फ़िल्म रिव्यूः फटा पोस्टर निकला हीरो

  • 21 सितंबर 2013
फ़िल्म 'फटा पोस्टर निकला हीरो'

रेटिंग:2.5

बिज़नेस रेटिंग:3

राजकुमार संतोषी द्वारा निर्देशित फ़िल्म 'फटा पोस्टर निकला हीरो' एक युवा लड़के की कहानी है जो हीरो बनने के सपने देखता है.

उसकी माँ सावित्री देवी (पद्मिनी कोल्हापुरी) ऑटोरिक्शा चलाती हैं और चाहती हैं कि उनकी बेटा ईमानदार पुलिस अफ़सर बने.

सावित्री के पति, यशवंत राय (मुकेश तिवारी) भ्रष्ट पुलिस अफ़सर होते हैं, जिनकी एक कार दुर्घटना में मौत हो जाती है. उस समय वो अवैध तरीके से मिली संपत्ति लेकर, अपनी बीवी और नवजात बच्चे विश्वास को छोड़कर भाग रहे थे.

विश्वास को मुंबई के पुलिस विभाग से इंटरव्यू का बुलावा आता है. लेकिन वह फ़िल्म इंडस्ट्री में मौके की तलाश रहा होता है. वह फ़िल्मी दुनिया के लिए अपना संघर्ष शुरू कर देता है.

एक दिन जब वह पुलिस की वर्दी में घूम रहा होता है, उसकी मुलाकात सामाजिक कार्यकर्ता काजल (इलीना डीक्रूज़) से होती है, जो उसे भूल से पुलिस अफ़सर समझ लेती है.

यह बात तेज़ी से फैलती है. ग़लती से विश्वास की फ़ोटो अख़बार में छप जाती है. उसके बाद क्या होता है? क्या अंत में विश्वास राव फ़िल्मी हीरो बनता है या पुलिस अफ़सर?

कहानी

राजकुमार संतोषी के फ़िल्म की कहानी साधारण है. फ़िल्म का स्क्रीन प्ले भी सामान्य है. लेकिन फ़िल्म के कुछ दृश्य मनोरंजक हैं और दर्शको को हंसी से लोटपोट कर देंगे.

इंटरवल से पहले फ़िल्म काफी मनोरंजक है. कुछ दृश्यों को तो दर्शकों के लिए पचा पाना मुश्कल हो जाता है.

विश्वास और काजल के बीच रोमांटिक दृश्यों की कमी स्क्रीन प्ले की कमी को दर्शाता है. फ़िल्म की पटकथा 1980 के फ़िल्मों सरीखी लगती है.

यह फ़िल्म कई मायने में अच्छी है. फ़िल्म में कॉमेडी के अनेक दृश्य है जो दर्शकों को हँसने पर मजबूर कर देंगे. फ़िल्म का भावनात्मक पक्ष ठीक है.

फ़िल्म के दृश्य दर्शकों को हँसाते तो हैं लेकिन अगर वे और असरदार होते तो दर्शकों की आँखों में आंसू भी ला सकते थे.

फ़िल्म का क्लाइमेक्स अच्छा है. राजकुमार संतोषी के लिखे संवाद रोचक हैं.

अभिनय

शाहिद कपूर का अभिनय शानदार है. फ़िल्म में उनके भावनात्मक दृश्यों की टाइमिंग बड़ी अच्छी है. भावनात्मक दृश्यों में उनको देखना अच्छा लगेगा. जहाँ तक उनके डांस की बात है, वो कठिन डांस नंबर 'अगल बगल' में भी अच्छा प्रभाव छोड़ते हैं.

उनके कदमों और चेहरे के भावों में अच्छा तालमेल नज़र आता है. इलीना डीक्रूज़ की भूमिका भले छोटी है लेकिन वो इसमें फिट बैठती हैं.

पद्मिनी कोल्हापुरी ने सावित्री की भूमिका बहुत अच्छे से की है. उनके अभिनय में आत्मविश्वास झलकता है.

मुकेश तिवारी का अभिनय भी काफी अच्छा है. दर्शन जरीवाला भी अपनी भूमिका के साथ पूरा न्याय करते हैं.

सौरभ शुक्ला, जाकिर हुसैन और संजय मिश्रा ने अपनी भूमिकाएं अच्छे से निभाई है. टीनू आनंद और नीर वोरा का गेस्ट अपीयरेंस अद्भुत है.

सलमान ख़ान कॉमिक सीन के माध्यम से अच्छी स्टॉर वैल्यू जोड़ते हैं. नरगिस फ़करी ने फ़िल्म के एक गाने में काफ़ी अच्छा डांस किया है.

निर्देशन

राजकुमार संतोषी का निर्देशन बेहतरीन है. वो साधारण स्क्रिप्ट के बावजूद दर्शकों का मनोरंजन करने और उनको फ़िल्म से जोड़ने में सफल होते हैं.

प्रीतम चक्रवर्ती का संगीत बहुत अच्छा है. फ़िल्म का एक गाना 'अगल बगल' हिट है और बोस्को-सीज़र की प्रस्तुति अद्भुद है.

इस फ़िल्म का 'धतिंग नाच' वाला गाना और उसकी केरियोग्राफी काफी अच्छी है.

इस फ़िल्म में 'मैं रंग शर्बतों का' वाला गाना भी काफी अच्छा है. अमिताभ भट्टाचार्य और इरशाद कामिल के गीत अच्छे हैं.

राजू सिंह का पार्श्व संगीत फ़िल्म के कॉमिक दृश्यों को सपोर्ट करते हैं.

कनल कन्नन और टीनू वर्मा के ऐक्शन दृश्य अपील करने वाले हैं. संदीप सुवर्णा के सेट ठीक हैं.

फ़िल्म 'फटा पोस्टर और निकला हीरो' बेहद मनोरंजक है. यह दर्शकों के साथ-साथ अपने वितरकों को भी हँसाएगी.

मल्टीप्लेक्स की बजाय सिंगल स्क्रीन सिनेमा हॉल्स में इसका प्रदर्शन अच्छा रहेगा.

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