मौत से पहले क्यों अकेले रह गए थे आर डी बर्मन?

आशा भोसले और आरडी बर्मन
Image caption एक रिकॉर्डिंग के दौरान आशा भोसले के साथ आरडी बर्मन

60 के दशक से 80 के दशक तक कई सुपरहिट गीत रचने वाले और तत्कालीन फिल्मी संगीत की हर परंपरा को चुनौती देकर कामयाबी के नए कीर्तिमान रचने वाले राहुलदेव बर्मन यानी आर डी बर्मन उर्फ पंचम दा अपने आखिरी दिनों में बिलकुल अकेले पड़ गए थे.

(गुलज़ार की यादों में आर डी बर्मन)

मौत के वक़्त बस चुनिंदा दोस्त ही उनके आस-पास थे.

इतनी कामयाबी पाने के बावजूद, संगीत और फिल्म जगत के कई नामचीन लोगों के इतने क़रीबी होने के बाद भी ऐसा क्यों हुआ? आर डी बर्मन हर निर्माता की पहली पसंद हुआ करते थे तो आख़िर क्यों उनको काम मिलने में मुश्किलें पेश आने लगीं?

(संगीत बिरादरी ने याद किया पंचम दा को)

डॉक्यूमेंट्री 'पंचम अनमिक्स्ड' में कई नामचीन गायकों, संगीतकारों, कलाकारों और आर डी बर्मन के क़रीबी लोगों ने इसकी कई वजहें बताई हैं.

'पंचम अनमिक्स्ड' को ब्रह्मानंद सिंह ने बनाया है और इसे राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुका है.

Image caption अपने सहयोगियों को कुछ समझाते आरडी बर्मन (सबसे दाएं)

अभिनेता शम्मी कपूर ने आर डी बर्मन के बारे में कहा था, "हर एक शख़्स की ज़िंदगी में उतार-चढ़ाव आते हैं लेकिन पंचम अपने उतार से अच्छी तरह से निपट नहीं पाए."

शम्मी कपूर की फिल्म 'तीसरी मंज़िल' में आर डी बर्मन ने बेहतरीन संगीत दिया था और इसके सारे गाने सुपरहिट हुए थे. इसी फिल्म के बाद से फिल्म इंडस्ट्री में आर डी बर्मन के नाम की धूम मच गई.

(जावेद अख़्तर की यादों में आर डी बर्मन)

आर डी बर्मन के क़रीबी दोस्त और गीतकार जावेद अख़्तर कहते हैं, "हमारे यहां टैलेंट की कोई कद्र नहीं होती. बस वर्तमान देखा जाता है. इसी सोच की वजह से हमने आर डी जैसे जीनियस को खो दिया."

नहीं देख पाए 'आख़िरी कामयाबी'

80 के दशक में कुछ नाकामयाबी हाथ लगने के बाद आर डी बर्मन को फिल्में नहीं मिल रहीं थीं.

(पंचम की धुनों का जादू)

काफी लंबे समय बाद 90 के दशक की शुरुआत में उन्हें विधु विनोद चोपड़ा की फिल्म '1942 अ लव स्टोरी' में संगीत देने का मौका मिला.

फिल्म के सारे गाने सुपरहिट साबित हुए लेकिन अफ़सोस कि इसकी कामयाबी देखने के लिए ख़ुद आर डी बर्मन ज़िंदा नहीं थे. वो अपनी 'आख़िरी सफलता' को देखने से पहले ही दुनिया से विदा हो चुके थे.

चार जनवरी 1994 को 55 साल की आयु में उनका निधन हो गया था.

फिल्म के गीत लिखने वाले जावेद अख़्तर कहते हैं, "पंचम एक ऐसा शख़्स था, जिसने अपने आपको संगीत का बादशाह साबित किया. फिर उससे वो ताज छिन भी गया लेकिन उसने '1942' में शानदार संगीत देकर फिर से साबित कर दिया कि साहब संगीत का शहंशाह तो वही है. अफसोस कि उस बादशाह की जान तख्त पर दोबारा बैठने से पहले ही निकल गई."

(लता और आशा साथ-साथ)

गायक भूपिंदर कहते हैं, "बड़े दुख की बात है कि वो आदमी एक वक़्त ढेर सारे दोस्तों से घिरा रहता था लेकिन अपने आख़िरी दिनों में बिलकुल अकेला रह गया था."

बेमिसाल पंचम

आर डी को क़रीब से जानने वाले लोग बताते हैं कि शुरुआत से ही उनमें विलक्षण प्रतिभा थी. उन्होंने अपने पिता एसडी बर्मन (सचिनदेव बर्मन) के कई गानों को रिकॉर्ड किया लेकिन क्रेडिट नहीं लिया.

Image caption अपने क़रीबी दोस्त गुलज़ार के साथ आर डी बर्मन

आर डी बर्मन की पत्नी और मशहूर गायिका आशा भोंसले बताती हैं, "मैंने एक बार पंचम से पूछा कि तुम अपना नाम क्यों नहीं लेते. तो वो बोले, कोई बात नहीं. पिताजी के लिए ही तो काम कर रहा हूं. मेरा नाम ना भी आए तो क्या फर्क पड़ता है."

(आशा की फिल्मी पर्दे पर पारी)

आशा भोंसले ने एक मज़ेदार वाकया बताया. एसडी बर्मन के बीमार पड़ने के बाद जब आर डी बर्मन निर्माताओं के पास अपना संगीत लेकर जाते तो वो निर्माता उनसे कहते, "यार पंचम, तुम्हारे संगीत में वो बात नहीं जो तुम्हारे पिता के संगीत में हुआ करती थी. कुछ और सुनाओ."

ऐसा ही कुछ जब उनसे फिल्मकार शक्ति सामंत ने कहा तब आर डी ने चुपके से आशा भोंसले से कहा, "अब मज़ा देखना." फिर शक्ति सामंत से उन्होंने कहा, "मेरे पिताजी ने एक ट्यून बनाई थी. जो इस्तेमाल नहीं हो पाई. वो सुनाऊं क्या." शक्ति सामंत ने कहा, "फौरन सुनाओ."

तब आर डी ने अपने पिता का नाम लेकर अपनी ख़ुद की ही ट्यून सुना दी. जिसे सुनने के बाद शक्ति सामंत बोले, "वाह-वाह. क्या बात है. मैंने कहा था ना कि तुम्हारे पिता की बात ही अलग थी."

(किशोर कुमार की मुरीद आशा भोसले)

शम्मी कपूर बताते हैं कि 'गाइड' और 'आराधना' का संगीत एसडी बर्मन ने दिया था लेकिन 'गाता रहे मेरा दिल' और 'कोरा काग़ज़ था ये मन मेरा' जैसे गाने पंचम ने रिकॉर्ड किए थे.

बैचेन रहते थे आर डी

Image caption 27 जून को आर डी बर्मन की 74वीं वर्षगांठ है.

आर डी बर्मन के एक और क़रीबी दोस्त गुलज़ार के मुताबिक़, "फिल्म 'इजाज़त' का गाना 'मेरा कुछ सामान तुम्हारे पास पड़ा है' जब मैं उन्हें सुना रहा था तो पंचम को लगा कि मैं उसे कोई सीन सुना रहा हूं. जब मैंने बोला ये गीत है, तो वो कॉपी मेरी तरफ ढकेलता हुआ बोला, कल को तुम कोई न्यूज़पेपर लेकर आ जाओगे और कहोगे कि चलो गाना बनाओ."

(लता मंगेशकर ने क्यों नहीं की शादी)

गुलज़ार ने बताया कि आर डी बर्मन बेहद उतावले इंसान थे. जब वह संगीत रच रहे होते थे तो काफी बैचेन रहते थे. अगर उस वक़्त उन्हें गर्मागर्म चाय पेश की जाती तो वह उसके ठंडा होने का इंतजा़र भी ना करते. पानी में डालकर उसे पी जाते.

लेकिन इतने उतावले होने के बाद भी उनके संगीत में एक ठहराव था.

आर डी बर्मन के लिए कई गाने गा चुके अमित कुमार से एक बार आर डी ने ख़ुद कहा था, "यार. मेरे पास ढेर सारे आयडिया हैं लेकिन कोई मुझे समझ ही नहीं पाया. मैंने अभी तक कुछ किया ही नहीं है."

('पंचम अनमिक्स्ड' के निर्माता ब्रह्मानंद सिंह के सौजन्य से)

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