इरफान खानः बड़ा शहर बहुत क्रूर है, बुजुर्गों के लिए

इरफान खान

बड़ा शहर बहुत क्रूर है, बुजु़र्गों के लिए. ऐसा मानना है मशहूर अभिनेता इरफान खान का.

लोगों की भरपूर सराहना बटोर चुकी फिल्म 'लंच बॉक्स' के किरदार की जादूगरी और छोटी-छोटी बारीकियों के बारे में अभिनेता इरफान खान ने बीबीसी से साथ दिलचस्प गुफ्तगू की.

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कई और बातों की भी चर्चा की.

इरफान चाहते थे कि वे जिन चीज़ों पर फिदा हैं, उसे वे लोगों के साथ बांटे. इसीलिए उन्होंने फिल्म को अपना करियर चुना.

'लंच बॉक्स' का किरदार

'लंच बॉक्स' में किरदार की कई छोटी छोटी बारीकियां थीं. स्टेपलर उठाने से लेकर ट्रेन में सफर, घर का अकेलापन और टिफिन खाने तक के दृश्य बेहद बारीक तरीके से पेश किए गए हैं.

कान महोत्सव में जिस 'लंच बॉक्स' के लिए इरफान खान को खूब तारीफ मिली, उसके मॉडल उनके अपने मामू थे.

इरफान बताते हैं कि इन दृश्यों को जब वे कर रहे थे तो उनके ज़हन में मामू की तस्वीर होती थी. मामू मंजूर अहमद सुबह 7 बजे बस लेकर स्टेशन जाते. ट्रेन पकड़ते. ट्रेन से फिर चर्चगेट जाते, दफ्तर पहुंचने के लिए वहां से फिर एक और ट्रेन लेते.

सालों की उनकी दिनचर्या, उनके हाव-भाव सब एक मॉडल की तरह फिल्म में एक्टिंग करते वक्त इरफान के दिलो दिमाग में मौजूद थे.

इरफान बताते हैं, "बुज़ुर्गों के लिए बड़ा शहर बहुत क्रूर है. लगता है कि सारा खून चूस लिया गया है और वे खत्म हो चुके हैं. मुझे कई बार मामू के पैरों पर पड़े वे निशान दिखते थें जो ट्रेन में, भीड़ में, धक्कों में उभर आते थे. फिल्म करते वक्त ये सब मेरे ज़हन में छाया हुआ था."

वे आगे बताते हैं, "'लंच बॉक्स' का किरदार करते वक्त मुझे लगा कि मैं अपने दिल की बात शेयर करूं. फिर मैंने अपने मामा के बारे में इस किरदार के ज़रिए सारी बातें लोगों से बांटी."

ऑस्कर जीतने की ख्वाहिश

इरफान की फिल्म पानसिंह तोमर के ऑस्कर जीतने की ख्वाहिश उनके चाहने वालों के दिल में ही रह गई. अब ताज़ा फिल्म 'लंच बॉक्स' को लेकर भी इसी तरह की चर्चा चल निकली है.

इरफान कहते हैं, "मैं चाहता हूं कि मीडिया लोगों को इस बात के लिए जागरुक करे कि ऑस्कर में किस तरह की फिल्म जानी चाहिए. वहां ऐसी फिल्में जाएं जो दुनिया की नज़र में हिंदुस्तान की छवि या उसके प्रति नज़रिए को बेहतर बना सके."

इरफान ऑस्कर जैसे समारोह को एक महत्वपूर्ण अवसर मानते हैं. वे मानते हैं कि इसके लिए सोच समझ कर फिल्मों का चुनाव होना चाहिए.

वे कहते हैं, "ये वो मौका है जिसके ज़रिए आप देश की मौजूदा और भविष्य की पीढ़ी को प्रेरित कर सकते हैं. लोगों को भी शिक्षित किया जाना चाहिए ताकि कुछ भी ऊपर नीचे हो तो लोग आवाज़ उठा सकें."

इरफान खान की अभिनय के साथ-साथ एक और बात में खासी दिलचस्पी है. वो है ऑर्गेनिक फार्मिंग. वे पत्नी सुतपा की मदद से अपने फार्म हाउस में ऑर्गेनिक फार्मिंग करते हैं.

उनकी पहली कोशिश होती है कि बाज़ार से कुछ ना खरीदना पड़े.

वे कहते हैं, "इस धरती पर आने वाले हर इंसान को ये हक होना चाहिए कि वह अपना खाना उगा सके."

वे कहते हैं, "खाने का स्वाद बिगड़ चुका है. न तो फलों में स्वाद है और न ही किसी सब्ज़ी में. आपके भीतर जो खाना जाता है उसका असर सोच पर भी होता है."

'मैं इस दुनिया में चीज़ों को चैलेंज करने आया हूं'

आमतौर पर देखा गया है कि सार्वजनिक मौकों पर इरफान अक्सर अकेले ही नजर आते हैं.

इस बारे में अभिनेता इरफान ने बताया कि फैमिली लाइफ थोड़ी प्राइवेट रहे तो ज्यादा अच्छा है. इरफान कहते हैं, "लोग दस तरह की बातें करते हैं, अंदाजे लगाते हैं. लोगों से काम शेयर करते हैं, यही काफी है. प्राइवेट लाइफ बिना वजह सामने ना आए तो ज़्यादा अच्छा है."

'साहब बीवी और गैंगस्टर' में इरफान खान एक रोमांटिक हीरो के बतौर देखे गए तो लंच बॉक्स में वे बिलकुल अलग ही अंदाज़ में नज़र आते हैं. कहा जाता है कि वे खुद अपनी इमेज बनाते हैं, खुद तोड़ते हैं. उन्हें किसी एक खांचे में फिट करना मुश्किल है.

इरफान खान कहते हैं कि काम को ज़िंदा रखने के लिए, एक्स्क्लूसिव बनाए रखने के लिए, लोगों को कुछ नया देने के लिए वे हमेशा अलग-अलग अंदाज के किरदार निभाने का रिस्क लेते रहेंगे. उन्होंने कहा, "मैं इस दुनिया में चीज़ों को चैलेंज करने आया हूं. खुद को भी चैलेंज करता रहूंगा. साथ में कुछ परिभाषाएं भी बदलें, तो बढ़िया."

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