क्या अमिताभ ही बचे हैं आख़िरी रास्ता!

  • 3 जुलाई 2013
अमिताभ बच्चन की 1990 में रिलीज़ हुई 'अग्निपथ' का रीमेक 2012 में रिलीज़ हुआ.

हाल ही में अमिताभ बच्चन की दो फ़िल्मों 'आख़िरी रास्ता' और 'अंधा क़ानून' के रीमेक अधिकार ख़रीदे गए. ये दोनों ही फ़िल्में 80 के दशक की बेहद कामयाब फ़िल्में हैं. इन फिल्मों के रीमेक अधिकार पैन इंडिया नेटवर्क ने खरीदे हैं.

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इससे पहले शाहरुख खान ने अमिताभ की 'डॉन' और ऋतिक रोशन ने 'अग्निपथ' के रीमेक में काम किया था. 'ज़ंजीर' के रीमेक की शूटिंग चल रही है. 'दो और दो पांच', 'सत्ते पे सत्ता' और 'दीवार' के रीमेक खरीदे जाने की बात चल रही है.

हाल के सालों में बॉलीवुड में कई पुरानी फ़िल्मों के रीमेक बने हैं, लेकिन रीमेक के इस बाज़ार में सबसे ज़्यादा मांग अमिताभ बच्चन की फ़िल्में की है. भला ऐसा क्यों ?

'सबसे बड़े सितारे'

Image caption हाल ही में अमिताभ की फिल्म 'अंधा कानून' और 'आखिरी रास्ता' फिल्मों के रीमेक अधिकार खरीदे गए.

'अग्निपथ' का रीमेक बनाने वाले निर्देशक करण मल्होत्रा कहते हैं, "अमिताभ बच्चन भारत के सबसे बड़े सितारे हैं. हम सभी लोग उन्हें देखकर बड़े हुए हैं. हर कोई ख़ुद को उनसे जोड़ सकता है. इस वजह से उनकी फ़िल्मों के रीमेक की सबसे ज़्यादा मांग होती है."

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अमिताभ के क़रीबी दोस्त और 1978 की उनकी सुपरहिट फ़िल्म 'डॉन' के निर्देशक चंद्रा बारोट कहते हैं, "अमिताभ पिछले 40 साल से लोगों से जुड़े हुए हैं. उन्होंने हर दौर में अपने आपको ढाला हुआ है. हर पीढ़ी का दर्शक उनसे जुड़ा हुआ है. बाकी सितारों के साथ ये बात नहीं है. इसलिए अमित की फ़िल्मों के रीमेक में हर किसी की दिलचस्पी होती है."

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'आखिरी रास्ता' और 'अंधा कानून' के रीमेक अधिकार ख़रीदने वाली पैन इंडिया कंपनी के पास अमिताभ बच्चन की कई फ़िल्मों के वीडियो अधिकार हैं जिन्हें वो कई सैटेलाइट चैनलों को बेचती है.

टीवी पर भी सुपरहिट

पैन इंडिया के सीएमडी जयंतीलाल गाढा कहते हैं, "अमित जी की फ़िल्में जितनी बार भी टीवी पर दिखाई जाती हैं उन्हें ज़बरदस्त प्रतिक्रिया मिलती है. टीवी चैनलों के लिए वो हमेशा फ़ायदे का सौदा साबित होती हैं. अमिताभ बच्चन नाम, इतना बड़ा ब्रांड है कि हर कोई इससे जुड़ना चाहता है. इसलिए वो रीमेक के बाज़ार के भी शहंशाह हैं."

करण मल्होत्रा भी इस बात से इत्तेफ़ाक़ रखते हैं.

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वो कहते हैं, "टीवी पर हम उनकी वो फ़िल्में देखकर भी भरपूर लुत्फ़ उठाते हैं जो उस दौर में सफल नहीं रहीं. 'तूफ़ान' और 'जादूगर' जैसी फिल्मों को देखते हैं और फिर उनकी कॉपी करते हैं. किसी भी प्रोड्यूसर से आप रीमेक की बात करो और सिर्फ अमिताभ की फ़िल्म का नाम बस ले लो. वो फ़ौरन तैयार हो जाता है."

हालांकि फ़िल्मकार मानते हैं कि अमिताभ की फ़िल्मों के रीमेक बनाते वक़्त इस बात का ख़्याल रखना ज़रूरी है कि नई फ़िल्म में हीरो के किरदार को थोड़ा बदल दिया जाए. वरना लोग उसे अमिताभ के किरदार से तुलना के तौर पर देखेंगे और ये बात नई फ़िल्म के लिए हानिकारक साबित होगी.

करण मल्होत्रा कहते हैं, "मेरे लिए पुरानी 'अग्निपथ' के अमिताभ भगवान की तरह थे. वो 'लार्जर दैन लाइफ' किरदार थे. वहीं मैंने अपनी 'अग्निपथ' में उस किरदार को थोड़ा अंडरडॉग बनाया, जिसे ऋतिक ने निभाया. मेरी 'अग्निपथ' का विजय दीनानाथ चौहान मेरा दोस्त था."

नाकाम रीमेक

Image caption शाहरुख ख़ान ने अमिताभ की सुपरहिट फिल्म 'डॉन' के रीमेक में काम किया था.

हालांकि अमिताभ की हर फ़िल्म का रीमेक कामयाब हो, ऐसा भी नहीं है.

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ख़ुद अमिताभ बच्चन ने अपनी ही सुपरहिट फिल्म 'शोले' के रीमेक में काम किया था, जिसका निर्देशन रामगोपाल वर्मा ने किया था. फ़िल्म का नाम था 'रामगोपाल वर्मा की आग' और ये बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह नाकाम रही.

चंद्रा बारोट मानते हैं कि फ़िल्म चाहे किसी की भी हो, रीमेक उन्हीं फ़िल्मों का बनना चाहिए जो लोगों के दिमाग़ में बसी हों.

लेकिन कई फ़िल्मकारों और विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही रीमेक ज़्यादा अच्छा व्यवसाय करें लेकिन लोग कुछ समय बाद पुरानी फ़िल्मों को ही याद रखते हैं.

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