गाने, जो आपका मूड बदल दें

  • 25 मई 2013
नौशाद और लता मंगेशकर
(एक रिकॉर्डिंग के दौरान संगीतकार नौशाद के साथ लता मंगेशकर)

रात को आप घऱ में अकेले हैं, किसी बात पर निराश हैं, दूर-दूर तक सन्नाटा पसरा है.

ऐसे में हो सकता है अपने आपको निराशा के घेरे से बाहर लाने के लिए आप कोई गाना सुनें और उसे सुनकर आपके चेहरे पर मुस्कान आ जाए या फिर से जीवन की मुश्किलों से लड़ने का हौसला आ जाए.

आप अपने ऑफिस की किसी बात पर परेशान हैं, गाड़ी से घर चले जा रहे हैं, हो सकता है ऐसी परिस्थिति में किशोर कुमार की 'योडलिंग' आपका मूड ही बदल दे, और आप फिर से चहकने लगें.

(सबसे महानतम गीत)

या ये भी हो सकता है कि दुखी होने पर कोई 'सेड सॉन्ग' ही आपकी हिम्मत बढ़ा दे.

संगीत हम में से कई लोगों की ज़िंदगी का अहम हिस्सा होता है. और हमारी मनोदशा को बदल देने की क़ाबिलियत भी रखता है.

बीबीसी से बात करते हुए कई गीतकारों और गायकों ने माना कि किशोर कुमार के गाने उनमें स्फूर्ति भर देते हैं.

हां, ये ज़रूर हो सकता है कि हर किसी को अलग अलग तरह का संगीत प्रेरणा देता हो.

किसी को किशोर के मस्ती भरे गाने सुनकर ऊर्जा मिलती हो. किसी को रफी के गाने पसंद आते हों तो किसी को मुकेश की आवाज़ सुकून देती हो.

(लता की कहानी)

बीबीसी ने बात की कई मशहूर गीतकारों से, जिन्होंने बताया कि परेशान या निराश होने पर कौन से गाने उन्हें फिर से जीवंत कर देते हैं.

या फिर जब रचनात्मकता (क्रिएटिविटी) के लिहाज से वो कोई नया आयडिया लाने के लिए संघर्ष कर रहे हों तो वो कौन से गाने या संगीत है जिससे उन्हें प्रेरणा और स्फूर्ति मिलती है.

स्वानंद किरकिरे, गीतकार (परिणीता, लगे रहो मुन्नाभाई, 3 इडियट्स)

गीतकार स्वानंद किरकिरे को शैलेंद्र के लिखे सभी गीत बेहद प्रेरणादायी लगते हैं.

शैलेंद्र साहब का कोई भी गाना हो, उसे सुनकर मैं बहुत प्रेरित होता हूं. यूट्यूब पर उसे सुनता हूं और खो जाता हूं.

मौजूदा दौर के गीतकारों में प्रसून जोशी, अमिताभ भट्टाचार्य और इरशाद क़ामिल के गाने बड़ा सुकून देते हैं.

(बदलता दौर बदलते बोल)

अब प्रसून जोशी का गाना 'अपनी तो पाठशाला, मस्ती की पाठशाला' सुन लीजिए. प्रसून ने 'पाठशाला' जैसे शुद्ध हिंदी शब्द को भी कितना मॉडर्न बना दिया.

गुलज़ार साहब के गाने भी मूड बदल देते हैं और अपने आपको तरोताज़ा महसूस करने लगता हूं.

अपना खु़द का लिखा गीत 'बंदे में था दम वंदे मातरम' मुझे बड़ा अच्छा लगता है.

मिथुन, गीतकार (आशिकी 2, मर्डर 2, जिस्म 2)

गीतकार मिथुन को दिवंगत मदनमोहन का संगीत बेहद भाता है. इस तस्वीर में मदनमोहन, लता मंगेशकर के साथ नज़र आ रहे हैं.

संगीतकार मदनमोहन साहब का गाना 'ना हम बेवफा हैं ना तुम बेवफा हो, पर क्या कहें अपनी राहें जुदा हैं ज़माना कहे अपनी राहों में आ जा, मोहब्बत कहे अपनी बाहों में आ जा', ये गाना मुझे बड़ी प्रेरणा देता है.

ये गाना मुझे बताता है कि मैं अपनी प्रोफेशनल लाइफ़ के चक्कर में अपने भावनात्मक रिश्तों को ना उपेक्षित कर दूं. उन पर भी बराबर ध्यान दूं.

इसके अलावा एमएम क्रीम साहब का गाना 'मैंने दिल से कहा, ढूंढ लाना ख़ुशी' भी दिल को छू जाता है. मैं हमेशा इस गीत को सुनकर खो जाता हूं.

इरशाद क़ामिल, गीतकार (जब वी मेट, लव आज कल, रॉक स्टार)

मुझे बशीर बद्र, मेहदी हसन और जगजीत सिंह की ग़ज़लें बहुत भाती हैं. मैं जब भी निराश होता हूं. यही सुनता हूं.

गीतकार इरशाद क़ामिल को जगजीत सिंह की ग़ज़लें, ऊर्जावान लगती हैं.

इसके अलावा साहिर लुधियानवी और मज़रुह सुल्तानपुरी के गाने भी बड़े पसंद हैं.

ओमकारा का गाना 'नैना ठग लेंगे' बड़ी स्फूर्ति देता है. इसके अलावा जब भी मैं दुखी होता हूं या परेशान होता हूं तो मेरा अपना गाना, रॉकस्टार का 'कुनफाया' मुझे ऊर्जा देता है और कुछ करने का जज़्बा प्रदान करता है.

अमिताभ भट्टाचार्य (गीतकार, देव डी, उड़ान, डैल्ही बैली, हीरोइन)

देखिए, जब भी मैं कोई रचनात्मक (क्रिएटिव) काम नहीं कर पाता या परेशान होता हूं तो कभी अपना गाना नहीं सुनता. मैं ऐसा गाना और संगीत सुनता हूं, जो मुझे समझ में ना आए.

गीतकार अमिताभ भट्टाचार्य को फिल्म 'अमर प्रेम' के गाने बेहद पसंद हैं.

इसलिए मैं वर्ल्ड म्यूज़िक सुनता हूं. क्योंकि अपनी भाषा का कोई गाना सुनूंगा तो उसके बोलों का विश्लेषण करने लग जाऊंगा. फिर वो सुकून नहीं मिलता.

इसके अलावा पंचम दा (आर डी बर्मन) की फिल्म 'अमरप्रेम' के गीत बड़े पसंद हैं. ख़ासतौर से किशोर दा का गाया 'कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना' बहुत ही मर्मस्पर्शी गीत है.

रफ़ी साहब का गाना 'तेरे मेरे सपने अब एक रंग हैं' भी इसी श्रेणी में आता है.

ए आर रहमान के संगीत से सजी दिल्ली 6' के गाने भी अध्यात्म का अहसास कराते हैं. इसका 'रहना तू' गाना बड़ा अच्छा लगता है.

समीर (गीतकार, आशिक़ी, दिल, दीवाना, साजन, हम हैं राही प्यार के, रेस, दबंग 2)

गीतकार समीर को, फिल्म 'वो कौन थी' का गाना 'लग जा गले' काफी सुकून देता है.

'क्रांति' का गाना 'ज़िंदगी की ना टूटे लड़ी' और 'वो कौन थी' का 'लग जा गले कि फिर ये हंसी रात हो ना हो', कमाल के गाने हैं.

इन गानों ने मुझे हमेशा निराशा के दौर से निकाला है और दिल को सुकून पहुंचाया है.

(आइटम गर्ल्स की कहानी)

मेरे अपने लिखे गीतों में 'बस एक सनम चाहिए आशिक़ी के लिए' और 'मेरा दिल भी कितना पागल है ये प्यार तो तुमसे करता है' पसंद हैं.

ये तो थे इन गीतकारों के पसंदीदा प्रेरणादायी गीत.

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