फ़िल्मफ़ेयर अवॉर्ड: मरम्मत की ज़रुरत?

फिल्मफेयर अवार्ड 2013

रविवार की रात घरों में खाना जल्दी बन गया था क्योंकि टीवी पर आठ बजे से फ़िल्मफ़ेयर अवॉर्ड आने वाले थे.

शुरुआत हुई शाहरुख़ ख़ान की आवाज़ में एक गीत के साथ जिसे बॉलीवुड के 100 साल पूरे होने की खुशी में गणेश हेगड़े द्वारा गढ़ा गया था और जिसकी अवधि 10 मिनट लंबी थी.

वैसे तो शतक भारतीय सिनेमा ने लगाया है लेकिन बॉलीवुड की अंतर्राष्ट्रीय पहुंच ने भारत के सिनेमा को सिर्फ हिंदी फिल्मों तक ही सीमित करके छोड़ दिया है. हालांकि इसमें बॉलीवुड की क्या गलती अगर उसके ममेरे और चचेरे भाई उससे आगे नहीं निकल पाए?

ख़ैर, अवॉर्ड समारोह में बॉलीवुड के 100 सालों की उपलब्धियों पर सैफ़़ और शाहरुख़ ख़ान ने अपने अंदाज़ में रोशनी डाली जिसमें तारीफ कम और मज़ाक की मात्रा ज़्यादा थी.

मदर इंडिया जैसी फिल्म का ज़िक्र इतने सतही तरीके से किया गया कि देखकर लग रहा था कि जब बॉलीवुड ही अपनी फिल्मों को गंभीरता से नहीं लेता तो फिर बाहर वालों से शिकायत कैसी?

अवॉर्ड शो का डर

अवॉर्ड शो में शाहरुख और सैफ़ द्विअर्थी चुटकुलों का सहारा लेकर आगे बढ़ रहे थे, जिन पर घर में बैठे दर्शकों को भले ही हंसी ना आई हो लेकिन समारोह में बैठी हस्तियां ज़रुर हंस रही थीं, कम से कम एडिटिंग के ज़रिए तो यही दिखाने की कोशिश की गई थी.

वैसे कुछ दिनों पहले अमिताभ बच्चन ने भी एक अवॉर्ड शो में जाने से पहले ट्वीट किया था "अवॉर्ड शो में एक ही डर सताता है, पता नहीं आपके कौन से भाव को टीवी वाले बार-बार कॉपी पेस्ट करके दिखाएंगे."

फिलहाल, फ़िल्मफ़ेयर में कई फिल्मों और फिल्म वालों का मज़ाक बनाने के बाद, ट्विटर पर शाहरुख़ और सैफ़ की मेज़बानी का चुटकुला बना हुआ है. मसलन एक ट्वीट कहता है, "शाहरुख़ की एक ख़ास अदा है जिससे वो दर्शकों को बुरी तरह इरीटेट कर सकते हैं."

वहीं एक और ट्वीट में लिखा है "शाहरुख़ और सैफ़ फेसबुक के बासी चुटकुलों के साथ तैयार हैं, वही चुटकुले जो ट्विटर पर भी पुराने हो चुके हैं."

भाषण छोटा रखें

Image caption शाहरुख़ और सैफ ने फिल्मफेयर अवार्ड 2013 की मेज़बानी की

वैसे इस बार इन दोनों मेज़बानों द्वारा कहा गया कि विजेता अपना धन्यवाद भाषण छोटे से छोटा रखें. भाषण लंबा होने पर घंटी बजा दी जाएगी. ये बात अलग है कि विजेताओं से ज़्यादा लंबी लाइनें मेज़बानों ने बोली.

वैसे कुछ सालों पहले निर्देशक आशुतोष गोवारिकर ने इसी बात पर आपत्ति भी दर्ज की थी कि क्यों विजेता को अपनी खुशी ज़ाहिर करने के लिए वक्त नहीं दिया जाता.

विश्व प्रसिद्ध ऑस्कर अवॉर्ड में भी 45 सेकेंड की समय सीमा होती है जिसे विजेताओं द्वारा पार कर दिया जाता है. फिल्म 'द पिआनिस्ट' के अभिनेता एड्रियेन ब्रोडी को जब सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का अवॉर्ड दिया गया था तो उन्होने ऐसा ही कुछ किया था.

फ़िल्मफ़ेयर अवॉर्ड को पूरे 60 साल हो चुके हैं और कई बार अतिउत्साह में आकर उसे भारत का ऑस्कर भी कह दिया जाता है. इस लिहाज़ से इस पुरस्कार से गंभीरता की अपेक्षा करना शायद ग़लत नहीं है. इस अवॉर्ड को, इसकी प्रस्तुति को और इसके चुटकुलों को मरम्मत की ज़रुरत है.

आखिर ये किसी स्कूल में होने वाला पुरस्कार वितरण समारोह नहीं है, ये फ़िल्मफ़ेयर अवॉर्ड है.

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