फिल्म रिव्यू: यमला पगला दीवाना-2

यमला पगला दीवाना-2

सनी साउंड्स प्राइवेट लिमिटेड के बैनर तले बनने वाली यमला पगला दीवाना 2, साल 2011 में आई यमला पगला दीवाना का सीक्वल है.

(यमला पगला दीवाना का म्यूज़िक लॉन्च)

धरम (धर्मेंद्र) के दो बेटे हैं. परमवीर (सनी देओल) और गजोधर (बॉबी देओल). बड़ा बेटा परमवीर लंदन में एक अच्छी ज़िंदगी गुजर बसर कर रहा है, वहीं छोटा बेटा गजोधर और धरम वाराणसी में ठगी का धंधा करते हैं.

(पढ़िए ये जवानी है दीवानी का रिव्यू)

वो यूके से आए सर योगराज खन्ना (अन्नू कपूर) से मिलते हैं, उन्हें लगता है कि वो एक करोड़पति आदमी हैं. धरम, योगराज के क़रीब जाने के लिए एक तरकीब भिड़ाता है और गजोधर को उसकी बेटी से नज़दीकी बढ़ाने को कहता है.

Image caption सनी, बॉबी और धर्मेंद्र तीनों ने बेकार अभिनय किया है.

गजोधर अपना नाम बदलकर प्रेम रख लेता है और योगराज की बेटी सुमन (नेहा शर्मा) से रोमांस करता है.

अपनी इसी साज़िश को अंजाम देने के लिए धरम और गजोधर लंदन भी पहुंच जाते हैं. जहां वो परमवीर से मिलते हैं. तब परमवीर को लगता है कि उसका भाई और पिता ज़रा भी नहीं बदले हैं और अब भी लोगों को ठगते रहते हैं.

जल्द ही धरम और गजोधर को झटका लगता है जब खन्ना उन्हें बताता है कि सुमन उनकी गोद ली हुई बेटी है. और उसकी असल बेटी रीत (क्रिस्टीना अखीवा) है. अब धरम, गजोधर को रीत के क़रीब जाने को कहता है. लेकिन रीत को परमवीर पसंद आ जाता है.

आगे क्या होता है. क्या गजोधर और धरम अपने इरादों में कामयाब हो जाते हैं. क्या परमवीर अपने भाई और पिता को सही रास्ते में ला पाता है. यही फिल्म की कहानी है.

(धर्मेंद्र का फिल्मी सफर)

बचकानी कहानी

फिल्म को कॉमेडी बनाने की कोशिश की गई है. लेकिन अफसोस, शायद ही कोई सीन हो जो आपको हंसा पाए.

Image caption फिल्म की कहानी बचकानी है और कई दृश्य फूहड़ हैं.

फिल्म की कहानी लिंडा देओल ने लिखी है जो बहुत कमज़ोर और बिखरी हुई है.

कहानी में कई सबप्लॉट हैं जो दर्शकों को और भ्रमित कर देते हैं. स्क्रीनप्ले भी बचकाना है. कंटीन्युटी का ज़रा भी ध्यान नहीं रखा गया है.

फूहड़ दृश्य

परमवीर (सनी देओल) का नशे में झूमने वाला दृश्य बेहद शर्मनाक है. धर्मेंद्र और बॉबी देओल के बीच के कई सीन भी बचकाने हैं. अनुपम खेर का चरित्र ठीक से गढ़ा भी नहीं गया है और दर्शकों को ये करिदार झटका सा देता है.

एक दृश्य में प्रेम (बॉबी देओल) अपनी ही फिल्मों के नाम बोलता है. ये दृश्य भी फूहड़ बन पड़ा है.

फिल्म में रोमांस का नामोनिशान नहीं है. कॉमेडी बहुत कमज़ोर है. इमोशन नाम की चीज़ नहीं है. कुछेक एक्शन दृश्यों के अलावा फिल्म में कुछ भी देखने लायक नहीं है. जसविंदर सिंह के लिखे संवाद भी बेकार हैं.

बेकार अभिनय

धर्मेंद्र ने बेहद साधारण अभिनय किया है. सनी देओल अपने चिर परिचित अंदाज़ में बिलकुल भी नहीं दिखे. बल्कि कुछ दृश्यों में तो उन्होंने अपने आपको ही शर्मसार किया है.

बॉबी देओल भी बिलकुल नहीं जमे. कई दृश्यों में तो ऐसा लगा कि वो काम ख़त्म करके घर जाने की जल्दी में हैं.

(सनी ने धर्मेंद्र को क्या तोहफा दिया)

नेहा शर्मा ठीक-ठाक हैं. नवोदित क्रिस्टीना अखीवा सुंदर लगी हैं. उन्होंने अभिनय भी ठीक किया है.

Image caption फिल्म का ज़बरदस्त प्रचार किया गया था, लेकिन इसके कामयाब होने के आसार कम ही हैं.

अन्नू कपूर और जॉनी लीवर जैसे सितारे भी असर पैदा नहीं कर पाए हैं.

कमज़ोर निर्देशन

संगीत सिवान का निर्देशन बिलकुल बेकार और बचकाना है. उन्होंने स्क्रिपट राइटर के साथ मिलकर इतना बचकाना ड्रामा रचा है कि शुरुआत में ही दर्शकों कान फिल्म से उचट जाता है. शारिब-तोषी का संगीत ज़रूर अच्छा है.

कुल मिलाकर यमला पगला दीवाना-2, एक ठंडी फिल्म है. बॉक्स ऑफिस पर ये फिल्म बहुत बुरा प्रदर्शन करेगी.

फिल्म के निर्माता इसके वितरण अधिकार अच्छी कीमत में पहले ही बेच चुके हैं. साथ ही उन्हें ब्रिटेन में शूटिंग करने के लिए वहां की सरकार ने ख़ासी सब्सि़डी भी दी. इस वजह से उन्हें तो मुनाफा हो गया होगा लेकिन दुनिया भर में फिल्म के वितरकों को ज़बरदस्त नुकसान झेलना पड़ेगा.

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