फिल्म रिव्यू: घनचक्कर

  • 28 जून 2013
घनचक्कर
Image caption घनचक्कर में इमरान हाशमी और विद्या बालन की मुख्य भूमिका है.

यूटीवी मोशन पिक्चर्स की फिल्म 'घनचक्कर' कहानी है एक बैंक में हुई लूट और उसके बाद हुई घटनाओं की.

संजय आत्रे (इमरान हाशमी), नीतू (विद्या बालन) का पति है. वो पंडित (राजेश शर्मा) और इदरीस (नमित दास) की एक 30 करोड़ रुपए की लूट में मदद करता है.

(कैसी है 'रांझणा')

तीन महीने बाद इसके लूटी हुई रकम के बंटवारे की बात होती है. संजय, को लूटी हुई रकम को हिफाज़त से रखने की ज़िम्मेदारी सौंपी जाती है.

लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब संजय की याददाश्त चली जाती है. वो इस लूट के साथ-साथ पंडित और इदरीस के बारे में भी सब भूल चुका होता है. वो ये भी भूल जाता है कि लूट के पैसे उसने कहां रखे हैं.

(रिव्यू: फुकरे)

पहले तो पंडित और इदरीस को यक़ीन ही नहीं आता कि संजय की याददाश्त जा चुकी है. लेकिन जब उन्हें थोड़ा थोड़ा विश्वास आता है तो वो दोनों संजय के घर पर ही शिफ्ट हो जाते हैं ताकि वो उसकी हर हरकत पर नज़र रख सकें.

संजय भी इस बीच भरसक याद करने की कोशिश करता है कि रुपयों से भरा बैग उसने कहां रखा है. इस दौरान वो अपने दोस्त उत्तम नागपाल (प्रवीण डबास) से मिलता है.

संजय को शक है कि उसने उत्तम के पास अपने पैसे रख छोड़े थे और उत्तम ने वो सारे पैसे खर्च कर दिए.

(कैसी है 'ये जवानी है दीवानी')

उसका शक और गहरा हो जाता है जब उत्तम उसे बिना बताए लंदन चला जाता है. संजय को ये भी शक़ है कि उसकी पत्नी नीतू और दोस्त उत्तम के बीच एक सीक्रेट अफेयर चल रहा है.

Image caption विद्या बालन ने हास्य पैदा करने की असफल कोशिश की है.

इस दौरान संजय के पास बार-बार एक अज्ञात नंबर से फोन आता है जिसमें उससे पैसों की जानकारी मांगी जाती है.

संजय को फोन करने वाला कौन होता है? पंडित और इदरीस के बीच क्या संबंध है? 30 करोड़ रुपयों से भरा बैग कहां रखा है?

क्या संजय की याददाश्त वाकई जा चुकी है या वो पंडित और इदरीस को लूट का हिस्सा नहीं देना चाहता?

क्या नीतू पैसों के बारे में सब जानती है? क्या उसका अपने पति के दोस्त के साथ वाकई कोई अफेयर चल रहा है? यही आगे फिल्म की कहानी है.

ढीला स्क्रीनप्ले

परवेज़ शेख की ये कहानी बचकानी है. ये एक कमज़ोर बुनियाद पर टिकी है. फिल्म की शुरुआत में कॉमेडी है लेकिन बाद में ये सस्पेंस और खून खराबे से भरपूर हो जाती है.

(बॉलीवुड की हलचल)

परवेज़ शेख और राजकुमार गुप्ता का लिखा स्क्रीनप्ले धीमा और लंबा खींचा गया लगता है. फिल्म के कई सीन इतने लंबे और उबाऊ हैं कि उनमें हंसी ही नहीं आती. बल्कि दर्शक एक सीमा के बाद खीझने लगते है.

Image caption फिल्म का स्क्रीनप्ले काफी खींचा लगता है. फिल्म दर्शकों को हंसाने में नाकामयाब साबित होती है.

कई बातें समझ में नहीं आतीं. जैसे पंडित और इदरीस 30 करोड़ रुपए से भरा बैग संजय के पास रखवाने को क्यों तैयार हो जाते हैं. संजय का सूटकेस कहां रखा है, ये याद करने की कोशिश करने वाले कई दृश्य भी बहुत विश्वसनीय नहीं लगते.

साथ ही संजय की पत्नी नीतू का बिलकुल बिंदास और निश्चिंत रहना भी गले नहीं उतरता वो भी तब जब पंडित और इदरीस उसके पति को जान से मारने की धमकी देते हैं. नीतू का ये बरताव समझ से परे था.

हास्य की कमी

कई जगह हास्य पैदा करने की कोशिश करने वाले सीन बिलकुल भी असरदार नहीं बन पड़े हैं. जैसे एक दृश्य में जब इदरीस अपनी गर्लफ्रेंड से फोन पर सेक्स की बातें करता है. ये सीन बिलकुल भी प्रभाव पैदा नहीं कर पाया है.

नीतू (विद्या बालन) के ड्रेसेस ज़रूर हास्यास्पद हैं लेकिन ये काफी नहीं था. कम से कम ये बात इतनी हास्यजनक तो नहीं थी कि दर्शक लोटपोट हो जाएं.

अभिनय

Image caption विद्या बालन के ड्रेस ज़रूर हास्यास्पद हैं.

इमरान हाशमी ने अच्छा अभिनय किया है. लेकिन उनके प्रशंसकों को निराशा हाथ लगेगी क्योंकि वो अपने चहेते कलाकार को ऐसा रोल करते नहीं देखना चाहेंगे.

विद्या बालन ने ईमानदारी से अपने रोल को करने की कोशिश की है लेकिन वो असर नहीं छोड़ पाई हैं.

उनका बार-बार 'हैं बोलना खासा अखरता है. उनका रोल कॉमेडी है लेकिन वो अपने अभिनय से हास्य पैदा नहीं कर पाई हैं.

प्रवीण डबास भी अपने रोल में साधारण रहे हैं.

निर्देशन

राजकुमार गुप्ता का निर्देशन कमज़ोर है. फिल्म देखकर समझ में आ जाता है कि कॉमेडी उनका मज़बूत पक्ष नहीं है. या शायद स्क्रिपट कमज़ोर थी जिसकी वजह से वो ठीक काम नहीं कर पाए.

अमित त्रिवेदी का संगीत साधारण है. फिल्म का शीर्षक गीत और 'लेज़ी लैड' गाने अच्छे बन पड़े हैं. फिल्म का संपादन भी बहुत अच्छा नहीं है.

कुल मिलाकर घनचक्कर एक ऐसी कॉमेडी फिल्म है जिसमें दर्शकों को हंसी नहीं आती. और जब ये दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान नहीं बिखेर पाएगी तो इसके वितरकों के होठों तक भी मुस्कान नहीं आ पाएगी.

बॉक्स ऑफिस पर इसका चलना बेहद मुश्किल है और फिल्म का नुकसान होगा.

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