क्या चश्मे बद्दूर का जादू फिर से चलेगा?

  • 17 जनवरी 2013
फारुख़ शेख़ और दीप्ती नवल
Image caption 1981 की चश्मेबद्दूर में फारुख़ शेख़ और दीप्ती नवल मुख्य भूमिका में थे.

जब किसी फिल्म का रीमेक बनता है तो सबसे पहला सवाल उठता है कि क्या फिल्मकार पुरानी फिल्म का जादू दोहराया पाएगा ?

1981 में बनी रोमांटिक कॉमेडी फिल्म 'चश्मे बद्दूर' की रिमेक भी ऐसे सवालों से घिरी हुई है जिसके निर्देशक डेविड धवन हैं.

मूल फिल्म 'चश्मे बद्दूर' के हीरो फारुख़ शेख़ के मुताबिक फिल्म में सबसे ज़्यादा काबिले-तारीफ काम निर्देशक सई परांजपे का था,अगर वही चीज़ डेविड धवन कर पाएं तो फिल्म अच्छी बनेगी.

फारुख़ कहते हैं "सई ने इतनी अच्छी स्क्रिप्ट लिखी थी.उन्होंने जो किताब में लिखा था वही वो पर्दे पर हमसे करवाने में कामयाब रही.इसी मयार का काम अगर डेविड करेंगे तब बात बनेगी."

वहीं फिल्म की हीरोइन दीप्ती नवल को नहीं लगता कि पुरानी चश्मे बद्दूर की मासूमियत और जादू को दोहराया जा सकता है और शायद नए निर्देशक उसे दोहराना चाहते भी नहीं है.वो आज के ज़माने के युवाओं को ध्यान में रखकर फिल्म को बनाएंगे.

फिल्म के रिमेक में मुख्य भूमिका अली ज़फर निभा रहे हैं और फारुख को यक़ीन है कि वो अच्छा काम करेंगे.

फारुख़ का कहना है "किसी भी एक्टर के लिए दो कंधे ज़रुरी होते हैं.एकटर जो है वो लेखक और निर्देशक के कंधे पर खड़ा होता है.सिर्फ एक्टर के सिर पर सब कुछ मढ़ दिया जाना सही नहीं है."

वर्तमान फिल्मों के बारे में बात करते हए दीप्ती कहती हैं "80 में छोटी फिल्मों को दौर जो था वो लगता है अब फिर आ रहा है. अब एक तरह की ही फिल्मों का सिस्टम धीरे धीरे ख़त्म हो रहा है."

70 और 80 के दशक में कई फिल्मों में एक साथ काम करने वाली दीप्ती नवल और फारुख शेख़ की जोड़ी अब नई फिल्म लिसन अमाया में नज़र आएगी.

दीप्ती के साथ कम फिल्में करने की वजह बताते हुए फारुख़ कहते हैं "दीप्ती भी कम फिल्मों में काम करती हैं और मैं भी थोड़ा सुस्त हूं.कोई ऐसी फिल्में मिले जिसकी कहानी हम दोनों को अच्छी लगे. लिसन अमाया की कहानी हम दोनों को पसंद आई इसलिए हम राज़ी हो गए."

लिसन अमाया 1 फरवरी को रिलीज होगी.

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