वीरप्पन की फिल्म में असली डाकू

  • 12 फरवरी 2013
वाना युद्धम,तमिल फिल्म

असल जीवन की घटनाएं और उनसे जुड़ी शख़्सयितों पर कई फिल्में बनती हैं लेकिन ऐसा कितनी बार होता है कि किरदार को निभाने वाले कलाकार कोई और नहीं उस घटना से जुड़े लोग ही होते हैं.

कुख़्यात डाकू वीरप्पन पर बनी 'वाना युद्धम' ऐसी ही एक तमिल फिल्म है जिसकी शूटिंग उन लोकेशन पर हुई है जहां वीरप्पन का जन्म और मृत्यु हुई.

यहीं नहीं वीरप्पन के साथी जिन्होंने साल 2000 में मशहूर अभिनेता राज कुमार के साथ साथ तीन और लोगों का अपहरण किया था वह भी इस फिल्म में अपने ही रोल में नज़र आएंगे.

आगे सुनिए,इस अपहरण के एक बंधक नागप्पा जो 61 दिन बाद डकैतों के चंगुल से भागने में कामयाब रहे वो भी खुद इस फिल्म में अपना ही किरदार निभा रहे हैं.

11 साल की रिसर्च

भारत के कुख़्यात डाकूओं में से एक कूसे मुनिस्वामी वीरप्पन 100 से ज़्यादा हत्याओं,चंदन की तस्करी और अन्य अपराधों के लिए बदनाम था और कर्नाटक और तमिल नाडु के समीप जंगलों मे रहता था.

वीरप्पन को दोनों ही राज्य की पुलिस 60 के दशक से ढूंढ रही थी और कई असफल कोशिशों के बाद 18 अक्टुबर 2004 में तमिल नाडु की स्पेशल टास्क फोर्स ने अतिरिक्त पुलिस मुख्य निदेशक के विजय कुमार की अगुवाई में वीरप्पन को मार गिराया था.

निर्देशक एएमआर रमेश की इस फिल्म में वीरप्पन का रोल किशोर ने निभाया है और विजय कुमार के रोल में अर्जुन नज़र आएंगे. गौरतलब है कि रमेश ने इससे पहले कन्नड़ फिल्म 'साइनाइड' भी बनाई है जो प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारों के बैंगलुरु में घुसने के बाद की घटनाओं पर आधारित थी.

रमेश बताते हैं "1991 में कॉलेज के वक्त से मैं और मेरे दोस्त वीरप्पन के बारे में जानकारियां बटोरते थे क्योंकि हम सभी इस शख़्सियत से चौंकते थे जो जंगल पर राज करता था और पुलिस के हाथ भी नहीं लगता था.ये फिल्म मेरी 11 साल की रिसर्च का नतीजा है."

वीरप्पन पर ये फिल्म तमिल के अलावा कन्नड़ में 'अट्टाकासा' के नाम से बनी है. ये फिल्म शुरु से ही विवादों में रही. पहले वीरप्पन की पत्नी मुथ्थुलक्ष्मी और फिर डकैत का साक्षात्कार लेने वाले तमिल पत्रिका के संपादक नक्कीरण गोपाल ने फिल्म पर स्टे ऑर्डर लगवाया.

हालांकि बीते दिनों मद्रास हाई कोर्ट ने फिल्म के कुछ सीन को हटाने की बात कहकर स्टे हटा दिया है. फिल्म 14 फरवरी को सिनेमा हॉल में दस्तक देगी.

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