चश्मे बद्दूर को लेकर दबाव में हूं: डेविड धवन

चश्मे बद्दूर

रीमेक फिल्मों की लिस्ट में एक नाम और जुड़ने जा रहा है. डेविड धवन निर्देशित फिल्म 'चश्मे बद्दूर' का. ये फिल्म 1981 में आई बहुचर्चित फिल्म 'चश्मे बद्दूर' का रीमेक है.

फिल्म जल्द ही 5 अप्रैल को रिलीज़ हो रही है और इन दिनों डेविड धवन अपनी फिल्म को प्रमोट करने में लगे हुए हैं.

इसी सिलसिले में बीबीसी से बात करते हुए डेविड कहते हैं, ''जब मैं ये फिल्म बना रहा था तब मुझ पर कोई दबाव नहीं था. लेकिन हां आज जब हर कोई मेरी फिल्म के बारे में बात कर रहा है तो मैं ज़रूर अपने ऊपर उस दबाव को महसूस कर रहा हूं. अब मुझे लग रहा है कि मैंने ये क्या कर लिया. मैं उम्मीद कर रहा हूं कि जो मैंने किया है वो ठीक हो.''

कहानी में बदलाव

डेविड ये भी कहते हैं कि उन्होंने फिल्म की कहानी को अपने हिसाब से लिखा और उसे अपने ही हिसाब से बना भी डाला. तो क्या इसका मतलब ये हुआ कि पुरानी फिल्म से अलग है डेविड की 'चश्मे बद्दूर'?

इस सवाल का जवाब देते हुए डेविड कहते हैं, ''वो वक़्त अलग था आज का वक़्त अलग है. पुरानी फिल्म में भी सभी कलाकारों का काम बहुत अच्छा था, फिल्म बहुत ही मनोरंजक थी. वो भी युवा पीढ़ी की ही फिल्म थी. नई फिल्म में मैंने फिल्म के माहौल को बदला है, कुछ नए किरदार कहानी में जोड़े हैं. फिल्म पुरानी चश्मे बद्दूर जैसी है भी और नहीं भी है.''

साथ ही डेविड ये भी कहते हैं, ''मैंने अपनी तरफ से इस फिल्म को पूरी तरह निभाने की कोशिश की है. मैंने अपनी कहानी में कुछ बदलाव ज़रूर किए हैं लेकिन कहानी की आत्मा से ज़रा भी छेड़छाड़ नहीं की है.''

वैसे डेविड को ये ही फिल्म बनाने की कैसे सूझी? डेविड कहते हैं 'चश्मे बद्दूर' का रीमेक बनाने का सुझाव उनका नहीं बल्कि फिल्म निर्माण कंपनी वायकोम 18 का था. उनके पास इस फिल्म के निर्माण अधिकार थे. कंपनी चाहती थी कि मैं ही इस फिल्म का निर्देशन करूं.''

डेविड ये भी कहते हैं कि इस फिल्म से उनका एक खास लगाव इस वजह से भी हैं क्योंकि पहली 'चश्मे बद्दूर' में उनके खास दोस्त राकेश बेदी और रवि बासवानी थे और ये फिल्म बनाते वक़्त उन दिनों की यादें ताज़ा हो गई.

डेविड ये भी मानते हैं कि ये युवा फिल्मों का वक्त है और उन्हें यक़ीन है कि वो इसे बखूबी पेश कर सकते हैं.

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