पर्दे से गायब क्यों है सुपरहीरोइन?

  • 15 सितंबर 2013
हैल बेरी

यह साल भी सुपरहीरो और कॉमिक्स के चरित्रों पर बनी फ़िल्मों के लिए काफी बढ़िया रहा है. ऑयरन मैन, सुपरमैन और वॉल्वेराइन जैसे चरित्र न केवल दुनिया को ख़तरों से बचाने में कुशल हैं बल्कि सिनेमा हॉल में दर्शकों की भीड़ खींचने में भी माहिर हैं.

2011 की हिट फ़िल्म 'थोर' के इस साल रिलीज़ होने वाले सिक्वेल 'थोरः दि डार्क वर्ल्ड' के भी हिट होने की उम्मीद जताई जा रही है.

हॉलीवुड में कामिक्स के चरित्रों पर बनी फ़िल्मों का महत्व और संख्या बढ़ती जा रही है लेकिन इन चरित्रों में महिला चरित्रों की संख्या बहुत कम है.

गिनेथ पाल्ट्राव(आयरैन मैन), एमी एडम्स(सुपरमैन) और नताली पोर्टमैन(थोर) की सुपरहीरो वाली फ़िल्में इस साल रिलीज़ होने वाली हैं.

गिनेथ(शेक्सपीयर इन लव) और नताली(ब्लैकस्वान) अपने शानदार अभिनय के लिए ऑस्कर जीत चुकी हैं तो एमी को भी उनकी फ़िल्म 'जूनबग' के लिए ऑस्कर नामांकन मिल चुका है.

जानलेवा कमज़ोरी

सशक्त और प्रभावशाली महिला किरदार होने के बावजूद फ़िल्म में इन नायिकाओं का मुख्य काम फ़िल्म के मर्द हीरो के मिशन में उसकी मदद करना ही है.

कनाडा के अख़बार दि नेशनल पोस्ट की नतालिया एटकिंसन कहती हैं, "कामिक्सों पर बनी फ़िल्मों में ज़्यादातर महिला किरदार या तो हीरो की सहायक होती हैं या फिर फ़िल्म के रोमांटिक उपकथानक की ज़रूरत.

कई बार ये महिला किरदार खलनायिकाएं होती हैं तो कई बार हीरो की जानलेवा कमजोरी. पेपर पॉट(गिनेथ) जैसी फ़िल्मों के महिला किरदार काफी बेहतर होते हैं लेकिन इस फ़िल्म में भी नायिका को नायक की मदद की ज़रूरत पड़ ही जाती है."

फ़िल्मों की इस सीमा के बार में फ़िल्म पत्रिका एंपायर से जुड़ी हेलेन ओ हारा कहती हैं, "इसका एक बड़ा कारण यह है कि ये सारी फ़िल्में बेहद लोकप्रिय पुरुष कॉमिक्स चरित्रों पर आधारित होती हैं."

वंडर वूमैन

लोकप्रिय महिला कॉमिक्स चरित्रों की कमी नहीं है लेकिन वंडर वूमैन जैसे बेहद सफल महिला चरित्रों को भी सिनेमा में बैटमैन या सुपरमैन जैसे पुरुष कॉमिक्स चरित्रों जैसी तवज्जो नहीं मिल पाती.

दि एवेंजर के निर्देशक जॉस वेडन ने कई साल पहले वंडर वूमैन पर आधारित एक पटकथा लिखी भी थी लेकिन वार्नर ब्रदर्स के अधिकारियों ने उसे ख़ारिज कर दिया था.

कार्टूनिस्ट डियाना टैंबलिन कहती हैं, "अब दूसरे या तीसरे स्तर के सुपरहीरो पर आधारित फ़िल्में भी बनने लगीं हैं लेकिन कई मुख्य चरित्रों के ऊपर केवल इसलिए फ़िल्म नहीं बनती क्योंकि वो महिला हैं. मुझे इस बात पर कतई यकीन नहीं है कि वंडर वुमैन जैसे मज़ेदार और लोकप्रिय चरित्र में लोगों की रुचि नहीं है."

फ़िल्म आलोचक मैरी एन्न जोहानसन कहती हैं, "जिस कारण से मुख्यधारा में महिला प्रधान फ़िल्में कम बनती हैं उसी कारण से कॉमिक्स के महिला चरित्रों पर भी कम फ़िल्में बनती हैं.

हॉलीवुड वालों ने तय कर रखा है कि वो केवल किशोरों और नौजवानों के लिए फ़िल्में बनाएंगे. हॉलीवुड को लगता ही नहीं कि दर्शक महिला प्रधान या सुपरहिरोइन वाली फ़िल्में देखना चाहते हैं."

बॉक्स ऑफिस

हॉलीवुड में यह मान्यता रूढ़ हो गई है कि नौजवान ही ज़्यादा फ़िल्में देखते हैं जबकि मोशन पिक्चर ऑफ अमरीका के आंकड़े बताते हैं कि वास्तविकता में दर्शकों की कुल संख्या में महिलाएं 52 प्रतिशत होती हैं.

सुपरवुमैन वाली आखिरी फ़िल्म 2005 में आई इलेक्ट्रा थी. इस फ़िल्म की नायिका थीं जेनीफर गार्नेर. यह फ़िल्म भी 2004 में आई हैल बेरी की फ़िल्म कैटवूमैन की तरह बॉक्स ऑफिस पर असफल रही थी.

टैंबलिन कहती हैं."हॉलीवुड इलेक्ट्रा और कैटवूमैन की असफलता को इस बात का प्रमाण मानता है कि सुपरवूमैन वाली फ़िल्में सफल नहीं हो सकतीं लेकिन ये फ़िल्में इसलिए नहीं पिटी कि ये नायिका प्रधान थीं बल्कि इसलिए पिटीं कि ये बुरी फ़िल्में थीं."

सिनेमाब्लेंड वेबसाइट की केटी रिच कहती हैं, "इन फ़िल्मों के मुख्य चरित्र पुरुष होते तो इनकी असफलता को इतनी गंभीरता से नहीं लिया जाता. ग्रीन लैंटर्न या टू हल्क जैसी सुपरहीरो वाली फ़िल्मों के लिए उनके पुरुष चरित्रों को दोषी नहीं ठहराया जाता."

संभावनाएँ

दि ट्विलाइट सिरीज़ की फ़िल्मों की सफलता ने साबित कर दिया है कि महिला प्रधान होना सुपरहीरो वाली फ़िल्मों की सफलता में बाधक नहीं होती.

इस सिरीज़ की पाँच फ़िल्मों ने तीन अरब डॉलर से ज्यादा की कमाई की है. दि हंगर गेम्स(जेनीफर लांरेस) की सफलता ने भी प्रमाणित किया है कि मजबूत एवं जटिल महिला चरित्रों वाली फ़िल्मों की भी दर्शकों में अच्छी मांग है.

जोहानसन कहती हैं, "जब तक हॉलीवुड महिला फ़िल्म निर्माताओं को सचेत रूप से बढ़ावा नहीं देता और उन्हें अपनी कहानियां सामने लाने के लिए सकारात्मक माहौल नहीं बनाता तब तक यह स्थिति नहीं बदलने वाली."

भविष्य की संभावनाओं के बार में रिच कहती हैं कि सुपरहिरोइन वाली फ़िल्मों को वंडर वूमैन या ऐसे ही दूसरे बहुत चरित्रों से ज्यादा उम्मीद तुलनात्मक रूप से छोट कॉमिक्स चरित्रों के फ़िल्मी रुपांतरण से है. इन फ़िल्मों में छिपी संभावनाओं को अब तक पूरा दोहन नहीं किया गया है. दूसरी तरफ दर्शकों को भी वंडर वूमैन के रुपहले पर्दे पर आने का इंतज़ार करने के साथ-साथ अन्य कम लोकप्रिय महिला चरित्रों बारे में अपनी जानकारी बढ़ाते रहने की ज़रूरत है.

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