यमला पगला और दीवाना धर्मेंद्र

धर्मंद्र
Image caption धर्मेद्र के मुताबिक आज के दौर के सभी हीरो ही-मैन है.

अपने ज़माने के सुपरस्टार धर्मेंद्र बहुत जल्द सनी और बॉबी के साथ यमला पगला दीवाना 2 में नज़र आएंगे.

इस फिल्म के प्रमोशन के मौके पर वैसे तो बॉबी देओल भी मौजूद थे लेकिन मीडिया का ध्यान और उनके सवाल धर्मेंद्र के लिए ज़्यादा थे.

अपनी हाज़िरजवाबी के लिए पहचाने जाने वाले धर्मेंद्र ने जहां गुज़रे ज़माने को याद किया,वहीं अपनी शायरी और फलसफों से तालियां भी बटोरी.

पढ़िए धर्मेंद्र के शब्दों में ही उनके कुछ दिलचस्प जवाब :

साठ या सत्तर के दशक में अगर मैं चाहता तो किसी को एक इंच आगे नहीं बढ़ने देता. मैंने इतनी जुबली फिल्में दी है कि पिछले दिनों अख़बार में सोने के रेट पढ़ रहा था तो लगा मैं अभी भी नंबर वन हूं.

हालांकि अब तकलीफ होती है जब देखता हूं कि नंबर वन की दौड़ के चक्कर में हम काम पर ध्यान नहीं दे रहे हैं.

मैं अपने साथियों को मिस करता हूं, शशि कपूर, शम्मी साहब, देव साहब और उन सबको जिनके साथ मैंने काम किया है. युसूफ साहब तो अब बाहर ही नहीं आते. मुझे मूर्ति हमारे कैमरामैन याद आते हैं. लगता है कि काश वो पुराना वक्त रिवाइंड हो जाए.

हमारे वक्त के नटराज और मोहन स्टूडियो तो मेरे लिए मंदिर है. ऐसे ही एक पुराने स्टूडियो में बहुत दिनों बाद मैं शूटिंग कर रहा था.

शाम को जलेबी और भजिया का नाश्ता आया तो मेरी आंखे भर आई. ऐसा लगा जैसे नाश्ते ने मुझसे पूछा और मैंने उससे कि इतने दिन से तुम कहां थे ?

ट्विटर नहीं आता

मैं ट्विटर पर आना चाहता हूं लेकिन अभी तक मुझे सीखना नहीं आया है. यमला पगला दिवाना 2 के प्रोमो के बारे में फिल्म इंडस्ट्री के कई लोगों ने ट्वीट किया. मुझे बहुत अच्छा भी लगा. अमित ने भी प्रोमो देखकर ट्वीट किया. मुझे पता चला कि सबने ट्वीट किया तो मैंने सबको फोन किया,अमित को भी किया तो वो बोला "अरे प्राजी प्रोमो देखकर मज़ा आ गया पाजी, तुस्सी कमाल हो प्राजी."

Image caption धर्मेद्र,सनी और बॉबी की नई फिल्म 'यमला पगला दिवाना 2' है.

इंडस्ट्री में मुझे सबसे प्यार है और सबको मुझसे प्यार है. मैं चाहूंगा कि मैं भी ट्वीटर सीखूं और इन लोगों के लिए ट्वीट करूं.

कौन है ही-मैन

आज के दौर में तो सारे ही-मैन है. अब तो हीरो छ-सात-आठ-नौ पैक भी बनाते हैं.

लेकिन अगर आपने मेरी धरमवीर फिल्म देखी होगी तो गौर कीजिएगा कि उसमें मैं पैक नहीं पेग बनाता था.

इसी बात पर एक शेर अर्ज़ करता हूं - "पी शराब बेहिसाब, ना रक्खा माशूक़ों का हिसाब; संभाला किसे नहीं गिरने किसे दिया, मिला मुझे मेरी वफाओं का सवाब."

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