टैटू, शेक्सपीयर और सिलेब्रिटीज

मैगन फॉक्स

शेक्सपीयर ने शायद ही कभी सोचा होगा कि उनकी लिखी बातों को मेगन फॉक्स, डेनिएले लाइंकर, लिंडसे लोहान जैसी हॉलीवुड अभिनेत्रियां अपने बदन पर गुदवाएँगी.

शायद ही ऐसा कोई हफ्ता गुज़रता होगा जब किसी सिलेब्रिटी के शरीर पर नए-नवेले तरह का टैटू न देखा जाता हो.

अभी हाल ही में एंजलीना जोली को अरबी में लंबी सूक्ति गुदवाए हुए देखा गया. जोली ने मशहूर अमरीकी लेखक टेनेसी विलियम्स की एक उक्ति भी गुदवा रखी है.

साहित्यिक पंक्तियाँ, गीतों के बोल और दार्शनिक उक्तियाँ टैटू गुदवाने वालों की पहली पसंद होती हैं.

मेगन फॉक्स ने अपनी देह पर शेक्सपीयर के नाटक 'किंग लीयर' की पंक्ति, "वी विल लाफ एट गिल्डेड बटरफ्लाई" (हम स्वर्णमंडित तितलियों पर हँसेंगे).

डेनियल लाइंकर ने शेक्सपीयर के नाटक 'मेजर्स ऑफ मेजर्स' की पंक्ति, "अवर डाउट्स आर ट्रेटर्स एंड मेक अस लूज दि गुड वी ऑफ्ट माइट विन, बाइ फियरिंग टू अटेंप्ट" (हमारा संदेह ही हमारे लिए असली धोखेबाज़ साबित होता है. ये हमें उन अच्छे कामों को करने से रोकता है जो हम कर सकते हैं लेकिन डर के कारण उसके लिए प्रयास नहीं करते.).

टैटू के मायने

Image caption विक्टोरिया बेकहम ने ओल्ड टेस्टामेंट के सांग ऑफ सोलोमन का एक अंश टैटू के रूप में गुदवा रखा है.

लिंडसे लोहान ने भी शेक्सपीयर के मशहूर नाटक 'हैमलेट' की पंक्ति गुदवा रखी हैं.

ये पंक्ति है, "व्हाट ड्रीम मे कम" (तो कौन से सपने आएँगे). ये पंक्ति शेक्सपीयर ने नींद की तुलना मौत से करते हुए लिखी हैं कि मृत्युरूपी सपने के दौरान मनुष्य को कौन से सपने आते होंगे !

टैटू बनवाने वालों की कोशिश होती है कि वो सारगर्भित दार्शनिक अर्थ वाले टैटू बनवाएँ. फुटबॉल खिलाड़ी डेविड बेकहम ने अपनी पत्नी विक्टोरिया बेकहम के नाम के ठीक नीचे "उट एमेन एट फोवियम" (ताकि मैं प्यार करूं और याद करूं) गुदवा रखा है.

लेखक और आलोचक सैम लीथ कहते हैं ये वाक्यों वाले टैटू प्रेरक हो सकते हैं लेकिन इनकी कुछ सीमा भी है.

लीथ कहते हैं, "हो सकता है समय के साथ आपकी पसंद बदल सकती है. 15 साल की उम्र में आपको लग सकता है कि कैचर ऑफ दि राइ आपके जीवन का सार है. 50 साल में आपको लगे कि ऐसा नहीं है. इसलिए कुछ गूढ़ और संक्षिप्त हो तो बेहतर."

किसी की गर्दन पर गुदे डेनमार्क के दार्शनिक सोरेन कीर्कगार्द या फिर 'गन्स एंड रोज़ेज़' के बोल से कोई सोच में पड़ सकता है. हो सकता है कि ऐसे किसी टैटू को देखकर कोई सोचे कि गर्दन पर गुदवाने की बजाय इसे अपने दिमाग में क्यों नहीं रख लेता ?

पहचान

Image caption साइमन टॉप्स ने केट मॉस के उपन्यास की एक पंक्ति गुदवा रखी है.

पेन्सिलवेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी में एंथ्रॉपलॉजी की प्रोफेसर नीना जैब्लांस्की कहती हैं, "टैटू बनवाने में एक बुनियादी अंतरविरोध भी होता है. सभी लोग चाहते हैं कि उनका टैटू सबसे अलग हो लेकिन वो यह भी चाहते हैं कि वो एक खास तरह का भी हो.

नीना कहती हैं, "इस से लोग अपनी साझी पहचान को स्थापित करना चाहते हैं और अपनी किसी खास चीज के बारे में बताना चाहते हैं. यह चीज इसमें नयापन लाती है. शेक्सपीयर, दांते या नीत्से की पंक्ति के माध्यम के आपका एक खास व्यक्ति से परिचय भी होता है."

लेकिन एक और सवाल है जो साहित्य के कट्टर चाहने वालों को परेशान करता है. ऐसे लोग को इस बात की चिंता रहती है कि इन बड़े लेखकों के लिखे को अपने शरीर पर गुदवाने वाले क्या उसका मतलब भी समझते हैं ?

एक साहित्यिक संस्था चलाने वाली एड्रियन टॉड जूनिंगा कहती हैं, "हो सकता है कि मेगन फॉक्स को शेक्सपीयर के नाटक के 'गिल्डेड बटरफ्लाई' वाले अंश के बारे में पता हो या उन्हें ये लगा हो कि 'ये पढ़ने-सुनने में अच्छा है'."

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