'चलती-फिरती लाश' पर ऑनलाइन कोर्स

वॉकिंग डेड, टीवी शो, ऑनलाइन कोर्स,  अमरीका, केलीफ़ोर्निया विश्वविद्यालय

क्या 'ज़ॉम्बी' यानी 'ज़िंदा लाशें' भी गंभीर शैक्षणिक अध्ययन का विषय हो सकता है? क्या यह भविष्य की उच्च शिक्षा पद्धति का नया नमूना है?

‘एजूटेनमेंट’ यानी शैक्षणिक मनोरंजन की दिशा में अपनी तरह के इस सबसे बड़े प्रयोग का दावा किया जा रहा है. अमरीका की एक टेलीविज़न कंपनी ने केलीफ़ोर्निया के टॉप रैंकिंग विश्वविद्यालय की साझेदारी में हिट टीवी शो पर आधारित एक ऑनलाइन कोर्स तैयार किया है.

शैक्षणिक अध्ययन और मनोरंजन उद्योग में धुंधली होती डिजिटल सीमाओं के बीच अगले महीने से यह कोर्स लॉन्च हो रहा है, जिसे ‘वॉकिंग डेड’ नाम की टीवी श्रंखला पर आधारित किया गया है.

अब तक टेलीविज़न शो पर आधारित वीडियो गेम्स और मार्केटिंग उत्पाद तैयार होते रहे हैं, मगर अपोकलिप्स यानी तबाही से निपटने और सामाजिक विघटन से बचाव के बारे में बनी इस ड्रामा सिरीज़ का अब अपना विश्वविद्यालय कोर्स होगा.

इस ऑनलाइन कोर्स को तैयार करने वाले केलीफ़ोर्निया विश्वविद्यालय के मुताबिक़ शैक्षणिक लिहाज़ से शो में दिखाई गई घटनाओं के वैज्ञानिक पहलुओं को समझाना काफ़ी मुश्किल और गंभीर काम है.

इस कोर्स में एक भौतिक विज्ञानी ‘तबाही के पीछे विज्ञान’ की जानकारी देंगे. जनस्वास्थ्य विभाग इस सिरीज़ के ज़रिए एक अहम सवाल की पड़ताल होगी कि ‘पिछली महामारियों से हम क्या सीख सकते हैं?’

गणित पर होने वाले लैक्चरों के ज़रिए बताया जाएगा कि कैसे ‘कैलकुलस के बाद के गणित का इस्तेमाल जनसंख्या और महामारी की गत्यात्मकता समझने में हो सकता है.’

शोबिज़ के सवाल

Image caption 'वॉकिंग डेड' ज़ॉम्बी पर आधारित पहला शैक्षणिक कार्यक्रम होगा जिसे केलीफ़ोर्निया यूनिवर्सिटी ने तैयार किया है.

इस शो को एएमसी ने बनाया है जिसने मैड मैन, ब्रेकिंग बैड और द किलिंग जैसी मशहूर सिरीज़ बनाई थीं. एएमसी की वाइस प्रेसीडेंट थेरेसा बेयर कहती हैं कि यह शो बिज़नेस और शैक्षणिक साझेदारी एक ‘अनोखा शैक्षणिक अनुभव’ देने में कामयाब होगी.

वह कहती हैं कि एएमसी ‘पहला ऐसा मनोरंजन ग्रुप होगा जो ऑनलाइन शिक्षा के क्षेत्र में आ रहा है.’ वह इस कोर्स को ‘शो के साथ गहरे और लंबे संबंध’ के बतौर देखना चाहती हैं.

एक करोड़ दर्शक

‘वॉकिंग डैड’ टीवी सिरीज़ को दुनियाभर में तक़रीबन एक करोड़ लोग देखते हैं. उम्मीद की जा रही है कि ऑनलाइन कोर्स के लिए आवेदन करने वाले छात्रों की तादाद भी लाखों में होगी.

अगर यह प्रयोग कामयाब रहा तो इस कोर्स के लिए ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म मुहैया कराने वाली संस्था इन्स्ट्रक्चर आगे भी दूसरे टीवी शो और यूनिवर्सिटी पाठ्यक्रमों के बीच तालमेल पैदा कर सकती है.

इन्स्ट्रक्चर के सीईओ जोश कोट्स कहते हैं कि किसी सिरीज़ जैसे मैडमैन के आसपास किसी एडवर्टाइज़िंग पाठ्यक्रम को बुनना मुश्किल काम नहीं है.

इस साझेदारी की वजह से मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्सेज़ यानी ‘मूक्स’ के तेज़ी से बढ़ते दायरे में भी इज़ाफ़ा होगा. मूक्स को हाल ही में ऑक्सफ़ोर्ड ऑनलाइन डिक्शनरी में शामिल किया गया है.

Image caption ‘वॉकिंग डैड’ टीवी सिरीज़ को दुनियाभर में तक़रीबन एक करोड़ लोग देखते हैं.

लाखों छात्रों ने पिछले साल ऑनलाइन पाठ्यक्रमों में ख़ुद को पंजीकृत कराया था. इससे लगता है कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में ऐसे पाठ्यक्रमों की मांग बढ़ रही है.

हालांकि लाखों छात्र अपने कोर्स पूरे करने में नाकामयाब रहे. इससे पता चलता है कि ऑनलाइन पढ़ाई की दिशा में चुनौतियां भी कम नहीं हैं.

अक्टूबर से शुरुआत

आठ मॉड्यूल वाला यह कोर्स अक्टूबर के मध्य में शुरू होगा और हर किसी को मुफ़्त में उपलब्ध होगा. बस आपके पास इंटरनेट कनेक्शन होना चाहिए.

पढ़ाई करने वाले छात्रों के ऑनलाइन इम्तिहान लिए जाएंगे और इसमें चर्चा के लिए ग्रुप होंगे. हालांकि इस कोर्स के छात्रों को इसके एवज में कोई क्रैडिट या डिग्री नहीं मिलेगी.

इसलिए इसमें ऐसे छात्र ज़्यादा हिस्सा लेंगे, जो अपने हिसाब से इसकी पढ़ाई करना चाहते हैं.

क्या हैं खतरे?

Image caption 'वॉकिंग डेड' सिरीज़ पर आधारित कोर्स के ज़रिए विज्ञान और सामाजिक विज्ञान के बीच पुल तैयार करने की कोशिश की गई है.

तो क्या इसके कुछ ख़तरे भी हैं? क्या केलीफ़ोर्निया यूनिवर्सिटी अपने प्रॉस्पेक्टस में ज़ॉम्बी की पढ़ाई को दर्ज कराना चाहती है?

यूनिवर्सिटी में दूर शिक्षा की असोसिएट डीन मैलिसा लोबल कहती हैं, ‘जब हमने साझेदारी का फ़ैसला किया, तो हमें पता था कि हर मॉड्यूल को शैक्षणिक दृष्टि से बेहद मज़बूत बनाना ज़रूरी होगा. कोर्स के पाठ काफ़ी कठिन और शानदार होंगे और शो से उनका सीधा संबंध होगा.’

‘अपॉकलिप्स’

सामाजिक विज्ञान के लैक्चरर जोआन क्रिस्टोफ़रसन कहते हैं कि यह मौजूदा मीडिया के इस्तेमाल की दिशा में एक क़दम आगे की चीज़ है.

वह कहते हैं, ‘मुझे छात्रों को पढ़ाते समय अपने लैक्चर दिलचस्प बनाने के लिए उन्हें ताज़ा मुद्दों से जोड़ना पड़ता है. केवल इसलिए नहीं कि जिन्हें मैं पढ़ा रहा हूं वो अभी हाईस्कूल से निकले किशोर हैं बल्कि इसलिए कि क्लासिक सिद्धांतों को उनके लिए प्रासंगिक बनाना ज़रूरी है. हम इस सिरीज़ को पूरे कोर्स के लिए एक उदाहरण के बतौर पेश करने की कोशिश में हैं.’

इन्स्ट्रक्चर के प्रमुख जोश कोट्स कैनवस ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म मुहैया कराते हैं. उनके मुताबिक़ इसमें विज्ञान और सामाजिक विज्ञान के मुद्दों को टीवी शो के आधार पर देखने की कोशिश की जाएगी.

वह कहते हैं, ‘यह काफ़ी मौजूं है. आतंकी हमले, कटरीना तूफ़ान, फ़ुकुशिमा जैसी चीज़ें हमारी दुनिया में रोज़ घटित होती हैं. जो एक तरह से स्थानीय तौर पर ही सही, पर हमारे लिए अपॉकलिप्स की तरह हैं यानी हमारी बनाई दुनिया में तबाही लाती हैं. यह कोर्स लोगों को ऐसी आपदाओं को समझने का एक मौक़ा देता है.’

यूनिवर्सिटी ऑफ़ बकिंघम में सेंटर फ़ॉर एजुकेशन एंड एम्प्लॉयमेंट रिसर्च के डायरेक्टर एलन स्मिथर्स टीवी से जुड़े ऐसे ऑनलाइन पाठ्यक्रमों पर संदेह जताते हैं.

उनका कहना है कि बगैर पूर्व योजना और निजी कॉन्टेंट के इस्तेमाल किए यह पाठ्यक्रम एक टेलीविज़न डॉक्यूमेंट्री से ज़्यादा कितना दे पाएगा, यह देखना ज़रूरी होगा.

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