जब लता की वजह से गुलज़ार हुए मजबूर

 भूपेंद्र, गुलज़ार और भूपेंद्र की पत्नी मिताली इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption 'सुरमयी रात' के लॉन्च पर भूपेंद्र, गुलज़ार और भूपेंद्र की पत्नी मिताली.

गुलज़ार जैसे नामी गिरामी गीतकार को अपना फैसला भला किसकी वजह से बदलने पर मजबूर होना पड़ सकता है? जवाब है लता मंगेशकर की वजह से.

किस्सा बहुत पुराना है और इसे पत्रकारों से ख़ुद गुलज़ार ने बांटा.

(गुलज़ार पर बीबीसी की ख़ास पेशकश)

60 के दशक में फिल्म 'ख़ामोशी' बन रही थी. जिसके लिए गुलज़ार ने गीत लिखा था, 'हमने देखी है उन आंखों की महकती ख़ुशबू'.

गुलज़ार कहते हैं, "मैंने ये गाना फिल्म के पुरुष कलाकार के लिए लिखा था, लेकिन जब फिल्म के संगीतकार हेमंत कुमार ने ये गीत सुना तो फट से बोले, ये गाना तो लता गाएगी."

(पढ़िए: क्यों घर से भागी थीं लता मंगेशकर)

गुलज़ार बताते हैं कि ये सुनते ही वो घबरा गए और हेमंत कुमार से बोले, "लेकिन दादा, ये गाना तो किसी मर्द पर फिल्माया जाना चाहिए जो फिल्म की हीरोइन के लिए ये गा रहा है. क्योंकि 'हमने देखी है उन आंखों की महकती ख़ुशबू' कोई स्त्री, पुरुष के लिए गाए ये बात अजीब सी लगती है."

Image caption 'हमने देखी है इन आंखों की महकती ख़ुशबू', को गुलज़ार ने पुरुष कलाकार के लिए लिखा था, लेकिन बाद में इसे लता मंगेशकर ने गाया.

लेकिन हेमंत कुमार अड़े रहे और आखिरकार ये गाना लता मंगेशकर ने ही गाया.

गुलज़ार आगे कहते हैं, "अब आप ये गाना सुनो तो अहसास तक नहीं होगा कि मैंने शुरुआत में ये किसी पुरुष के गाने के लिए लिखा है. ये ताकत है लता मंगेशकर की जो किसी गाने का जेंडर तक बदल देने की क़ाबिलियत रखती हैं."

सुरमयी रात

गुलज़ार ने ये बातें कहीं एलबम 'सुरमयी रात' के लॉन्च के मौके पर, जिसके गीत उन्होंने लिखे हैं और गाया है उनके क़रीबी दोस्त और गायक भूपेंद्र ने.

गुलज़ार ने बताया कि इस एलबम के सारे गीत 'रात' पर आधारित हैं.

(गुलज़ार के 'छल्ला' की आलोचना पर शाहरुख़ का जवाब)

जब उनसे पूछा गया कि रात को लेकर इतना आकर्षण क्यों, तो गुलज़ार ने कहा, "दरअसल रात ही वो वक़्त होता है जब आप सिर्फ अपने आपके साथ होते हैं. दिन की चहल-पहल में तो अपने ख़ुद पर फोकस ही नहीं कर पाते हो. इसलिए रात मुझे हमेशा लुभाती है."

'परेशान' हुए गुलज़ार

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Image caption मीडिया के कई सवालों से गुलज़ार काफी परेशान भी हुए और उन्होंने अपनी नाराज़गी खुलकर ज़ाहिर भी की.

इस मौके पर कई बार मीडिया के सवालों ने गुलज़ार को 'परेशान' किया. जब एक बार फिर किसी पत्रकार ने उनसे से सवाल दागा कि 'रात' पर ही आधारित गाने क्यों तो गुलज़ार बोले, "मैं कितनी दफा इस बात का जवाब दूं. बार-बार एक ही बात को दोहराओ तो लगने लगता है कि आप झूठ बोल रहे हो. आप क्यों एक ही सवाल बार-बार पूछते हो."

(ग़ालिब पर गुलज़ार)

जब उनसे एक पुराने अभिनेता की बरसी पर आधारित सवाल किसी पत्रकार ने पूछा तो गुलज़ार को ये सवाल भी पसंद ना आया और वो बोले, "आप किसी की शादी में जाओ और कोई आपसे जनाज़े की बात करे या किसी की मौत पर ग़म जताने जाओ और कोई किसी की शादी पर सवाल करे तो बड़ी बेतुकी सी बात लगती है. मीडिया की ज़िम्मेदारी है कि इस तरह की संवेदनशीलता तो कम से कम दिखाए."

गुलज़ार के आने वाले प्रोजेक्ट कौन-कौन से हैं? किन फिल्मों के लिए वो गाने लिख रहे हैं और बतौर फिल्म निर्देशक क्या उनकी वापसी होगी, जब ये सवाल उनसे पूछे गए तो उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "इस पर फिर कभी बात करेंगे."

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