कान फिल्म महोत्सव: किस बात की खुशी?

सोनम कपूर

हर साल की तरह इस बार भी कान फिल्म महोत्सव की तैयारियां जो़रों पर हैं. अख़बारों में और इंटरनेट पर भारत से जाने वाली फिल्मों और फिल्मी हस्तियों के नाम छप रहे हैं.

पिछले दिनों ख़बर आई थी कि अभिनेत्री अमीषा पटेल की फिल्म 'शॉर्टकट रोमियो' भी कान में दिखाई जाएगी.

अमीषा ने कहा "मेरे लिए गर्व की बात है कि मैं कान में भारतीय सिनेमा का प्रतिनिधित्व कर रही हूं. मैं वहां किसी ब्रांड के लिए नहीं जा रही हूं बल्कि अपनी फिल्म के लिए जा रही हूं जो एक बड़ी बात है."

उधर 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' के नायक नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी की भी तीन फिल्में कान जा रही है और वो कहते हैं कि उन्हें खुशी है कि उनकी फिल्म कान में दिखाई जाएगी.

पहले भी मल्लिका शेरावत और कई कलाकारों ने कहा है कि उन्हें कान का हिस्सा बनने पर नाज़ है.

तो क्या अमीषा, मल्लिका और नवाज़ुद्दीन इन सभी की फिल्मों में कुछ असाधारण या विशेष है या फिर इस समारोह का एक और पहलू भी है जिसे अक्सर ख़बरों और बयानों की भीड़ में नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है ?

फिल्में 'बेचने' जाते हैं

दरअसल अन्य फिल्म फेस्टीवल की तरह कान महोत्सव के दौरान भी फिल्मों का बाज़ार लगता है जहां कोई भी आकर अपनी फिल्म को प्रमोट कर सकता है.

लेकिन अहम बात है कि ये बाज़ार कान फिल्म महोत्सव का हिस्सा नहीं होता बल्कि ये तो उसके आस-पास की मंडी है जहां पैसे देकर किसी भी थिएटर में आप अपनी फिल्म का प्रीमियर कर सकते हैं और उसे अंतर्राष्ट्रीय खरीददार को दिखा सकते हैं अगर कोई दिलचस्पी ले तो.

अमीषा पटेल की 'शॉर्टकट रोमियो' और शर्लिन चोपड़ा की 'कामसूत्र थ्रीडी' भी इसी श्रेणी में आती हैं.

फिल्म समीक्षक इंदू मिरानी कहती हैं, "अगर कोई अपनी फिल्म कहीं बेचने के लिए जा रहा है तो इसमें गर्व करने वाली क्या बात है और ये कैसे सिनेमा का प्रतिनिधित्व हुआ. अमीषा पटेल सिनेमा की नुमाइंदगी किस आधार पर करने की बात कर रही हैं."

इंदू के मुताबिक "इन फिल्मों को न्यौता नहीं दिया गया है, ये तो अपनी मार्केटिंग के लिए खुद जा रहे हैं. वहां बाज़ार में ये लोग इस उम्मीद से अपनी स्टॉल लगाएंगे कि ये फिल्म देखने पर शायद कोई इसे विश्वव्यापी मार्केट के लिए ख़रीद ले."

साधारण शब्दों में कहें तो एक पांच सितारा होटल के पास अगर कोई छोटी सी दुकान खोली जाए तो वो उस होटल का हिस्सा नहीं हो जाएगी लेकिन कई बार बताने वाला कुछ ऐसे बयां करता है कि लगता है जैसे दुकान पांच सितारा होटल में ही है.

बेहतरीन फिल्मों का अड्डा

Image caption बॉम्बे टॉकीज़ की कान फिल्म समारोह में गाला स्क्रीनिंग की जाएगी

ये तो हुई बाज़ार की बात. अब चलते हैं कान फिल्म समारोह के अंदर जहां वास्तव में दुनिया भर की बेहतरीन फिल्मों को न्यौता दिया जाता है जिनमें से कुछ प्रतियोगिता का हिस्सा होती हैं तो कुछ की ख़ास तौर पर स्क्रीनिंग की जाती है.

1946 में बनी 'नीचा नगर' पहली भारतीय फिल्म थी जिसने कान के पहले ही साल में पुरस्कार जीता था.

इसके बाद निर्देशक सत्यजीत रे और बिमल रॉय ने भी कान में भारतीय सिनेमा को पहचान दिलाई.

विश्व सिनेमा के कई बड़े नाम ज्यूरी के रुप में नज़र आते हैं जिसमें इस बार हॉलीवुड निर्देशक स्टीवन स्पीलबर्ग, आंग ली के साथ भारतीय अभिनेत्री विद्या बालन और नंदिता दास जैसे नाम शामिल है.

पिछले दिनों भारतीय सिनेमा के सौ साल पर बनी फिल्म 'बॉम्बे टॉकीज़' को भी कान फिल्म महोत्सव की गाला स्क्रीनिंग के लिए चुना गया है.

इस फिल्म की अवधारणा को रचने वाली आशी दुआ कहती हैं, "ये वाकई में सबसे सम्माननीय फिल्म महोत्सव है. कान में अलग-अलग वर्ग होते हैं. फिल्म का चयन आधिकारिक रुप से मुख्य वर्ग के लिए हुआ है जो बहुत कम हिंदी फिल्मों के साथ होता है. हमारी फिल्म को कान की गाला स्क्रीनिंग में दिखाया जाएगा."

पिछले साल की चर्चित फिल्म 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' भी आधिकारिक रुप से कान के लिए चयनित हुई थी जिसे डायरेक्टर फॉर्टनाइट की श्रेणी में दिखाया गया था.

इस फिल्म के मुख्य कलाकार नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी की तीन फिल्में 'बॉम्बे टॉकीज़','डिब्बा' और 'मॉनसून शूटआउट' कान महोत्सव का हिस्सा है.

नवाज़ुद्दीन बताते हैं कि कान समिति के सदस्य दुनिया भर में घूमते हैं, कई देशों की फिल्में देखते हैं और फिर उनमें से जो उन्हें सही लगती हैं ऐसी फिल्मों को चुनते हैं.

रेड कार्पेट और फिल्मी हस्तियां

इसी समारोह में तशरीफ लाने वालों में ब्रांड एंबेसडर भी शामिल होते हैं. कई फिल्मी हस्तियां अपने ब्रांड के प्रायोजक के बुलावे पर यहां आती हैं.

ऐश्वर्या राय बच्चन का हर साल कान में जाना ऐसा ही एक उदाहरण है क्योंकि वो एक सौंदर्य उत्पाद की ब्रांड एंबेसडर है जो इस समारोह के मुख्य प्रायोजक में से एक है. हालांकि 2002 में ऐश्वर्या अपनी फिल्म 'देवदास' को आधिकारिक रुप से न्यौता मिलने पर शाहरख़ ख़ान के साथ पहुंची थी.

फ्रीडा पिंटो और सोनम कपूर भी एक ब्रांड से जुड़े रहने के कारण कान में उपस्थिति दर्ज देती हैं.

वहीं इस साल कान की कॉम्पीटिशन श्रेणी की पहली फिल्म 'द ग्रेट गैट्सबी' में अतिथि भूमिका निभाने वाले अमिताभ बच्चन भी रेड कार्पेट पर चलेंगे.

दरअसल कान फिल्म समारोह इतना बड़ा नाम है कि दुनिया भर की फिल्मी हस्तियों के लिए इससे जुड़ना एक गर्व की बात है.

बस देखनी वाली बात इतनी है कि कौन किस धागे से जुड़ा है.

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