ही एक जादुई धुन निकलकर सामने आ जाती है."

कामयाबी का राज़

आखिर रहमान में ऐसा क्या खास है कि वो इतनी जल्दी अंतरराष्ट्रीय बुलंदियों पर पहुंच गए.

इसके जवाब में शिवमनी कहते हैं, "रहमान घंटों काम करते रहते हैं. उनकी मां उन्हें खाने के लिए बोलती रहती हैं लेकिन उन पर तो जैसे संगीत का नशा सा छाया रहता है.''

"जब रहमान स्टूडियो में आते हैं और की-बोर्ड को हाथ लगाते हैं तो जैसे हवा में जादू सा छा जाता है. वहां मौजूद साजिंदों पर भी उस जादू का ऐसा नशा होता है कि जल्द ही एक जादुई धुन निकलकर सामने आ जाती है."

शिवमनी, मशहूर ड्रमर और ए आर रहमान के साथी

शिवमनी बताते हैं, ''वह एक साथ एक बार में कई काम कर लेते हैं. संगीत रचते समय वह देशकाल की सीमा से परे होकर सोचते हैं. शायद यही उनकी कामयाबी का राज़ है."

स्कूल के दिनों में रहमान के सीनियर रहे भारतबाला जो रहमान के पहले संगीत एलबम 'वंदे मातरम' के निर्देशक भी हैं, कहते हैं, "स्कूल के दिनों से ही दिलीप कुमार (एआर रहमान के बचपन का नाम) संगीत में दिलचस्पी फरमाते थे. स्कूल का कोई कार्यक्रम रहमान की प्रस्तुति के बिना पूरा नहीं होता था. वह की-बोर्ड पर फिल्मों के गाने बजाते थे."

वो की-बोर्ड और वो स्कूटर

भारतबाला रहमान के साथ अपने बिताए गए पुराने दिनों को याद करते हुए कहते हैं कि रहमान अपना की-बोर्ड लेकर उनके साथ पुरानी लैम्ब्रेटा स्कूटर में घूमते रहते थे.

भारतबाला बताते हैं कि दोनों मिलकर दूरदर्शन के लिए जिंगल्स बनाया करते थे. उन दिनों चेन्नई में ज़्यादा रिकॉर्डिंग स्टूडियो नहीं होते थे तो वो सीधे एडिटिंग मशीन में ही रिकॉर्डिंग करते थे.

वैसे साल 2012 रहमान के लिए बहुत बेहतर साबित नहीं हो पाया. उन्होंने दो हिंदी फिल्मों में संगीत दिया- 'एक दीवाना था' और यशराज बैनर की 'जब तक है जान'. लेकिन दोनों ही फिल्मों का संगीत कोई खास धमाल नहीं मचा पाया.

अब रहमान भारतबाला की पहली व्यावसायिक फिल्म 'मरियान' का संगीत दे रहे हैं जिसमें 'कोलावेरी' गाने से मशहूर हुए अभिनेता धनुष हैं. फिल्म का संगीत जल्द ही जारी होगा.

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