ऑस्कर की राजनीति में 'ज़ीरो डार्क थर्टी' ?

  • 26 फरवरी 2013
ज़ीरो डार्क थर्टी

ज़ीरो डार्क थर्टी - ओसामा बिन लादेन को मारने से जुड़े अभियान पर बनी ये अमरीकी फिल्म वैसे तो ऑस्कर में सर्वश्रेष्ठ फिल्म की दौड़ में थी लेकिन केवल सर्वेश्रेष्ठ साउंड एडिटिंग का पुरस्कार ही बटोर पाई और वो भी जेम्स बॉंड की फिल्म 'स्कायफॉल' के साथ.

तो क्या दुनिया के अब तक के सबसे बड़े मैनहंट कहे जाने वाले इस अभियान पर बनी ये फिल्म ऑस्कर की और अमरिका की राजनीति का शिकार हुई है?

2009 में फिल्म 'हर्टलॉकर' के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार जीत चुकी कैथरिन बिगेलो की फिल्म 'ज़ीरो डार्क थर्टी' रिलीज़ होने के साथ ही अमरीकी संसद की आंख में किरकिरी बन गई थी.

इस फिल्म में दिखाए गए पूछताछ के दमनात्मक तरीकों को लेकर खासा विवाद रहा है. अमरीकी संसद में डेमोक्रेट और रिपब्लिकन पार्टी दोनों ने ही इन दृश्यों पर कड़ा विरोध दर्ज किया और कहा कि ये अमरीका की और एजेंसी सीआईए की गलत छवि प्रस्तुत करता है.

ऑस्कर से पहले न्यू यॉर्क के फिल्म समीक्षक असीम छाबड़ा ने 'मुंबई मिरर' अख़बार के कॉलम में लिखा था "मेरी पसंदीदा फिल्म ज़ीरो डार्क थर्टी है लेकिन उसमें दिखाए यातना दृश्यों को जिस तरह आलोचनाएं झेलनी पड़ रही हैं,लगता नहीं कि उसे सर्वेश्रेष्ठ फिल्म का अवार्ड मिल पाएगा."

तो क्या यही कारण रहा कि 'ज़ीरो डार्क थर्टी' सर्वश्रेष्ठ फिल्म की श्रेणी में रहते हुए भी केवल एक अवार्ड जीत पाई और कैथरिन को तो सर्वेश्रेष्ठ निर्देशक के लिए नामांकन भी नहीं मिला?

यातना दिखाना ज़रुरी था

'द सन' अख़बार को दिए एक साक्षात्कार में फिल्म की निर्देशक कैथरिन ने कहा था "इतिहास से मुंह मोड़ना गलत होगा. लादेन की तलाश में कुछ चीज़ें अफसोसजनक हुई लेकिन अगर हम यातनाओं के दृश्य नहीं दिखाते तो ये इतिहास को मिटाने जैसा होता."

एक और अख़बार 'द इंडिपेंडेंट' के मुताबिक "पिछले साल दिसंबर में ज़ीरो डार्क थर्टी को न्यू यॉर्क फिल्म क्रिटिक सर्किल और नैशनल बॉर्ड ऑफ रिव्यू द्वारा सर्वेश्रेष्ठ फिल्म का दर्जा दिया गया था लेकिन ये फिल्म ऑस्कर अभियान में पीछे रह गई क्योंकि स्टूडियो सोनी पिक्चर्स को यूएस सीनेटरों ने चिट्ठी लिखकर अपनी आपत्ति दर्ज की थी."

खुलेआम हस्तक्षेप

फिल्म समीक्षक नम्रता जोशी के अनुसार वैसे तो ये कहना गलत होगा कि ऑस्कर पुरस्कारों में खुलेआम राजनीतिक हस्तक्षेप होता है या इनमें हेरफेर होती है लेकिन ये भी किसी से छुपा नहीं है कि इन अवार्ड्स में राजनैतिक माहौल का ध्यान ज़रुर रखा जाता है.

नम्रता कहती है "मनोरंजन उद्योग का राजनीति से कितना मेलजोल है ये किसी से छुपा नहीं है लेकिन जिस तरह इस बार बेस्ट फिल्म का अवार्ड व्हाइट हाउस से मिशेल ओबामा ने घोषित किया ये तो खुलेआम अपने प्रगाढ़ संबंधों को दिखाने की कोशिश लगी."

जहां कैथरिन की फिल्म ज़ीरो डार्क थर्टी, लादेन की तलाश में अमरीकी एजेंसी के छल-से-या-बल-से की प्रवृत्ति को दिखाती है,वहीं सर्वेश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार जीतने वाली आर्गो, 1979 के उस साहसिक कारनामे को दिखाती है जब सीआईए ने अपनी सूझबूझ से ईरान में अमरीकी बंधकों को बाहर निकाला था.

अब ऐसे में अवार्ड किसे मिलना चाहिए था,ये निर्भर करता है कि अवार्ड कहां हो रहे हैं?

संबंधित समाचार