'मैं ज़ंजीर में 'विजय' बना, तो पिता जल उठे'

  • 5 सितंबर 2013
बॉलीवुड

एक 'विजय' 40 सालों तक फिल्म के दीवानों का मनोरंजन करता रहा. तो दूसरा विजय लगभग उसी अंदाज और अदाकारी में हमारे सामने आने वाला है. क्या ये 'विजय' लोगों को पसंद आएगा?

निर्देशक अपूर्व लाखिया अमिताभ बच्चन की ज़ंजीर फिल्म का रीमेक बना रहे हैं. इसमें अमिताभ बच्चन वाले विजय का किरदार निभा रहे हैं दक्षिण फिल्मों के अभिनेता रामचरण तेजा.

रामचरण तेजा दक्षिण भारतीय सुपरस्टार चिरंजीवी के बेटे हैं. वे अपूर्व लाखिया की फिल्म ज़ंजीर से बॉलीवुड में डेब्यू कर रहे हैं.

अमिताभ बच्चन की 'ज़ंजीर' चार दशक पहले आई थी. तब रामचरण तेजा का जन्म भी नहीं हुआ था.

'मैं एक कोरा कागज हूं'

अपूर्व की ज़ंजीर के बारे में रामचरण बताते हैं कि यह फिल्म युवाओं के एक बड़े वर्ग ने अब तक नहीं देखी. 16 साल से 35 साल के बीच के उम्र के लोगों ने यू-ट्यूब पर बस इसकी क्लीपिंग देखी होगी.

अमिताभ बच्चन हिंदी फिल्मों के महानायक माने जाते हैं. उनके साथ तुलना के डर से शाहरुख खान के अलावा बहुत कम अभिनेता ऐसे हैं जो उनकी फिल्म का रीमेक करने की हिम्मत करते हैं.

रामचरण तेजा को इस तरह की तुलना से डर नहीं लगता.

वे मानते हैं कि शाहरुख खान और ऋतिक रोशन के लिए यह भूमिका चुनौती भरी होती. क्योंकि उनकी इमेज स्टार की है. लोग उनसे ज्यादा अपेक्षाएं रखते हैं.

रामचरण कहत हैं, "मगर मैं तो अभी इस बॉलीवुड में नया हूं. प्रशंसकों के बीच मेरी जीरो-इमेज है. मैं एक कोरे कागज की तरह हूं, जिस पर आप कुछ भी लिख सकते हैं."

पिता को ज़लन हुई

अमिताभ बच्चन की छवि 'लार्जर दैन लाइफ' की है. इस भूमिका के लिए रामचरण ने काफी तैयारियां की. मगर इसके साथ ही वे यह भी मानते हैं कि उन्होंने अमिताभ की नकल करने की कोशिश नहीं की.

उनका कहना है, "इस तरह की भूमिकाओं के लिए काफी जवाबदेह होने की जरूरत होती है. हमें कभी अमिताभ बच्चन जैसा बनने की नहीं, बल्कि अमिताभ बच्चन से प्रेरित होने की जरूरत है."

रामचरण बताते हैं, "जब मेरे डैड को ज़ंजीर की मेरी भूमिका के बारे में पता चला, उन्हें जलन हुई. वे अमिताभ बच्चन के बहुत बड़े फैन हैं. वे उनकी भूमिका नहीं कर पाए इस बात से वे मुझसे ईर्ष्या करने लगे थे."

रामचरण को यह फिल्म करने के लिए उनके पिता चिरंजीवी ने काफी प्रोत्साहित किया.

चिरंजीवी ने रामचरण को कहा, " बिलकुल मत डरो. ये एकदम नई स्क्रिप्ट है. निर्देशक ने ज़ंजीर को एकदम नया अंदाज दिया है. खूब जिम्मेदारी से काम करो."

अच्छे एक्टर का टैग

तेजा का कहना है कि फिल्म स्टार की बदौलत नहीं चलती, बल्कि सिनेमा पसंद आने पर ही फिल्म चलती है.

नए ज़ंजीर में हिंदी फिल्मों के कई दबंग स्टार हैं. संजू हैं, प्रियंका हैं, प्रकाश राज है. रामचरण बेशक दक्षिण के टॉप स्टार हैं. मगर वे इस फिल्म में डेब्यू कर रहे हैं.

मगर उन्हें दबंग स्टारों के बीच कोई खास दबाव महसूस नहीं होता. वे कहते हैं कि सेट पर आते ही स्टार सब भूल जाते हैं. वे बस किरदार रह जाते हैं. अपूर्वा सबको फिल्म के नाम से बुलाते हैं.

वे बताते हैं, "जब मैं सेट पर आता हूं तो वे मुझे विजय बुलाते हैं, संजू सर को शेर खान. स्टार बस एक किरदार का रुप ले लेता है."

ज़ंजीर ने अमिताभ को 'यंग एंग्रीमैन' का टैग दिया. इस फिल्म से रामचरण बस इतना चाहते हैं कि उन्हें 'अच्छे ऐक्टर' का टैग मिले.

कभी अमिताभ से, कभी पिता से तुलना

रामचरण ने बॉलीवुड में सफल होने की कोई रणनीति नहीं बनाई.

उनका मानना है, "सिनेमा किसी रणनीति का नहीं, बल्कि सही विषय चुनने का नाम है."

साउथ में जब उन्होंने डेब्यू किया तो उनकी तुलना उनके पिता चिंरजीवी से हुई. अब जब वे बॉलीवुड में डेब्यू कर रहे हैं, तो उनकी तुलना अमिताभ बच्चन से हो रही है.

वे इसे न तो अच्छा मानते हैं, न बुरा. इतने दबाव में काम करना अब उनकी आदत बन गई है. अब तो बात यूं हो गई है कि जब दबाव होता है तो वे सबसे अच्छा काम करते हैं.

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