फिल्म रिव्यू: इश्क़ इन पेरिस

  • 24 मई 2013
इश्क़ इन पेरिस

प्रीति ज़िंटा की ‘इश्क़ इन पेरिस’ प्रेम कहानी है इश्क़ (प्रीति ज़िंटा) और आकाश (रेहान मल्लिक) की, जो पेरिस में शुरू होती है.

('औरंगज़ेब' का रिव्यू)

इश्क़ (प्रीति ज़िंटा) की मां फ्रेंच हैं और पिता भारतीय. वो अपनी मां (इसाबेल अदजानी) के साथ पेरिस में रहती है. उसके माता-पिता में तलाक हो चुका है.

इश्क, एक हंसती खेलती मस्तमौला लड़की है. लेकिन उसे शादी से नफ़रत है. इस दौरान एक बार यात्रा के दौरान उसकी मुलाक़ात आकाश से होती है.

('बॉम्बे टॉकीज़' का रिव्यू)

Image caption फिल्म की लीड होरइन प्रीति ज़िंटा इश्क़ इन पेरिस' की निर्माता भी हैं.

आकाश, एक हिंदुस्तानी लड़का है. वो लंदन में रहता है और उसे भी शादी से नफ़रत है.

इश्क और आकाश की दोस्ती हो जाती है और वो पेरिस में एक दूसरे के साथ ख़ासा टाइम बिताने लगते हैं.

आकाश, इश्क़ के साथ शारीरिक संबंध बनाना चाहता है, लेकिन इश्क के भारतीय संस्कार उसे ऐसा करने की इजाज़त नहीं देते.

(प्रीति ज़िंटा के बचपन की यादें)

हालांकि दोनों मन ही मन एक दूसरे को पसंद करने लगते हैं. लेकिन फिर आकाश को वापस जाना पड़ता है. और दोनों एक दूसरे से दूर हो जाते हैं.

लेकिन किस्मत दोनों को एक दूसरे के करीब फिर से ला खड़ा करती है.

अपने करीबी दोस्त की शादी के सिलसिले में आकाश पेरिस आता है और इश्क़ से फिर मिलता है. दोनों फिर एक दूसरे के क़रीब आते हैं और आखिरकार उनके बीच शारीरिक संबंध बन जाता है.

(शाहरुख खान पर प्रीति ज़िंटा)

आकाश को तब लगता है कि वो इश्क़ से बेहद प्यार करने लगा है और वो उसे शादी का प्रस्ताव देता है. लेकिन अपनी मां-बाप की शादी के बुरे परिणाम से इश्क को विवाह जैसे बंधन से सख़्त एतराज़ है और वो आकाश का प्रस्ताव ठुकरा देती है.

आगे क्या होता है. क्या आकाश और इश्क़ की शादी हो पाती है. क्या इश्क़ अपने पिता से मिल पाती है. यही इसकी कहानी है.

नीरस कहानी

Image caption फिल्म के मुख्य किरदारों के बीच बिलकुल भी केमेस्ट्री नज़र नहीं आती.

प्रीति ज़िंटा और प्रेम सोनी की लिखी कहानी (सहायक लेखक कौसर मुनीर, ख़ालिद आज़मी और राज वर्मा) बहुत ही धीमी गति से आगे बढ़ती है और दर्शकों के धैर्य की परीक्षा सी लेती है.

फिल्म के मुख्य किरदारों के बीच दोस्ती में गर्माहट नज़र ही नहीं आती. उनके बीच की केमेस्ट्री ठंडी नज़र आती है.

(गो गोवा गॉन का रिव्यू)

आकाश, इश्क़ से जब शारीरिक संबंध बनाने की इच्छा व्यक्त करता है, तब तक भी दर्शकों को ऐसा लगता ही नहीं कि उसे इश्क़ से प्यार हो गया है. ये निर्देशन की एक बड़ी चूक थी.

दोनों के बीच के कुछ कॉमिक सीन्स सिर्फ संवादों की वजह से कॉमिक लगते हैं और एक ख़ास दर्शक वर्ग को ही पसंद आएंगे.

दिल को छू नहीं पाती फिल्म

इश्क और आकाश के किरदार बिलकुल भी वास्तविक नहीं लगते. इस वजह से पूरी फिल्म के दौरान दर्शक उनसे जुड़ ही नहीं पाते. इसलिए दर्शकों को इस बात से भी फर्क नहीं पड़ेगा कि आखिर में दोनों मिल पाएंगे या नहीं.

फिल्म की कहानी और स्क्रीनप्ले सुस्त है. रोमांस में दम नहीं है. नाम मात्र की कॉमेडी है और ड्रामा और इमोशन दर्शकों के दिल तक नहीं पहुंच पाते.

प्रीति ज़िंटा और प्रेम सोनी के लिखे संवाद अच्छे हैं लेकिन सिर्फ खास दर्शक वर्ग को ही पसंद आएंगे.

अभिनय

प्रीति ज़िंटा ने अच्छा अभिनय किया है लेकिन कोई कम उम्र की अभिनेत्री इस रोल में ज़्यादा फिट रहती.

रहमान मल्लिक, प्रीति ज़िंटा के सामने बिलकुल नहीं जंचते. प्रीति की मां के रोल में इसाबेल ने अच्छा अभिनय किया है.

चंकी पांडे, छोटे रोल में अच्छे रहे हैं. शेखर कपूर के हिस्से फिल्म में सिर्फ एक सीन आया है. उन्होंने प्रीति के पिता का रोल निभाया है.

निर्देशन

प्रेम राज का निर्देशन ठीक-ठाक है. लेकिन फिल्म किसी भी दर्शक वर्ग को आकृष्ट नहीं कर पाएगी.

साजिद-वाजिद का संगीत साधारण है और गाने भी कोई खास हिट नहीं हो पाए हैं. फिल्म में सलमान खान एक गाने में नज़र आए हैं.

इस गाने की कोरियोग्राफी (मुदस्सर खान) अच्छी है. हां फिल्म मैं कैमरा वर्क ज़रूर अच्छा है.

कुल मिलाकर ‘इश्क इन पेरिस’ एक बेदम लव स्टोरी है. जो बॉक्स ऑफिस पर कोई कमाल नहीं कर पाएगी.

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