'सुरों की मल्लिका' शमशाद बेगम नहीं रहीं

शमशाद बेग़म
Image caption शमशाद बेग़म के नाम कई लोकप्रिय गाने हैं

'मेरे पिया गए रंगून' जैसे कई लोकप्रिय गीतों की आवाज़ रहीं शमशाद बेगम का मुंबई में निधन हो गया है.

हिंदी फिल्मों की शुरुआती पार्श्वगायिकाओं में से एक शमशाद बेगम मुंबई में अपनी बेटी और दामाद के साथ रहती थी.

समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए शमशाद की बेटी उषा ने बताया "पिछले कुछ महीनों से उनकी तबीयत ठीक नहीं थी. वो अस्पताल में भर्ती भी थी.

कल रात उनका निधन हो गया. कुछ नज़दीकी दोस्तों की मौजूदगी में उनका अंतिम संस्कार किया गया."

रेडियो से शुरुआत

शमशाद बेगम का जन्म पंजाब के अमृतसर शहर में 14 अप्रैल 1919 को हुआ था. शुरुआती दिनों में उन्होंने पेशावर रेडियो में काम किया था.

उसके बाद उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो के लिए भी गीत गाए. कहा जाता है कि रेडियो पर उनकी आवाज़ सुनकर ही कई संगीत निर्देशकों ने उनसे संपर्क किया.

उनकी समकालीन गायिकाएं गीता दत्त और लता मंगेश्कर से शमशाद की आवाज़ ख़ासी जुदा थी.

बीबीसी से बातचीत में संगीत समीक्षक पवन झा कहते हैं "सबसे बड़ी बात थी शमशाद जी की आवाज़ में खनक थी और ऐसी गूंज थी जो आपको छोड़ती नहीं थी."

पवन के अनुसार "ओ पी नैयर ने ताउम्र लता मंगेश्कर की आवाज़ नहीं ली. उन्होंने शमशादजी को ही अपने गीतों के लिए चुना. वो एक बार कह भी चुके हैं कि मैं जो हूं वो शमशाद के कारण हूं."

सुपरहिट गाने

हिंदी फिल्मों के कई सुपरहिट गाने उनके नाम दर्ज हैं जिन्हें आज के दौर में रिमिक्स भी किया गया है.

40 और 50 के दशक में शमशाद बेग़म के गाए गाने रेडियो पर छाए रहते थे. जैसे 'सी.आई.डी' फिल्म का 'लेके पहला पहला प्यार' और 'कहीं पे निगाहें'.

इसके अलावा 'पतंगा' का 'मेरे पिया रंगून' तो आज भी कई मोबाइल फोन की प्लेलिस्ट में मिल जाएगा.

'बहार' फिल्म से 'सैंया दिल में आना रे' और ' किस्मत' से 'कजरा मोहब्बत वाला' जिसे उन्होंने हीरोइन बबीता के लिए नहीं बल्कि फिल्म के हीरो बिस्वजीत के लिए गाया था.

2009 में शमशाद बेगम को पद्म भूषण पुरस्कार से नवाज़ा गया था.

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