सिनेमा के सौ साल: एक फ़िल्म के शहज़ादे

भाग्यश्री
Image caption भाग्यश्री की फिल्म 'मैंने प्यार किया' सुपरहिट थी

अगर दाल-चावल,रोटी-सब्ज़ी भारतीयों के पेट की भूख मिटाती है तो फ़िल्में उनके मनोरंजन की भूख को शांत करती हैं.

खाने की मेज़ पर फ़िल्मों और फ़िल्मी सितारों का ज़िक्र बड़ी आम सी बात है.

ऐसे में कई बार उन चेहरों को भी याद किया जाता है जिनकी फ़िल्मों में आना बड़ा धांसू रहा लेकिन उसके बाद वो ऐसे ग़ायब हुए कि बस एक फ़िल्म के शहजा़दे बनकर रह गए.

आइए नज़र डालते हैं ऐसे ही पांच चेहरों पर -

कुमार गौरव

सबसे पहला नाम याद आता है अभिनेता कुमार गौरव का.

प्रसिद्ध अभिनेता राजेंद्र कुमार के बेटे कुमार गौरव की पहली फ़िल्म 'लव स्टोरी' सुपरहिट रही लेकिन उसके बाद उनके करियर का ऐसा डिब्बा गुल हुआ कि उनकी पहली सफलता आखिरी बनकर रह गई.

Image caption लव स्टोरी जैसी सफलता कुमार गौरव को दोबारा नहीं मिल पाई

फ़िल्म इतिहासविद् उदया तारा नैयर कहती हैं "रातों रात कुमार गौरव युवाओं के चेहते बन गए, लेकिन उसके बाद राजेंद्र साहब की लाख कोशिशों के बावजूद भी उनकी कोई फ़िल्म हिट नहीं हो पाई."

महेश भट्ट की 'नाम' फ़िल्म को कुमार गौरव की वापसी समझा गया लेकिन उदया के मुताबिक फ़िल्म ने कुमार की जगह संजय दत्त के लिए ज़्यादा काम किया.

हालांकि 2002 में कुमार 'कांटे' फ़िल्म में नज़र आए लेकिन उनकी पहचान लव स्टोरी के हीरो, संजय दत्त के बहनोई और 'वन फ़िल्म वंडर' ही बनकर रह गई.

राजीव कपूर

बॉलीवुड में कपूर परिवार की अहमियत किसी से छुपी नहीं है. पृथ्वीराज कपूर से रणबीर कपूर तक हर पीढ़ी ने फ़िल्मों में भाग्य आज़माया और नाम भी कमाया.

लेकिन परिवार के कुछ ऐसे भी सदस्य थे जिनको कपूर उपनाम काम नहीं आया.

जैसे राज कपूर के बेटे राजीव कपूर जिनकी फ़िल्म 'राम तेरी गंगा मैली' सुपरहिट रही और फ़िल्म में मंदाकिनी के साथ उनकी जोड़ी को भी खूब सराहा गया.

लेकिन सफलता हर किसी को रास नहीं आती, राजीव को भी नहीं आई.

अपने पूरे करियर में कुछ 10-12 फ़िल्में करने के बाद राजीव बड़े पर्दे पर से पूरी तरह गायब हो गए.

राजीव के अलावा शशि कपूर के बेटे कुणाल और करण कपूर का हाल तो इससे भी बुरा रहा जिनके हाथ ज़िक्र करने लायक कोई फ़िल्म नहीं लगी.

भाग्यश्री

फ़िल्म 'मैंने प्यार किया' ने भाग्यश्री का भाग्य ऐसा बदला कि मनमोहन देसाई जैसे निर्देशक अपनी फ़िल्म के लिए भाग्यश्री को मुंह मांगी रक़म देने को तैयार थे.

लेकिन भाग्यश्री ने तो अपनी पहली फ़िल्म के बाद ही शादी का फैसला कर लिया था. साथ ही कह दिया कि जो भी फ़िल्म करेंगी अपने पति हिमालया के साथ करेंगी.

उदया कहती हैं भाग्यश्री का किसी और हीरो के साथ काम ना करने का निर्णय उनके करियर के लिए बहुत घातक सिद्ध हुआ.

बहुत कम ही होता कि निर्माता पति-पत्नी को किसी फ़िल्म में लेने को राज़ी होते हैं. दिलीप कुमार और सायरा बानू ऐसा ही एक नाम हैं लेकिन ज़्यादातर ऑफ स्क्रीन जोड़ी पर्दे पर कमाल दिखाने में कामयाब हो नहीं पाती. भाग्यश्री के साथ भी यही हुआ.

Image caption आशिक़ी में राहुल रॉय और अनु अग्रवाल की जोड़ी को लोगों ने पसंद किया था

बाद में भाग्यश्री ने भोजपुरी,मराठी और दक्षिण भारतीय फ़िल्मों के साथ साथ टेलीविज़न में भी वापसी की और आजकल वो अपने पति के साथ एक मीडिया कंपनी को संभाल रही हैं.

राहुल रॉय - अनु अग्रवाल

आशिक़ी की इस जोड़ी को कैसे भुलाया जा सकता है? 1990 में बनी इस फ़िल्म के हीरो-हीरोइन राहुल और अनु थे जो इस कदर छा गए थे कि किसी ने राहुल की हेयरस्टाइल कॉपी की तो किसी ने अनु के बालों में लगने वाला रिबन.

लेकिन इन दोनों ही कलाकारों ने सफलता का स्वाद चखा ही था कि इनका करियर गुलाटी मारता हुआ नीचे आने लगा.

बीबीसी से एक बातचीत में राहुल ने बताया "आशिक़ी के बाद मुझे 47 फ़िल्मों के ऑफर आए जिसमें से 19 के पैसे मैंने वापिस कर दिए. एक वक्त आया जब मैं एक साथ 27 फ़िल्में कर रहा था जिसके लिए दिन-रात शिफ्ट में काम करना पड़ता था."

राहुल ने तो 23 साल बाद एक बार फिर फ़िल्मों में वापसी का फैसला किया है लेकिन अनु अग्रवाल इंडस्ट्री से पूरी तरह से दूर हैं.

अनु के बारे में पूछने पर राहुल ने बताया "अनु फ़िल्मों से हटकर रहना चाहती थी. मैं उससे मिला नहीं और ना ही मैंने उसे ढूंढने की कोशिश की है. आखिरी बार मुझे पता चला था कि वो आध्यात्म में रुचि ले रही है और मुंबई के बांद्रा इलाके में रह रही है. इसके अलावा उसके बारे में कुछ भी जानने का प्रयास मैंने नहीं किया."

एक फ़िल्म ही सही लेकिन अनु और राहुल की जोड़ी को जिस तरह याद रखा जाता है शायद वही उनकी सबसे बड़ी सफलता है.

विवेक मुश्रान

इलू इलू वाला लड़का याद है आपको ? मनीषा कोइराला के साथ विवेक मुश्रान ने सुभाष घई की फ़िल्म सौदागर में काफी तारीफें बटोरी थी.

दर्शकों के साथ साथ इंडस्ट्री के जानकारों ने भी कहा था कि इस लड़के में कुछ बात है लेकिन दूसरी ही फ़िल्म से ये बात बिगड़ती नज़र आई.

विवेक ने 'राम जाने' और 'फर्स्ट लव लैटर' जैसी फ़िल्में की जिसने उनके करियर में किसी भी तरह की मदद नहीं की.

बाद में विवेक ने टेलीविज़न की तरफ रुख़ कर लिया और वो फिलहाल 'परवरिश' सीरियल में नज़र आ रहे हैं.

और भी जाने पहचाने चेहरे...

Image caption आजकल विवेक मुश्रान टेलीविज़न में नज़र आ रहे हैं

इन नामों के अलावा ऐसे कई और नाम हैं जिनसे अपेक्षा की गई थी कि ये फ़िल्मों में बड़ा नाम करेंगे.

सिनेमा के जानकार जयप्रकाश चौकसे बताते हैं कि 50 के दशक में 'जादू' नाम की फ़िल्म आई थी जिसमें नौशाद ने पहली बार पाश्चात्य संगीत दिया था.

फ़िल्म में नलिनी जयवंत के साथ हीरो सुरेश थे. फ़िल्म बहुत चली लेकिन सुरेश उसके बाद ग़ायब हो गए.

दिलीप कुमार के भाई नासिर खान की बात करते हुए जयप्रकाश कहते हैं कि नासिर की एक फ़िल्म 50 के दशक में आई थी जिसका नाम नगिना था.

ये एक ए सर्टिफिकेट फ़िल्म थी और शंकर जयकिशन का संगीत सुपरहिट हुआ था. फ़िल्म में हीरोइन नूतन थी और ये फ़िल्म काफी चली भी लेकिन नासिर साहब को काम नहीं मिला.

जयप्रकाश बताते हैं कि 'गंगा जमुना' में दिलीप कुमार के साथ नासिर ने वापसी की लेकिन उसके बाद भी उनकी बात नहीं बनी और वो शादी करके पाकिस्तान चले गए.

सुपरहिट फ़िल्म 'दोस्ती' के मुख्य कलाकार सुशील कुमार और सुधीर कुमार का भी यही हाल रहा.

हिंदी सिनेमा के 100 सालों में ऐसे कई और नाम है जिनकी बड़े पर्दे से दोस्ती ज्यादा दिन नहीं चल पाई और किसी ने टीवी की तरफ रुख़ कर लिया तो किसी ने अभिनय को ही अलविदा कह दिया.

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