आरडी बर्मन के 15 यादगार गाने

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Image caption एक रिकॉर्डिंग के दौरान आशा भोसले के साथ आरडी बर्मन

प्यार से पंचम दा कहलाने वाले आर डी बर्मन की वर्षगांठ के मौके पर संगीत समीक्षक पवन झा बता रहे हैं उनकी पसंद के 15 यादगार गाने जिन्हें आर डी बर्मन ने संगीतबद्ध किया है.

1. घर आजा घिर आई बदरिया सावरिया. फिल्म: छोटे नवाब

ये गाना लता मंगेशकर ने गाया है. गाना मुजरा शैली में है. इसमें पंचम दा ने क्लासिकल और सेमी क्लासिकल बेस लिया है. गाने में मेलोडी को बहुत अहमियत दी है. गाने को शैलेंद्र ने लिखा है.

(क्यों अकेले रह गए थे आर डी बर्मन)

2. मार डालेगा दर्दे जिगर. फिल्म: पति पत्नी

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Image caption आरडी बर्मन, आशा भोसले और गुलज़ार

ये गाना आशा भोंसले ने गाया था. इस गाने में ब्राज़ीलियाई बोसानोवा बीट इस्तेमाल की थी. गाना बेहद प्रयोगधर्मी है. आशा जी भी इसे बहुत चुनौतीपूर्ण गाना मानती हैं. आनंद बक्शी के बोल बेहद अच्छे हैं.

3. दइया ये मैं कहां आ फंसी. फिल्म: कारवां

इस गीत में हास्य का जो माहौल पंचम ने पैदा किया है वो कमाल का है. उसके लिए उन्होंने आर्केस्ट्रा का बेहतरीन इस्तेमाल किया है. अहम बात तो ये है कि हास्य पैदा करने के चक्कर में उन्होंने आपा नहीं खोया. अपनी कल्पनाशीलता का इस्तेमाल किया जो क़ाबिल-ए-तारीफ है.

( संगीत बिरादरी ने याद किया आर डी बर्मन को)

4. चुनरी संभाल गोरी. फिल्म: बहारों के सपने

पंचम दा को श्रेय दिया जाता है भारतीय गीतों में पश्चिमी धुनों का इस्तेमाल करने के लिए लेकिन उन्होंने अपने संगीत में भारतीय लोक संगीत का भी बेहतरीन समावेश किया है.

(गुलज़ार की यादों में पंचम)

इस गीत में जो उन्होंने पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के लोक संगीत का वातावरण रचा है और मन्ना डे और लता मंगेशकर ने इसे जिस तरह से गाया है वो काफी मज़ेदार बन पड़ा है. गाने को मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखा है.

5. पल दो पल का साथ हमारा. फिल्म: द बर्निंग ट्रेन

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Image caption आरडी बर्मन ने अपने गानों में पश्चिमी धुनों के साथ-साथ लोक संगीत का भी इस्तेमाल किया.

ये बेहतरीन क़व्वाली है. इसे मोहम्मद रफ़ी और आशा भोंसले ने शानदार तरीके से गाया है. गाने का फिल्मांकन भी ज़बरदस्त है.

6. अ आ इ ई मास्टर जी की आ गई चिट्ठी. फिल्म: किताब

इस गाने में आर डी बर्मन ने क्लासरूम का बेहतरीन माहौल पैदा किया है. गुलज़ार के लिखे इस गाने में उन्होंने कक्षा की डेस्क का इस्तेमाल ध्वनि पैदा करने के लिए किया है. गाने को पद्मिनी कोल्हापुरे और शिवांगी कोल्हापुरे ने गाया है जो उस वक़्त बच्ची थीं.

7. कुछ तो लोग कहेंगे लोगों का काम है कहना. फिल्म: अमर प्रेम

इस गीत में समाज के परंपरागत नियमों को चुनौती दी गई है. गाने में फिलॉसफी भी है और कटाक्ष भी. आनंद बक्शी के बोलों को ख़ूबसूरती से पंचम ने संगीत में पिरोया है. किशोर कुमार ने भी गाना डूब कर गाया है. आर डी के संगीत में भी एक कटाक्ष का भाव पैदा होता है जो गाने को और ख़ूबसूरत बना देता है.

(आर डी बर्मन पर जावेद अख़्तर )

8.मेरा कुछ सामान तुम्हारे पास पड़ा है. फिल्म: इजाज़त

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Image caption हरे रामा हरे कृष्णा के गाने दम मारो दम में आरडी बर्मन ने उस वक़्त के युवाओं की भावनाओं को व्यक्त किया था.

गुलज़ार के गीतों के बोल काफी आज़ाद किस्म के हुआ करते थे. उन्हें संगीत में पिरोना थोड़ा जटिल हुआ करता था लेकिन इस गीत में क्या ख़ूब काम किया है आर डी बर्मन ने. आशा भोंसले की आवाज़ दिल को छू जाती है.

9. एक ही ख़्वाब कई बार देखा है. फिल्म: किनारा

ये गाना भी गुलज़ार ने लिखा है. गाने को संगीतब्द्ध करना काफी कठिन था लेकिन आर डी ने जिस तरीके से काम किया है वो ज़बरदस्त है. गाने में सिर्फ गिटार का इस्तेमाल हुआ है.

10. तेरे बिना ज़िंदगी से कोई शिकवा तो नहीं. फिल्म: आंधी

आर डी बर्मन के वैसे तो अनगिनत रोमांटिक गाने हैं. उनमें से एक को चुनना बेहद मुश्किल है. लेकिन मेरा सबसे पसंदीदा गाना यही है. गुलज़ार के लिखे इस गाने में कितनी ख़ूबसूरती से रिश्तों के ताने-बाने को व्यक्त किया गया है. गाने में उतनी ही ख़ूबसूरती से संवाद भी पिरोए गए हैं. लता मंगेशकर और किशोर कुमाप ने उसे बहुत अच्छे सरीके से गाया भी है.

(जलवा बरकरार है आर डी बर्मन का)

11. चांद मेरा दिल (मेडले). फिल्म: हम किसी से कम नहीं

इस गीत में 5-6 छोटे छोटे गीत पिरोए गए हैं. जैसे चांद मेरा दिल, आ दिल क्या महफिल और तुम क्या जानो मोहब्ब्त क्या है वगैरह.

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Image caption आरडी बर्मन ने क्लासिकल धुनों का भी बेहतरीन इस्तेमाल किया.

गाने में दो लोगों के बीच मुक़ाबला चल रहा है. पैरों को थिरकने पर मजबूर कर देने वाला संगीत है. गीत में काफी ताज़गी और जुनून है.

12. दम मारो दम. फिल्म: हरे रामा कृष्णा

आर डी बर्मन के इस गाने में उस समय के युवा वर्ग को बेहतरीन तरीके से रिप्रजेंट किया गया है. गाने में 70 के दशक का वो खुलापन है. उस समय का युवा जो करवट ले रहा था उसकी बानगी इस गाने में दिखती है. गाने में क्रांति के तेवर हैं लेकिन इसके बाद भी पंचम के संगीत में शोर नहीं है. उन्होंने गाने में संगीत को छोड़ा नहीं है. इसे आनंद बक्शी ने लिखा है.

13. क़तरा-क़तरा. फिल्म: इजाज़त

गुलज़ार के लिए इस गाने को पंचम दा ने दो अलग-अलग ट्रैक पर दो अलग-अलग वक़्त रिकॉर्ड किया. फिर दोनों ट्रैक एक दूसरे में इस कदर पिरोए गए हैं कि पूरा गीत एक सम्मिलित रचना सुनाई पड़ता है. गाने में एको का ज़बरदस्त इफ़ेक्ट है. ये पंचम की रिकॉर्डिंग के बाद की कलाकारी थी.

14 ज़िंदगी के सफर में गुज़र जाते हैं जो मुक़ाम. फिल्म: आपकी कसम

गाने में नोस्टेल्जिया का ज़बरदस्त प्रभाव पैदा किया गया है. आनंद बक्शी के बोलों को आर डी बर्मन ने बेहतरीन संगीत से सजाया है. किशोर कुमार ने इसे गाया भी ज़बरदस्त है. ये उनके सर्वश्रेष्ठ गीतों में से एक है.

15. रैना बीती जाए रे. फिल्म: अमर प्रेम

लता मंगेशकर ने ये क्लासिकल गाना गाया है. इस गाने से पंचम दा ने साबित किया कि वो कितना विविधतापूर्ण संगीत दे सकते हैं.

इस गाने को जब मशहूर संगीतज्ञ मदन मोहन ने सुना तो उनको लगा कि इसे एसडी बर्मन (आर डी बर्मन के पिता) ने रचा है. उन्होंने सचिन दा को फोन करके कहा, "आपका गाना रैना बीती जाए रे सुना. बहुत ही बढ़िया लगा." तब एसडी बर्मन ने जवाब दिया, "अरे वो मैंने नहीं बनाया है. वो पंचम का संगीतबद्ध किया गाना है."

मेरे हिसाब से मदन मोहन के उस गीत को सचिन दा का गीत समझना ही पंचम के लिए सबसे बड़ा कॉम्प्लीमेंट था.

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