फिल्म रिव्यू: ये जवानी है दीवानी

ये जवानी है दिवानी

इस हफ्ते रिलीज़ हुई करण जौहर और यूटीवी द्वारा निर्मित 'ये जवानी है दीवानी'.

ये दो एकदम जुदा लड़का-लड़की के बीच की प्रेम कहानी है. कबीर ठापर उर्फ बनी (रणबीर कपूर) एक बेफिक्र लड़का है जिसका सपना दुनिया घूमना है और जिसे शादी के बंधन में यकीन नहीं है.

वो अपने पिता (फारुख़ शेख़) और सौतेली मां (तन्वी आज़मी) के साथ रहता है.

अवि (आदित्य रॉय कपूर) और अदिति (कल्की केकलां) बनी के सबसे अच्छे दोस्त हैं. अदिति को अवि से प्यार है लेकिन उसने ये बात कभी ज़ाहिर नहीं की.

Image caption रणबीर औऱ दीपिका चार साल बाद इस फिल्म में एक साथ नज़र आ रहे हैं

ये तीनों दोस्त मनाली जाते हैं. नैना (दीपिका पादुकोण) जो बनी के ही स्कूल में पढ़ती थी और अब मेडिकल की पढ़ाई कर रही है एक ब्रेक चाहती है और इसलिए इन तीनों दोस्तों के साथ मनाली के लिए निकल पड़ती है.

ट्रिप के दौरान बनी और नैना एक दूसरे का साथ पसंद करने लगते हैं हालांकि दोनों के बीच ज़रा भी समानता नहीं है. फिर एक दिन नैना, बनी के सामने अपना प्यार जताने वाली होती है लेकिन तभी पता चलता है कि बनी को शिकागो युनिवर्सिटी में छात्रवृत्ति मिल गई है.

अब क्योंकि बनी को घूमने का शौक है इसलिए वो इस मौके को गंवाना नहीं चाहता और शिकागो चला जाता है.

आठ साल बाद बनी अपनी दोस्त अदिति की शादी के लिए भारत लौटता है जहां उसकी मुलाकात दोबारा नैना से होती है.

एक बार फिर पुराना प्यार जागता है लेकिन नैना खुद को आगे बढ़ने से रोक लेती है क्योंकि बनी तो दुनिया घूमना चाहता है लेकिन वो अपने परिवार औऱ क्लीनिक (वो अब डॉक्टर है) को नहीं छोड़ना चाहती.

तो क्या नैना अपने प्यार का इज़हार बनी के सामने कर पाती है ? ज़िंदगी को लेकर एकदम अलग विचार रखने वाले दो लोग एक साथ खुशी-खुशी रह पाएंगे ?

दिलचस्प और खूबसूरत कहानी

अयान मुखर्जी की कहानी अच्छी है और दो अलग सोच के लोगों का एक दूसरे के प्रति आकर्षण बहुत ही खूबसूरती से दिखाया गया है. पटकथा एकदम ताज़ा औऱ दिलचस्प तरीके से लिखी गई है. चार दोस्तों के बीच की कैमेस्ट्री और उनके चुकटुले दोनों ही दर्शकों को शुरु के एक घंटे बांधे रखते हैं.

बनी की स्कॉलरशिप के बाद कहानी में अच्छा ट्विस्ट आता है. इंटरवेल के बाद अदिति की शादी का उत्सव दर्शकों को बांधे रखता है. फिल्म में किसी भी तरह का मैलोड्रामा नहीं है जिससे शायद कुछ लोगों को निराशा हो लेकिन युवा दर्शक इसे पसंद कर सकते हैं.

फिल्म कुछ जगह अपनी रफ्तार खोती है लेकिन कुछ सीन बेहद मनोरंजक बन पड़े हैं. मनाली में दोस्तों की मस्ती और एक एक्शन सीक्वेंस. तीन बढ़िया गाने औऱ बढ़िया नृत्य निर्देशन.

नैना का एक पढ़ाकू लड़की से जीवंत लड़की बनना या फिर बनी और नैना के बीच भावुक क्षण, ऐसे कई सीन है जो आपको बांधे रखते हैं.

जानदार डायलॉग

हुसैन दलाल के संवादों ने पूरे ड्रामे में जान डाल दी है. संवाद लेखक ने अयान मुखर्जी की कहानी में अपने युवा और समकालीन डायलॉग से खूबसूरती बढ़ा दी है.

रणबीर कपूर की जादूगरी फिर चल गई. फिल्म में रणबीर अच्छे दिखे हैं, अभिनय अच्छा है और डांस भी ऐसा किया है कि दर्शकों का दिल जीत लें. इस नए सुपरस्टार के लिए एक और अवार्ड इंतज़ार कर रहा है.

दीपिका का अभिनय भी बढ़िया है. नैना के किरदार में उन्होंने बहुत सारी परतें जोड़ी है जो उनके रोल को दिलचस्प बनाता है. आदित्य एकदम सहज अभिनय करते हैं और कल्की ने अपने यादगार अभिनय से सबको चौंका दिया है.

माधुरी दीक्षित ने 'घाघरा' गाने में अपने डांस से चार चांद लगा दिए हैं. कास्टिंग निर्देशक नंदिनी श्रीकेंत ने वाकई में फिल्म के लिए उपयुक्त कलाकार तलाशे हैं.

परिपक्व निर्देशन

अयान मुखर्जी के निर्देशन में संजीदगी औऱ परिपक्वता है. अगर हल्के फुल्के सीन मज़ेदार हैं तो संजीदा दृश्यों में गहराई भी है.

कई जगह उन्होंने मामले को बिना समझाए छोड़ दिया औऱ फिर उसे कहीं किसी और सीन में पूरा किया. ऐसे में दर्शक अपना अंदाज़ा लगा लेते हैं लेकिन बाद में उन्हें पता चलता है कि बात तो कुछ और है जैसे अवि का बनी पर गुस्सा होना और फिर कहीं बाद में उसके गुस्से के कारण का खुलासा करना.

प्रीतम का संगीत फिल्म का एक बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है. 'बलम पिचकारी' और 'बद्तमीज़ दिल' सुपरहिट गाने हो चुके हैं और रेमो डी सूज़ा द्वारा नृत्य निर्देशन ने गाने को और अच्छा बना दिया है.

वी मनीकंगन का छायांकन बहुत अच्छा है और फिल्म के सेट भी देखने लायक है. अकिव अली का संपादन प्रशंसनीय है.

कुल मिलाकर 'ये जवानी है दीवानी' एक बेहद ही मनोरंजक फिल्म है जिसमें ड्रामा है, हास्य है, संगीत है और बहुत अच्छा अभिनय है.

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